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बीस साल पहले शहर में शामिल हुए लेकिन बिजली आज भी ग्रामीण फीडर से

Fri, 03 Dec 2021 01:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 01:51 AM IST
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Joined the city twenty years ago but electricity is still from rural feeder
झांसी। नगर निगम सीमा में मुरारीनगर, राजेंद्र नगर, खोड़न, लहरगिर्द, पहूंज नदी के आसपास का इलाका करीब बीस साल पहले शामिल हो चुका लेकिन, अभी भी यहां के अधिकांश हिस्सों का हाल गांव सरीखा है। इस इलाके में बिजली के खंभे तक नहीं हैं। अपने घरों तक केबिल पहुंचाने के लिए लोगों को बल्लियों का सहारा लेना पड़ रहा। शहरी सीमा के बावजूद ग्रामीण फीडर से यहां बिजली दी जा रही है। नगर निगम ने भी इन इलाकों में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई।
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वर्ष 2002 में यह इलाके निगम सीमा में शामिल हुए। यहां करीब 40-45 हजार आबादी निवास करती है। निगम सीमा में शामिल होने के बाद यहां जमीन के रेट आसमान में पहुंच गए। धड़ाधड़ व्यावसायिक कांपलेक्स के साथ कई ग्रुप हाउसिंग बन गई। लोगों की बसावट में इजाफा हुआ लेकिन, सरकारी सहूलियतें नहीं बढ़ीं। बीस साल पहले भी बच्चों को कक्षा आठ के बाद पढ़ाई के लिए करीब छह किलोमीटर दूर सीपरी तक जाना पड़ता था। आज भी यही हालत है। इसी तरह बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी इन इलाकोें तक नहीं पहुंच सकी हैं। राजेंद्र नगर, कन्हैया शिव नगर, मुरारी नगर समेत दर्जनों मोहल्लों में भीतरी हिस्से में बिजली के खंभे ही नहीं हैं। बिजली विभाग से शिकायत करते-करते लोग थक गए लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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विद्युत आपूर्ति रक्सा स्थित ग्रामीण फीडर से होती है। इस वजह से बिजली कटौती का कोई समय नहीं है। इस मनमानेपन से लोगों में बेहद आक्रोश है। कई बार शिकायत की गई लेकिन, व्यवस्था नहीं सुधरी। पीने के पानी की पाइप लाइन भी किसी मोहल्ले तक नहीं पहुंची। लोग सिर्फ हैंडपंप के सहारे हैं। गर्मियों में यह भी मददगार नहीं रह जाते।
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पूरे शहर में सीधा घरों से कूड़ा उठाया जा रहा है लेकिन, इन इलाकों तक यह व्यवस्था नहीं पहुंची। यहां प्राइवेट सफाई कर्मियों से ही कूड़ा उठवाया जा रहा है। सफाई के लिए नगर निगम से कोई कर्मचारी नहीं आता।
पूरे इलाके में अस्पताल के नाम पर सिर्फ एक सीएचसी सेंटर है। इलाज कराने के लिए लोगों को करीब पांच किमी दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इस पूरे इलाके में कोई भी महिला अस्पताल नहीं है।
- बिजली की समस्या से हम सभी लोग परेशान हैं। बिजली समय पर नहीं आती। बिजली के खंभे तक नहीं लगवाए गए। दर्जनों बार शिकायत की गई लेकिन, शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं होती।
हरिश्चंद्र
नगर निगम से सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। नालियां पूरी तरह भरी हुई हैं। नाली बैक फ्लो होकर उसका गंदा पानी घर में भर जाता है।
शिवम
घरों से कूड़ा उठाने कोई नहीं आता। कूड़ा सड़क के किनारे ही पड़ा रहता है। गंदगी की वजह से आसपास बीमारियां भी फैल जाती हैं।
गोपाल गुप्ता
- पीने के पानी रोजाना दूर से भरकर लाना पड़ता है। हैंडपंप मोहल्ले में लगा है लेकिन, उसे भी ठीक नहीं कराया गया।
करन कुमार
- पानी की समस्या है। पीने के पानी के इंतजाम के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। गर्मियों में यह समस्या बढ़ जाती है।
धर्मेद्र
शहरी इलाके में शामिल होने के बावजूद पानी की व्यवस्था ठीक नहीं हुई। सिर्फ हैंडपंप ही सहारा है। गर्मियों में पानी ही नहीं मिलता।
आनंदी
बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। ग्रामीण फीडर से बिजली दी जाती है। इस वजह से भी परेशानी होती है।
जितेंद्र कुमार
घरों तक कनेक्शन के लिए मोहल्ले के अंदर बिजली के खंभे नहीं लगाए गए। बल्लियों के सहारे तार लगाए गए हैं। कई बार दुर्घटना हो गई लेकिन, कोई सुनवाई नहीं होती

रजनी
शहरी इलाके में जुड़ने के बाद यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए इंतजाम किया जाना चाहिए। इसकी कोई व्यवस्था नहीं हुई। हम लोगों को कोई भी फायदा नहीं हो रहा।
कविता
बीस साल से हमारा मोहल्ला नगर निगम में शामिल हो गया लेकिन, अभी तक न पीने का पानी पहुंचा और न ही बिजली की व्यवस्था ठीक हुई। हम लोग पहले की तरह परेशान हैं।
फूलवती
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