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सत्ता संग्राम 2019: भगवा किले में सेंध की कोशिश मुद्दे दरकिनार, जातीय राजनीति हावी
Sun, 28 Apr 2019 04:20 AM IST
देव कश्यप
नीरज दीक्षित, अमर उजाला, उरई
नीरज दीक्षित, अमर उजाला, उरई
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 28 Apr 2019 04:20 AM IST
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अजय कुमार पंकज (गठबंधन), भानु प्रताप वर्मा (भाजपा) और बृजलाल खाबरी (कांग्रेस)
- फोटो : अमर उजाला
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आजादी के बाद 35 साल तक कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली जालौन-भोगनीपुर-गरौंठा संसदीय सीट आज भाजपा का मजबूत किला बन चुकी है। इस किले को खड़ा करने वाले चार बार के सांसद भानु प्रताप वर्मा इस बार भी मैदान में हैं। उनकी छवि साफ-सुथरी मानी जाती है, पर उन पर काम न करने का ठप्पा भी लगा है। वे पीएम मोदी की लोकप्रियता के भरोसे हैं।
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वहीं, विपक्ष की सारी कवायद और जद्दोजहद भाजपा के इस किले को ढहाने की है। फिलहाल तीनों ही दावेदार मुद्दों को दरकिनार कर जातिगत आंकड़ों से जीत के समीकरण बैठाने में जुटे हैं। भाजपा को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने बसपा के दिग्गज नेता और दो बार के सांसद रहे बृजलाल खाबरी को उतारा है, जिन्हें भरोसा है कि कांग्रेस के साथ-साथ उन्हें उनके बसपा कैडर का भी कुछ लाभ जरूर मिलेगा।
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गठबंधन की बात करें तो मोदी लहर में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की बात छोड़ दी जाए तो तीनों विधानसभा सीटों पर लंबे अर्से तक सपा-बसपा का ही दबदबा रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव में दोनों दल एक साथ हैं। बसपा प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक अजय कुमार पंकज की उम्मीद पार्टी के परंपरागत वोट के साथ सपा के वोट बैंक से है। मायावती व अखिलेश यादव की संयुक्त रैली से उन्हें लाभ की उम्मीद है।
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