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पैरामेडिकल कॉलेज में कोविड समर्पित एल-1 और एल-2 इकाई बनी
Tue, 31 Mar 2020 01:27 AM IST
झांसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2020 01:27 AM IST
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आइसोलेशन वार्ड तस्वीर
- फोटो : pti
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देश में कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए पैरा मेडिकल कॉलेज में बनाए गए क्वारंटाइन वार्ड में ड्यूटी करने वाली 35 सदस्यीय टीम को संक्रमण नियंत्रण और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि कोरोना वायरस के मरीज के इलाज के लिए एल-1 और एल-2 इकाई बन गई है।
क्वारंटाइन चिकित्सा इकाई के प्रभारी डॉ. राकेश बाबू गौतम ने प्रशिक्षण में बताया कि जो लोग संदिग्ध की श्रेणी में हैं, उन्हें 14 दिन के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किया जाना है। इस दौरान उनका दो बार सैंपल जांच के लिए लिया जाएगा।
यदि दोनों बार जांच नकारात्मक आती है तो घर भेजा जाएगा। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विजयश्री शुक्ला ने बताया इस बीमारी से कोई संक्रमित भी हो रहा है तो उसमें 80 प्रतिशत लोग ठीक हो रहे हैं। 17 प्रतिशत ऐसे हैं, जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है।
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मृत्यु दर मात्र 3 प्रतिशत है। जिला अस्पताल में कोविड समर्पित एल-1 चिकित्सा इकाई बनाई जा चुकी है। यदि उसे आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती है तो उसका इलाज एल-1 इकाई में ही किया जाएगा। यदि आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है तो मेडिकल कॉलेज में बनी एल-2 इकाई में भेजा जाएगा।
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क्वारंटाइन चिकित्सा इकाई के प्रभारी डॉ. राकेश बाबू गौतम ने प्रशिक्षण में बताया कि जो लोग संदिग्ध की श्रेणी में हैं, उन्हें 14 दिन के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटाइन किया जाना है। इस दौरान उनका दो बार सैंपल जांच के लिए लिया जाएगा।
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यदि दोनों बार जांच नकारात्मक आती है तो घर भेजा जाएगा। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विजयश्री शुक्ला ने बताया इस बीमारी से कोई संक्रमित भी हो रहा है तो उसमें 80 प्रतिशत लोग ठीक हो रहे हैं। 17 प्रतिशत ऐसे हैं, जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है।
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मृत्यु दर मात्र 3 प्रतिशत है। जिला अस्पताल में कोविड समर्पित एल-1 चिकित्सा इकाई बनाई जा चुकी है। यदि उसे आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती है तो उसका इलाज एल-1 इकाई में ही किया जाएगा। यदि आईसीयू या वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है तो मेडिकल कॉलेज में बनी एल-2 इकाई में भेजा जाएगा।