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चचेरे भाई की हत्या में आजीवन कारावास
jhansi
Updated Sun, 21 May 2017 01:39 AM IST
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अदालत
- फोटो : amarujala
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झांसी। सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने चचेरे भाई की हत्या में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पंद्रह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
चिरगांव निवासी जगदीश सिंह ने थाने में दर्ज कराई एफआईआर में बताया था कि उसकी मां रज्जू राजा की आठ अगस्त 2014 को तेरहवीं थी, जिसमें गांव का गंधर्व सिंह भी शामिल हुआ था। चचेरे भाई वीरेंद्र का गंधर्व सिंह से पहले से विवाद था। उसे तेरहवीं में आया देख वीरेंद्र नाराज हो गया। इसे लेकर चचेरे भाई की उसके सगे भाई पुन्यपाल और शैलेंद्र से कहासुनी भी हुई और वीरेंद्र वहां से चला गया। कुछ समय बाद उसका भाई पुन्यपाल गांव के बालकिशन ढीमर के साथ चबूतरे पर बैठा हुआ था। इसी दौरान लाइसेंसी बंदूक लेकर वीरेंद्र वहां आ पहुंचा और उसने फायरिंग कर दी। दोनो घायलों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। यहां पुन्यपाल की 11 अगस्त को मौत हो गई।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त वीरेंद्र को हत्या में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये तथा जानलेवा हमले में सात साल और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता मनीष सिंह यादव ने की।
चिरगांव निवासी जगदीश सिंह ने थाने में दर्ज कराई एफआईआर में बताया था कि उसकी मां रज्जू राजा की आठ अगस्त 2014 को तेरहवीं थी, जिसमें गांव का गंधर्व सिंह भी शामिल हुआ था। चचेरे भाई वीरेंद्र का गंधर्व सिंह से पहले से विवाद था। उसे तेरहवीं में आया देख वीरेंद्र नाराज हो गया। इसे लेकर चचेरे भाई की उसके सगे भाई पुन्यपाल और शैलेंद्र से कहासुनी भी हुई और वीरेंद्र वहां से चला गया। कुछ समय बाद उसका भाई पुन्यपाल गांव के बालकिशन ढीमर के साथ चबूतरे पर बैठा हुआ था। इसी दौरान लाइसेंसी बंदूक लेकर वीरेंद्र वहां आ पहुंचा और उसने फायरिंग कर दी। दोनो घायलों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया। यहां पुन्यपाल की 11 अगस्त को मौत हो गई।
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अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त वीरेंद्र को हत्या में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये तथा जानलेवा हमले में सात साल और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता मनीष सिंह यादव ने की।
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