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Jhansi News: बरसाने सी ठिठोली...डगरवाहा में भी 11 सौ सालों से खेल रहे लट्ठमार होली

Sun, 05 Mar 2023 10:59 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Mar 2023 10:59 PM IST
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Lathmar Holi playing in Dagarwaha for 1100 years
झांसी। बरसाने की तर्ज पर झांसी के एक गांव में भी लट्ठमार होली खेले जाने की परंपरा है। रक्सा के ग्राम डगरवाहा में होली की दूज पर लट्ठमार होली खेली जाती है।
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ग्यारह सौ साल पहले मथुरा से आकर गांव में बसने वाले एक परिवार ने इस परंपरा की नींव रखी थी, जिसका ग्रामीण अब भी निर्वहन करते हैं। इस बार भी गांव में लट्ठमार होली की तैयारियां तेजी से जारी हैं। होली की दूज पर दोपहर बाद गांव के बीचोंबीच बने खाती बाबा मंदिर के सामने मैदान पर लोगों का जुटना शुरू हो जाता है। बच्चे-बड़े सभी यहां इकट्ठा हो जाते हैं।
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घूंघट लिए महिलाओं के हाथों में लंबे-लंबे बांस के लट्ठ होते हैं। जबकि पुरुष छोटे-छोटे डंडे लिए रहते हैं। इसके बाद शुरू होता है होली का हुड़दंग। महिलाएं पुरुषों पर जमकर लट्ठ बरसाती हैं और पुरुष अपने हाथ में लिए हुए डंडों से अपना बचाव करते हैं। इस दौरान आसपास जमा लोग रंगों की बौछार करते रहते हैं। यह क्रम तीन-चार घंटे तक चलता रहता है। यहां होने वाली लट्ठमार होली को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
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इस बार भी गांव में लट्ठमार होली खेलने की तैयारियां तेजी से चल रहीं हैं। महिलाओं के लिए बांस के लंबे-लंबे लट्ठ इकट्ठा किए जाने लगे हैं। मंदिर के सामने के मैदान की सफाई होने लगी है। लट्ठमार होली को लेकर सभी उत्साहित हैं।
राजा के देहांत के बाद दूज पर होने लगी होली
झांसी। डगरवाहा गांव में पहले पड़वा पर लट्ठमार होली खेली जाती थी, लेकिन झांसी के राजा गंगाधर राव का होली की पड़वा पर निधन हो गया था। इसके बाद से गांव में दूज पर लट्ठमार होली खेली जाने लगी। खास बात यह है कि महिलाएं पुरुषों पर जमकर लट्ठ बरसाती हैं, लेकिन अब तक किसी को चोट नहीं लगी है। इसके अलावा होली को लेकर यहां कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
गांव में लट्ठमार होली की परंपरा ग्यारह सौ साल पुरानी है। मथुरा से आए एक परिवार ने इसकी शुरूआत की थी। तब से अनवरत रूप से गांव में सभी मिलजुलकर लट्ठमार होली खेलते हैं। - पं. ब्रह्मानंद पांडेय
पिछले तीस सालों से मैं लगातार इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही हूं। जबकि, इससे पहले परिवार की अन्य महिलाएं लट्ठमार होली खेलती थीं। आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा को बचाए रखेगी। - गिरिजा यादव
सालों से गांव में लट्ठमार होली खेली जा रही है, लेकिन अब तक कभी विवाद नहीं हुआ। सभी हंसी-खुशी त्योहार का आनंद लेते हैं। गांव की होली को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। - दयावती

गांव की लट्ठमार होली बुंदेलखंड की प्राचीन परंपराओं में से एक है। हालांकि, इसका कभी प्रचार-प्रसार नहीं हुआ। गांव के लोग विरासत में मिली लट्ठमार होली की परंपरा को सहेजे हुए हैं। - रहीस यादव, ग्राम प्रधान
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