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‘माजूम, धतूरो फांके, कोऊ छकाय दई भंग में...’

Mon, 27 Feb 2017 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 27 Feb 2017 12:05 AM IST
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 'Majum, Dturo Fanke, Kou Di Ckay dissolved ... "
holi, jhnansi news - फोटो : demo
‘माजूम, धतूरो फांके, कोऊ छकाय दई भंग में...’ 
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सब हेड: पांच से लग जाएंगे होलाष्टक, जगह-जगह गाई जाएंगी फागें
क्रासर
12 को जलेगी होली, तब तक नहीं हो सकेंगे शुभ कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
‘भींगी फिरे राधिका रंग में, मनमोहन के संग में...’ ‘माजूम, धतूरो फांके, कोऊ छकाय दई भंग में...’ ऐसे तमाम बुंदेली बोल सुरों की चाशनी में डूबकर आपके कानों को पांच मार्च से आनंद देने लगेंगे। 12 मार्च को होलिका दहन होगा, इसके लिए 05 को गाड़ा लगता है और होलाष्टक शुरू हो जाते हैं। होलाष्टक लगते ही जहां शुभ कार्यों का आयोजन नहीं होता है, वहीं मंदिरों, चौपालों और विभिन्न स्थानों पर फाग गीत शुरू हो जाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका पर्व एक सोम यज्ञ के सामान है। होलाष्टक पर होलिका दहन के लिए एरंड वृक्ष की टहनी का दांडा गाड़ा जाता है और इसके साथ ही होली के मस्ती व फाग गायन की शुरूआत हो जाती है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक होलिका दहन 12 मार्च को शाम 6 बजकर तीन मिनट से शुभ होगा।
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उल्लेखनीय है कि महानगर के बड़ा बाजार, घास मंडी, सदर बाजार, रानी महल, सुभाष गंज, नंदनपुरा, सीपरी, आवास विकास, गोला कुआं, नगरा, प्रेमनगर, दतिया गेट, बड़ा गांव गेट सहित विभिन्न क्षेत्रों में होलिका दहन उत्साह से किया जाता है।
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होलिका को था अग्नि से बचने का वरदान 
धार्मिक मान्यता के अनुसार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि उस पर अग्नि का कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। हिरण्यकश्यप जो भगवान विष्णु क ा विरोधी था, ने अपने विष्णु भक्त पुत्र प्रहलाद को मारने की योजना बनाई। इसी के चलते प्रहलाद को गोद में लेकर होलिका अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से होलिका आग में भस्म हो गई और प्रहलाद बच गया।

एरंड का वृक्ष है प्रहलाद का प्रतीक
होलिका दहन में गाडे़ जाने वाला एरंड का वृक्ष प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है, जिसे अग्नि जलते दौरान निकाला जाता है, जो प्रतीक है कि प्रहलाद अग्नि से बच गए। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार इसका प्रमाण भविष्य पुराण में है। सुभाष गंज में आज भी एरंड के वृक्ष को होलिका दहन दौरान निकाला जाता है। उनके अनुसार होलिका दहन दिन आम का फूल खाने से आयु की वृद्धि होती है।


घर पर तैयार करे ऐसे हर्बल रंग 
केमिकल युक्त रंग से त्वचा खराब होती है, इससे बचने के लिए फूल पत्तियों और घरेलू वस्तुओं से हर्बल रंग तैयार किया जा सकता है। लाल रंग के लिए दो चम्मच लाल चंदन के पाउडर को पांच लीटर पानी मेें उबालकर तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा लाल अनार के छिलकों को पानी में उबाल कर लाल रंग बनाया जा सकता है। नारंगी रंग के लिए टेसू व पलाश के फूलों क ो पानी में उबाले और रात में भिगोकर छोड़ दे, इससे नारंगी रंग बनेगा। जामुनी रंग के लिए एक किलो चुकंदर कद्दूकस कर उसे एक लीटर पानी में डालकर सुबह छान लें, बढ़िया जामुनी रंग तैयार होगा। हरा रंग के लिए गुलमोहर के पत्तों को सुखा कर उसे पीस कर नेचुरल हरा रंग तैयार कर सकते है।
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