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खून न मिलने से मुश्किल में जननी, एक सप्ताह में बल्ड बैंक से 70 हुईं मायूस

Thu, 04 Jun 2020 11:57 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2020 11:57 PM IST
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lack of blood in blood bank
lack of blood in blood bank
झांसी। सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंकों में चल रही रक्त की कमी गर्भवती महिलाओं पर भारी पड़ रही है। क्षेत्र की महिलाओं में हीमोग्लोबिन की काफी कमी है। गर्भावस्था में यह एक बड़ी समस्या बनती है। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम होने पर प्रसव से पहले खून चढ़ाना पढ़ता है। पिछले एक सप्ताह में दोनों ब्लड बैंकों से 70 से अधिक जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं के परिजनों को लौटाया जा चुका है।
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जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंकों में हर समय अलग-अलग ग्रुपों का 50 से 60 यूनिट ब्लड रहता था। पिछले दो महीने से लॉकडाउन होने से रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहे हैं। इस कारण ब्लड बैंकों में रक्त का टोटा हो गया है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंकों में इमरजेंसी के लिए ही रक्त बचा हुआ है। यह भी कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा। रक्त की पर्याप्त उपलब्धता न होने से मरीजों के इलाज में समस्या आ रही है। जब उनके परिजन रक्त लेने के लिए सरकारी ब्लड बैंकों में जा रहे हैं तो उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। बताया गया कि ब्लड बैंकों में प्रतिदिन 15-20 मरीज रक्त के लिए आते हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं की भी अच्छी संख्या रहती है।
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70 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी बड़ी समस्या
झांसी में 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होती है। हालात ये हैं कि मेडिकल कॉलेज में दो से तीन हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाएं भर्ती होती हैं। ऐसे में पहले तो रक्त चढ़ाकर इनका हीमोग्लोबिन बढ़ाना पड़ता है। इसके बाद उनका प्रसव कराया जाता है। इनमें से कई गर्भवती महिलाओं के पास कोई रक्तदान करने वाला तक नहीं होता है। वहीं, अब तक ब्लड बैंकों में भी रक्त का टोटा है। ऐसे में यदि कोई कम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती भर्ती होती है और डोनर भी नहीं मिलता है तो इलाज करना मुश्किल हो सकता है।
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ये मायूस होकर लौटे
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केस-1
गरौठा के राजकुमार की गर्भवती पत्नी एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। उनका हीमोग्लोबिन 6.8 था। डॉक्टर ने प्रसव से पहले ब्लड चढ़ाने को कहा। जब वह सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंकों में गए तो कहीं से भी रक्त नहीं मिला। इसके बाद वह मायूस होकर लौट आए। फिर बड़ी मुश्किल से परिवार और गांव के कुछ लोग रक्त देने को तैयार हुए। लॉकडाउन में परिवहन सेवाएं भी बंद थीं तो खुद के किराए के वाहन से उन्हें बुलाया। तब जाकर रक्त मिल सका।

केस-2
बबीना के राजू वर्मा की गर्भवती पत्नी को खून की कमी की समस्या होने पर अस्पताल में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू होने के बाद परिजनों से ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। जब सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंक में परिजन पहुंचे तो उनसे ब्लड न होने की बात कही गई। इसके बाद एक परिजन ने ब्लड देकर एक यूनिट रक्त ले लिया।
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