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रक्त के अकाल से मुश्किलें आईं अपार
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Many problem came from short blood
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का खजाना खाली हो गया है। दोनों ही अस्पतालों में इमरजेंसी यूनिट ब्लड ही बचा है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा थैलेसीमिया रोगियों को भुगतना पड़ा, जिन्हें कमोबेश हर माह नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे रोगियों के परिजन एक - एक यूनिट रक्त के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंकों में हर समय रक्त की उपलब्धता रहती थी, परंतु लॉकडाउन की वजह से लोग घरों से बाहर नहीं निकले और न ही रक्तदान शिविर आयोजित हुए, जिससे दोनों ब्लड बैंकों के खजाने खाली हो गए हैं। दोनों स्थानों पर इमरजेंसी यूनिट ही ब्लड बचा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ आठ और मेडिकल कॉलेज में महज दस यूनिट ब्लड ही मौजूद है। रक्त की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा थैलेसीमिया रोग से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ा। इन रोगियों में ज्यादातर बच्चे ही हैं। इन रोगियों के लिए एक-एक यूनिट रक्त की व्यवस्था करने के लिए परिजनों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। किसी ने अपने करीबियों से मिन्नतें कीं तो किसी ने खुद रक्त देकर अपने मरीज की जान बचाई। परिजनों को चिंता है कि यदि आने वाले दिनों में ब्लड बैंकों में रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित न हुई तो उनके सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
छनियापुरा निवासी इरफान की नौ वर्षीय पुत्री थैलेसीमिया रोग से ग्र्रसित है। सैलून पर काम करने वाले इरफान की पुत्री को लॉकडाउन के दरम्यान तीन बार खून की आवश्यकता पड़ी। वैसे तो वे आवश्यकता पड़ने पर हर बार पुत्री को ग्वालियर ले जाते थे और वहां रक्त चढ़वा लाते थे। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से वे ग्वालियर नहीं जा सके और स्थानीय स्तर पर भी रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाई। ऐसे में उन्होंने करीबियों से मिन्नतें की, तब जाकर खून की व्यवस्था हो पाई।
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सराय मुहल्ला निवासी शरीफ का साढ़े पांच साल का पुत्र थैलेसीमिया रोग से पीड़ित है, जिसे नियमित तौर पर रक्त की आवश्यकता होती है। उन्हें ब्लड बैंक से आसानी से खून मिल जाता था, परंतु इस बार उन्हें इसके लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। यहां वहां हाथ पैर मारने पर जब खून की व्यवस्था नहीं हो पाई, तो 27 मई को उन्होंने स्वयं एक यूनिट रक्तदान किया। शरीफ ने कहा कि वे इससे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। जब कहीं खून नहीं मिला तो उन्होंने खुद दे दिया। अब आगे क्या होगा, इसे लेकर वे चिंतित हैं।
जिला जालौन के ग्राम व पोस्ट कोटरा निवासी भूपेंद्र नायक के पुत्र थैलेसीमिया के रोगी हैं। हर माह उन्हें ब्लड की एक यूनिट की आवश्यकता होती है। लॉकडाउन के दरम्यान महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से उन्हें इमरजेंसी में एक यूनिट रक्त उपलब्ध करा दिया गया था। लेकिन, अब उनके सामने अंधकार छाया हुआ है। भूपेंद्र नायक ने बताया कि अब तक तो किसी तरह काम चल गया, परंतु आगे कैसे व्यवस्था होगी, इसे लेकर वे चिंतित हैं।
किसी के जीवन का स्रोत बन सकती है आपके रक्त की हर बूंद
सब हेड... अमर उजाला फाउंडेशन का रक्तदान शिविर 14 को, आओ जीवन बचाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी झांसी वासी शिविर में हिस्सा लेकर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर सकते हैं।
रक्त की हर बूंद बहुत कीमती होती है। रक्त बनाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ दान किया जा सकता है। ऐसे में एक यूनिट रक्तदान कर चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। अमर उजाला फाउंडेशन हर साल विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहा है। इस बार भी 14 जून को सुबह आठ बजे से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर लगेगा। इस शिविर में कोई भी व्यक्ति शामिल होकर रक्तदान कर सकता है। चूंकि, इस समय ब्लड बैंक भी लगभग खाली होने को हैं, ऐसे में रक्तदान करना बहुत जरूरी है। ताकि, रक्त की कमी से किसी की जान न जा पाए।
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जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंकों में हर समय रक्त की उपलब्धता रहती थी, परंतु लॉकडाउन की वजह से लोग घरों से बाहर नहीं निकले और न ही रक्तदान शिविर आयोजित हुए, जिससे दोनों ब्लड बैंकों के खजाने खाली हो गए हैं। दोनों स्थानों पर इमरजेंसी यूनिट ही ब्लड बचा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सिर्फ आठ और मेडिकल कॉलेज में महज दस यूनिट ब्लड ही मौजूद है। रक्त की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा थैलेसीमिया रोग से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ा। इन रोगियों में ज्यादातर बच्चे ही हैं। इन रोगियों के लिए एक-एक यूनिट रक्त की व्यवस्था करने के लिए परिजनों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। किसी ने अपने करीबियों से मिन्नतें कीं तो किसी ने खुद रक्त देकर अपने मरीज की जान बचाई। परिजनों को चिंता है कि यदि आने वाले दिनों में ब्लड बैंकों में रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित न हुई तो उनके सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
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छनियापुरा निवासी इरफान की नौ वर्षीय पुत्री थैलेसीमिया रोग से ग्र्रसित है। सैलून पर काम करने वाले इरफान की पुत्री को लॉकडाउन के दरम्यान तीन बार खून की आवश्यकता पड़ी। वैसे तो वे आवश्यकता पड़ने पर हर बार पुत्री को ग्वालियर ले जाते थे और वहां रक्त चढ़वा लाते थे। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से वे ग्वालियर नहीं जा सके और स्थानीय स्तर पर भी रक्त की व्यवस्था नहीं हो पाई। ऐसे में उन्होंने करीबियों से मिन्नतें की, तब जाकर खून की व्यवस्था हो पाई।
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सराय मुहल्ला निवासी शरीफ का साढ़े पांच साल का पुत्र थैलेसीमिया रोग से पीड़ित है, जिसे नियमित तौर पर रक्त की आवश्यकता होती है। उन्हें ब्लड बैंक से आसानी से खून मिल जाता था, परंतु इस बार उन्हें इसके लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ी। यहां वहां हाथ पैर मारने पर जब खून की व्यवस्था नहीं हो पाई, तो 27 मई को उन्होंने स्वयं एक यूनिट रक्तदान किया। शरीफ ने कहा कि वे इससे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। जब कहीं खून नहीं मिला तो उन्होंने खुद दे दिया। अब आगे क्या होगा, इसे लेकर वे चिंतित हैं।
जिला जालौन के ग्राम व पोस्ट कोटरा निवासी भूपेंद्र नायक के पुत्र थैलेसीमिया के रोगी हैं। हर माह उन्हें ब्लड की एक यूनिट की आवश्यकता होती है। लॉकडाउन के दरम्यान महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से उन्हें इमरजेंसी में एक यूनिट रक्त उपलब्ध करा दिया गया था। लेकिन, अब उनके सामने अंधकार छाया हुआ है। भूपेंद्र नायक ने बताया कि अब तक तो किसी तरह काम चल गया, परंतु आगे कैसे व्यवस्था होगी, इसे लेकर वे चिंतित हैं।
किसी के जीवन का स्रोत बन सकती है आपके रक्त की हर बूंद
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी झांसी वासी शिविर में हिस्सा लेकर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर सकते हैं।
रक्त की हर बूंद बहुत कीमती होती है। रक्त बनाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ दान किया जा सकता है। ऐसे में एक यूनिट रक्तदान कर चार लोगों की जान बचाई जा सकती है। अमर उजाला फाउंडेशन हर साल विश्व रक्तदान दिवस पर जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर का आयोजन करता रहा है। इस बार भी 14 जून को सुबह आठ बजे से जिला अस्पताल में रक्तदान शिविर लगेगा। इस शिविर में कोई भी व्यक्ति शामिल होकर रक्तदान कर सकता है। चूंकि, इस समय ब्लड बैंक भी लगभग खाली होने को हैं, ऐसे में रक्तदान करना बहुत जरूरी है। ताकि, रक्त की कमी से किसी की जान न जा पाए।