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राष्ट्रपिता को झांसी से था बेहद लगाव

Fri, 02 Oct 2020 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:21 AM IST
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Mahatma gandhi more conection to jhansi
1930 में नमक सत्याग्रह अंदोलन की याद दिलाती प्रतिमा।
झांसी। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की नगरी झांसी में अहिंसा के दूत महात्मा गांधी से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी हैं। उन्हें झांसी से बेहद लगाव था। यही वजह है कि वह झांसी तीन बार आए। जनसभाएं कीं और विदेशी वस्त्रों की होली भी जलवाई। राष्ट्रपिता के आह्वान पर तब आजादी के आंदोलन में झांसी के हजारों युवा स्वतंत्रता संग्राम आंदोलनों में कूद पडे़ थे।
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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर दीपशिखा महारानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, पंडित परमानंद सहित कई क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रही झांसी में महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलनों को भी बड़ा समर्थन मिला। साहित्यकार जानकी शरण वर्मा की पुस्तक कालजयी महामानव गांधी में उल्लेख है कि वह 30 नवंबर 1920 को पहली बार गांधी झांसी आए। उनके साथ शौकत अली भी थे। महात्मा गांधी के स्वागत में समूचे झांसी नगर को आकर्षक रूप से सजाया गया था। महात्मा गांधी ने हार्डीगंज, मिनर्वा चौराहा पर जनसभाएं कीं। लोगों को आजादी के आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में जहां वह ठहरे थे, उनके साथ उनके पुत्र देवदास गांधी थे। इसके बाद वह 1921, फिर 1929 को झांसी आए। महानगर के सबसे पुराने शैक्षिक संस्थान सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज जहां महात्मा गांधी ठहरे थे। यहां स्मृतियों को सहजते हुए 70 के दशक में कॉलेज के तत्कालीन छात्रसंघ एवं शिक्षकों ने राष्ट्रपिता की प्रतिमा स्थापित कराई थी, जो आज भी आकर्षण का केंद्र है।
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