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Jhansi News: मलेरिया विभाग के पास नहीं हैं कर्मचारी, 80 फीसदी पद हैं खाली

Thu, 25 Apr 2024 06:28 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2024 06:28 AM IST
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Malaria department does not have employees, 80 percent posts are vacant
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। बारिश के बाद का सीजन हो या गर्मी, मलेरिया का खतरा हर समय बना रहता है। हालांकि, इसकी रोकथाम के लिए अलग से मलेरिया विभाग बना हुआ है, लेकिन यह महकमा कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि दशकों से भर्ती न होने की वजह से विभाग में अस्सी फीसदी तक पद खाली हो गए हैं। फील्ड वर्करों से लेकर स्लाइड बनाने वाले कार्यकर्ताओं तक की कमी बनी हुई है।
मलेरिया मच्छरों से होने वाली एक खतरनाक बीमारी है, जो गंभीर हालातों में मौत का कारण तक बन सकती है। बारिश के सीजन के बाद और तापमान में बढ़ोतरी होने पर इसका खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। हर आयु वर्ग के लोग इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ सालों के दरम्यान मलेरिया के मरीजों की संख्या में कमी आई है, बावजूद खतरा अब भी बना हुआ है। इससे निपटने की मुख्य जिम्मेदारी मलेरिया विभाग पर है। लेकिन, विभाग में कर्मचारियों के लगभग अस्सी फीसदी पद खाली चल रहे हैं। जगह-जगह दवा का छिड़काव करने वाले फील्ड वर्कर के यहां 42 पद हैं, जबकि कार्यरत सिर्फ सात ही हैं। सुपीरियर फील्ड वर्कर भी 14 में से तीन ही तैनात हैं। स्लाइड बनाने वाले कार्यकर्ता 115 में से 24 ही हैं।
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यह हैं साल दर साल के आंकड़े
साल स्लाइड रोगी
2018 83607 267
2019 85398 152
2020 30897 38
2021 39703 17
2022 89924 10
2023 97106 5
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मलेरिया के लक्षण
मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और ठंड लगना शामिल है। इसके अलावा अत्यधिक थकान महसूस होती है और कभी-कभी बेहोशी भी आ जाती है। सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ जाता है और आंखों व त्वचा का रंग भी पीला पड़ने लगता है। इसके लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटे जाने के बाद 10-15 दिनों बार शुरू होते हैं।
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ऐसे करें बचाव
मच्छरों से बचाव के लिए पूरी आस्तीन की शर्ट, फुल पैंट और मोजे पहनें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आसपास कहीं जल जमाव न होने दें और नियमित रूप से दवा का छिड़काव करते रहें। संदेह होने पर तत्काल मलेरिया की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर दवा खाएं।

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विभाग में कर्मचारियों की कमी तो है, बावजूद मलेरिया के रोकथाम के उपाय लगातार जारी हैं। इसी का नतीजा है कि मलेरिया के मरीजों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इसके अलावा जुलाई से नवंबर माह तक के लिए डेली बेसिस पर 20 कर्मचारियों को रख लिया जाता है। इस बार भी यह कर्मचारी रखे जाएंगे। इन कर्मचारियों से दवा का छिड़काव कराया जाता है। - डा. आरके गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी
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