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महिला डॉक्टर ने जहर खाकर आत्म हत्या की
ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:48 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर ने गुरुवार की दोपहर नसबंदी सेंटर के सामने जहर खाकर आत्म हत्या कर ली। महिला डॉक्टर इससे पूर्व भी आत्म हत्या का प्रयास कर चुकी थीं।
मेडिकल कॉलेज के सरकारी आवास में डा. विमलेश वर्मा पत्नी स्व. डा. अनिल वर्मा अपने पुत्र अभि (11) व नौ वर्षीय पुत्री के साथ रहती थीं। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में उनकी ड्यूटी थी। उन्होंने दोपहर करीब दो बजे तक मरीजों का उपचार किया।
इसके बाद बेटी को लेने स्कूल गईं, जहां से लौटकर आने के बाद बेटी के संग नसबंदी सेंटर के सामने बेंच पर आकर बैठ गईं। उन्होंने बैग से डायरी निकाली और लिखना शुरू किया।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डायरी को बैग में रखने के बाद उन्होंने बेटी को पुचकारा और कैंटीन से दो चाय मंगवाई। एक चाय बेटी को पीने दी और दूसरी चाय के साथ जहर खा लिया। कुछ देर बाद वह वहीं बेंच पर लेट गईं और सिर के पास बेटी को बैठा लिया। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो वहां से गुजरे एक तीमारदार ने डॉक्टरों को इस संबंध में जानकारी दी।
सूचना पर डॉक्टर व मेडिकल कॉलेज के कर्मी मौके पर पहुंचे। डॉ. विमलेश को इमरजेंसी लाया गया, जहां तमाम कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सूचना पर एसपी सिटी गरिमा सिंह, सीओ सिटी कल्याण सिंह फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेने के बाद पुलिस ने डायरी को खंगाला, जिसमें सुसाइड नोट बरामद हुआ।
‘मेरी बेटी ही मुझे आग दे, अगर में मर जाऊं’
डा. विमलेश ने दो पन्ने में सुसाइड नोट लिखा है। एक पर अंग्रेजी में और दूसरे पर हिंदी में लिखा है। अंग्रेजी में लिखे सुसाइड नोट में कहा गया है कि ‘कृपया मेरा पोस्टमार्टम नहीं कराया जाए, यह मेरी अंतिम इच्छा है। मैं अपने पुत्र अभि व बनी को प्यार करती हूं।
सारी, मैं आत्महत्या से नफरत करती हूं लेकिन आत्महत्या जरूरी है अभि के लिए। वह चाहता है कि मैं मर जाऊं। इसलिए यह सही है और मैं खुश हूं।’ वहीं, ‘दूसरे पेज पर हिंदी में लिखा है ‘मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी ही मुझे आग दे, अगर में मर जाऊं’।
आत्महत्या की मंशा से काटी थी नसें
करीब छह माह पूर्व डॉ. विमलेश वर्मा ने अपने घर के दरवाजे बंद कर हाथ की नसें काट ली थीं। कॉलेज प्राचार्य को फोन कर आत्महत्या करने की बात कही थी। इस पर प्राचार्य के अलावा तमाम चिकित्सक मौके पर पहुंचे थे। दरवाजा तोड़कर घुसे चिकित्सक उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे, तब उनको बचा लिया गया था।
उन्होंने विभाग के एक अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय लीपापोती करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी।
पति ने भी की थी आग लगाकर आत्महत्या
आईटीआई सीपरी बाजार निवासी डॉ. अनिल वर्मा मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने करीब छह वर्ष पूर्व अज्ञात तनाव के चलते मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, मगर बचाया नहीं जा सका था। पति की मौत के बाद से डॉ. विमलेश डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं।
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मेडिकल कॉलेज के सरकारी आवास में डा. विमलेश वर्मा पत्नी स्व. डा. अनिल वर्मा अपने पुत्र अभि (11) व नौ वर्षीय पुत्री के साथ रहती थीं। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में उनकी ड्यूटी थी। उन्होंने दोपहर करीब दो बजे तक मरीजों का उपचार किया।
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इसके बाद बेटी को लेने स्कूल गईं, जहां से लौटकर आने के बाद बेटी के संग नसबंदी सेंटर के सामने बेंच पर आकर बैठ गईं। उन्होंने बैग से डायरी निकाली और लिखना शुरू किया।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डायरी को बैग में रखने के बाद उन्होंने बेटी को पुचकारा और कैंटीन से दो चाय मंगवाई। एक चाय बेटी को पीने दी और दूसरी चाय के साथ जहर खा लिया। कुछ देर बाद वह वहीं बेंच पर लेट गईं और सिर के पास बेटी को बैठा लिया। जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो वहां से गुजरे एक तीमारदार ने डॉक्टरों को इस संबंध में जानकारी दी।
सूचना पर डॉक्टर व मेडिकल कॉलेज के कर्मी मौके पर पहुंचे। डॉ. विमलेश को इमरजेंसी लाया गया, जहां तमाम कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सूचना पर एसपी सिटी गरिमा सिंह, सीओ सिटी कल्याण सिंह फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेने के बाद पुलिस ने डायरी को खंगाला, जिसमें सुसाइड नोट बरामद हुआ।
‘मेरी बेटी ही मुझे आग दे, अगर में मर जाऊं’
डा. विमलेश ने दो पन्ने में सुसाइड नोट लिखा है। एक पर अंग्रेजी में और दूसरे पर हिंदी में लिखा है। अंग्रेजी में लिखे सुसाइड नोट में कहा गया है कि ‘कृपया मेरा पोस्टमार्टम नहीं कराया जाए, यह मेरी अंतिम इच्छा है। मैं अपने पुत्र अभि व बनी को प्यार करती हूं।
सारी, मैं आत्महत्या से नफरत करती हूं लेकिन आत्महत्या जरूरी है अभि के लिए। वह चाहता है कि मैं मर जाऊं। इसलिए यह सही है और मैं खुश हूं।’ वहीं, ‘दूसरे पेज पर हिंदी में लिखा है ‘मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी ही मुझे आग दे, अगर में मर जाऊं’।
आत्महत्या की मंशा से काटी थी नसें
करीब छह माह पूर्व डॉ. विमलेश वर्मा ने अपने घर के दरवाजे बंद कर हाथ की नसें काट ली थीं। कॉलेज प्राचार्य को फोन कर आत्महत्या करने की बात कही थी। इस पर प्राचार्य के अलावा तमाम चिकित्सक मौके पर पहुंचे थे। दरवाजा तोड़कर घुसे चिकित्सक उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे, तब उनको बचा लिया गया था।
उन्होंने विभाग के एक अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय लीपापोती करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली थी।
पति ने भी की थी आग लगाकर आत्महत्या
आईटीआई सीपरी बाजार निवासी डॉ. अनिल वर्मा मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने करीब छह वर्ष पूर्व अज्ञात तनाव के चलते मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, मगर बचाया नहीं जा सका था। पति की मौत के बाद से डॉ. विमलेश डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं।