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इम्यूनिटी बनी वरदान, मलिन बस्तियों में बेदम हुआ कोरोना
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झांसी। रिहायशी इलाकों में कहर बनकर टूटा कोरोना मलिन बस्तियों में बेदम हो गया। तीन दिनाें तक चले अभियान के दौरान जनपद की 10 से अधिक मलिन बस्तियों में 1967 सैंपलों की जांच की गई, जिसमें महज 29 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। इसके पीछे का कारण मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की मजबूत इम्यूनिटी माना जा रहा है।
झांसी में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। शहर की तंग गलियों से होता हुआ कोरोना पॉश इलाकों तक पहुंचा। बड़ी-बड़ी रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को न सिर्फ कोरोना ने अपनी चपेट में लिया, बल्कि कई लोगों की जान भी निगल गया। मगर मलिन बस्तियों में कोरोना के पांव नहीं फैल पाए। जिले की 10 से अधिक मलिन बस्तियों में 19, 20 और 21 नवंबर को 1967 लोगों की कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल लिए गए। इनमें से 29 पॉजिटिव केस सामने आए हैं।
एंटीजन किट के जरिए 13 और आरटीपीसीआर मशीन से जांच में 16 संक्रमित मिले हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि महज डेढ़ फीसदी ही कोरोना के पॉजिटिव मरीज मिले हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पॉश इलाकों की अपेक्षा मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है। फिजीशियन डॉ. प्रिंस ने बताया इसी वजह से कोरोना वायरस का यहां रहने वाले लोगों पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। जबकि, एयर कंडीशन कमरों में रहने वाले लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इसी कारण कोरोना वायरस उन पर ज्यादा हमलावर हुआ।
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झांसी में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। शहर की तंग गलियों से होता हुआ कोरोना पॉश इलाकों तक पहुंचा। बड़ी-बड़ी रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को न सिर्फ कोरोना ने अपनी चपेट में लिया, बल्कि कई लोगों की जान भी निगल गया। मगर मलिन बस्तियों में कोरोना के पांव नहीं फैल पाए। जिले की 10 से अधिक मलिन बस्तियों में 19, 20 और 21 नवंबर को 1967 लोगों की कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल लिए गए। इनमें से 29 पॉजिटिव केस सामने आए हैं।
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एंटीजन किट के जरिए 13 और आरटीपीसीआर मशीन से जांच में 16 संक्रमित मिले हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि महज डेढ़ फीसदी ही कोरोना के पॉजिटिव मरीज मिले हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पॉश इलाकों की अपेक्षा मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है। फिजीशियन डॉ. प्रिंस ने बताया इसी वजह से कोरोना वायरस का यहां रहने वाले लोगों पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। जबकि, एयर कंडीशन कमरों में रहने वाले लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। इसी कारण कोरोना वायरस उन पर ज्यादा हमलावर हुआ।
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