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Jhansi News: पूर्व महाप्रबंधक के खिलाफ लोकायुक्त पहुंचा मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जल संस्थान के पूर्व महाप्रबंधक राधेश्याम यादव की मुसीबत कम नहीं हो रही। उनके खिलाफ जल संस्थान के ही पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों ने भी मोर्चा खोल रखा है। सेवानिवृत्त ऑडिटर मोहम्मद शफीक ने पूर्व जीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री समेत लोकायुक्त से भी शिकायत की है। उन्होंने यह शिकायत बकायदा हलफनामे के साथ दर्ज कराई है।
मिशन कंपाउंड निवासी मो. शफीक ने अपने शपथ पत्र के जरिए बताया कि पूर्व महाप्रबंधक आरएस यादव यहां एक दिसंबर 2023 से 31 मार्च 2025 तक तैनात रहे। 16 माह के कार्यकाल के दौरान अनुरक्षण कार्य के नाम पर फर्जी भुगतान किए गए। कई काम सिर्फ कागजों पर ही कराए गए। इन कार्यों के सत्यापन भी नहीं कराया गया। वर्ष 2024-25 में बजट में स्वीकृत पैसे का डायवर्जन करते हुए दूसरे जगहों में खर्च कर दिया गया।
पूरे पैसों को सिर्फ लीकेज एवं मोटर पंप मरम्मत के नाम पर खर्च कर दिया गया। विभाग में दोहरी लेखा प्रणाली के बावजूद वित्त एवं लेखा अनुभाग से किसी कार्य में संस्तुति नहीं ली गई। पूर्व जीएम ने विभिन्न निधियों एवं डिपॉजिट की धनराशि को भी मरम्मत कार्य में खर्च कर दिया। उधर, मुख्यमंत्री कार्यालय तक इन शिकायतों के पहुंचने से जल संस्थान में खलबली मची हुई है।
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झांसी। जल संस्थान के पूर्व महाप्रबंधक राधेश्याम यादव की मुसीबत कम नहीं हो रही। उनके खिलाफ जल संस्थान के ही पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों ने भी मोर्चा खोल रखा है। सेवानिवृत्त ऑडिटर मोहम्मद शफीक ने पूर्व जीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री समेत लोकायुक्त से भी शिकायत की है। उन्होंने यह शिकायत बकायदा हलफनामे के साथ दर्ज कराई है।
मिशन कंपाउंड निवासी मो. शफीक ने अपने शपथ पत्र के जरिए बताया कि पूर्व महाप्रबंधक आरएस यादव यहां एक दिसंबर 2023 से 31 मार्च 2025 तक तैनात रहे। 16 माह के कार्यकाल के दौरान अनुरक्षण कार्य के नाम पर फर्जी भुगतान किए गए। कई काम सिर्फ कागजों पर ही कराए गए। इन कार्यों के सत्यापन भी नहीं कराया गया। वर्ष 2024-25 में बजट में स्वीकृत पैसे का डायवर्जन करते हुए दूसरे जगहों में खर्च कर दिया गया।
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पूरे पैसों को सिर्फ लीकेज एवं मोटर पंप मरम्मत के नाम पर खर्च कर दिया गया। विभाग में दोहरी लेखा प्रणाली के बावजूद वित्त एवं लेखा अनुभाग से किसी कार्य में संस्तुति नहीं ली गई। पूर्व जीएम ने विभिन्न निधियों एवं डिपॉजिट की धनराशि को भी मरम्मत कार्य में खर्च कर दिया। उधर, मुख्यमंत्री कार्यालय तक इन शिकायतों के पहुंचने से जल संस्थान में खलबली मची हुई है।
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