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केन-बेतवा लिंक परियोजना से साढ़े नौ लाख बुंदेली किसानों को फायदा
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झांसी। बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक सिंचाई परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा बजट में 1400 करोड़ रुपये का प्रावधान होने से झांसी, ललितपुर, जालौन एवं बांदा के करीब साढ़े नौ लाख बुंदेली किसानों को फायदा पहुंचेगा। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और बुंदेलखंड के लिए पीने का पानी भी पर्याप्त होगा।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2002 में इस परियोजना की परिकल्पना तैयार हुई। इसके जरिए बुंदेलखंड की दो बड़ी नदी केन एवं बेतवा को आपस में जोड़कर बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोकना था। काफी समय तक यह परियोजना पानी बंटवारे के विवाद के चलते उलझी रही।
करीब 19 वर्ष बाद पिछले वर्ष 2021 में उप्र एवं मप्र पानी बंटवारे पर सहमत हुए। उसके बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हुई। कई सारी औपचारिकताओं के बाद आखिरकार दिसंबर में केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूर कर दिया। चुनाव आचार संहिता से पहले परियोजना के शिलान्यास की तैयारी थी, लेकिन गजट नोटिफिकेशन जारी न होने से यह काम नहीं हो सका।
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इस परियोजना की शुरूआती लागत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन, लेटलतीफी के चलते इसकी लागत बढ़कर करीब 44 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। परियोजना की लागत की नब्बे फीसदी धनराशि केंद्र सरकार खर्च करेगी जबकि शेष धनराशि दोनों प्रदेश आपस में मिलकर खर्च करेंगे।
पिछले वर्ष मिला था 104 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार से पहले उत्तर प्रदेश सरकार राज्यांश के तौर पर पिछले वर्ष ही 104 करोड़ का प्रावधान कर चुकी। गौरतलब है कि दोनों राज्य सरकारों को मिलकर कुल लागत का दस फीसदी रकम खर्च करनी है। पिछले वर्ष 2021 फरवरी में उप्र सरकार ने बजट के दौरान इस रकम का आवंटन किया था।
सिंचाई को मिलने वाला पानी
झांसी 17488 हेक्टेयर
ललितपुर 3533 हेक्टेयर
महोबा 37564 हेक्टेयर
बांदा 192479 हेक्टेयर
मिलने वाला पेयजल (मिलियन क्यूबिक मीटर में)
झांसी 14.66
ललितपुर 31.98
महोबा 20.13
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तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2002 में इस परियोजना की परिकल्पना तैयार हुई। इसके जरिए बुंदेलखंड की दो बड़ी नदी केन एवं बेतवा को आपस में जोड़कर बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोकना था। काफी समय तक यह परियोजना पानी बंटवारे के विवाद के चलते उलझी रही।
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करीब 19 वर्ष बाद पिछले वर्ष 2021 में उप्र एवं मप्र पानी बंटवारे पर सहमत हुए। उसके बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हुई। कई सारी औपचारिकताओं के बाद आखिरकार दिसंबर में केंद्रीय कैबिनेट ने इसे मंजूर कर दिया। चुनाव आचार संहिता से पहले परियोजना के शिलान्यास की तैयारी थी, लेकिन गजट नोटिफिकेशन जारी न होने से यह काम नहीं हो सका।
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इस परियोजना की शुरूआती लागत करीब 9 करोड़ रुपये आंकी गई थी लेकिन, लेटलतीफी के चलते इसकी लागत बढ़कर करीब 44 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। परियोजना की लागत की नब्बे फीसदी धनराशि केंद्र सरकार खर्च करेगी जबकि शेष धनराशि दोनों प्रदेश आपस में मिलकर खर्च करेंगे।
पिछले वर्ष मिला था 104 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार से पहले उत्तर प्रदेश सरकार राज्यांश के तौर पर पिछले वर्ष ही 104 करोड़ का प्रावधान कर चुकी। गौरतलब है कि दोनों राज्य सरकारों को मिलकर कुल लागत का दस फीसदी रकम खर्च करनी है। पिछले वर्ष 2021 फरवरी में उप्र सरकार ने बजट के दौरान इस रकम का आवंटन किया था।
सिंचाई को मिलने वाला पानी
झांसी 17488 हेक्टेयर
ललितपुर 3533 हेक्टेयर
महोबा 37564 हेक्टेयर
बांदा 192479 हेक्टेयर
मिलने वाला पेयजल (मिलियन क्यूबिक मीटर में)
झांसी 14.66
ललितपुर 31.98
महोबा 20.13