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बुंदेलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार सकता लाल राजमा
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में संचालित कृषि विज्ञान संस्थान के करगुवांजी स्थित जैविक कृषि फॉर्म में कृषि परास्नातक के छात्र-छात्राओं ने लाल राजमा की नई प्रजाति का उत्पादन किया गया है। संस्थान के शिक्षकों का कहना है कि इसका उत्पादन बुंदेलखंड के किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
बीयू के जैविक कृषि प्रक्षेत्र प्रभारी डॉ. संतोष पांडेय ने बताया कि राजमा की नई प्रजाति को बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाकर किसानों की आर्थिक दशा में सुधार लाया जा सकता है। कृषि विज्ञान संस्थान के सीड टेक्नोलॉजी के छात्र रजत अवस्थी ने कानपुर के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित आईपीआर 98-5 के बीज का उपयोग किया है। यह प्रजाति 125 दिन और कम पानी में भी प्रति हेक्टेयर 16 से 18 क्विंटल का उत्पादन देती है।
इसके अलावा आईआईपीआर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित लाल राजमा की यह प्रजाति बहुत से रोगों के प्रति अवरोधी है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अन्य प्रजातियों की अपेक्षा अधिक है। उन्होंने बताया कि राजमा की यह किस्म जैविक उर्वरकों के साथ ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम है। अभी राजमा की इस प्रजाति पर शोधकार्य चल रहा है। यदि लाल राजमा की इस प्रजाति की बुंदेलखंड में बुवाई की जाए तो यह किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है।
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बीयू के जैविक कृषि प्रक्षेत्र प्रभारी डॉ. संतोष पांडेय ने बताया कि राजमा की नई प्रजाति को बुंदेलखंड क्षेत्र में उगाकर किसानों की आर्थिक दशा में सुधार लाया जा सकता है। कृषि विज्ञान संस्थान के सीड टेक्नोलॉजी के छात्र रजत अवस्थी ने कानपुर के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित आईपीआर 98-5 के बीज का उपयोग किया है। यह प्रजाति 125 दिन और कम पानी में भी प्रति हेक्टेयर 16 से 18 क्विंटल का उत्पादन देती है।
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इसके अलावा आईआईपीआर के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित लाल राजमा की यह प्रजाति बहुत से रोगों के प्रति अवरोधी है। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अन्य प्रजातियों की अपेक्षा अधिक है। उन्होंने बताया कि राजमा की यह किस्म जैविक उर्वरकों के साथ ज्यादा उत्पादन देने में सक्षम है। अभी राजमा की इस प्रजाति पर शोधकार्य चल रहा है। यदि लाल राजमा की इस प्रजाति की बुंदेलखंड में बुवाई की जाए तो यह किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है।
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