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जोगी जती तपस्विन माहीं गई बैराग बिगारन, ईसुर कंत अंत घर जिनके उन्हें देत दुख दारुन...

Sat, 05 Feb 2022 01:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Feb 2022 01:36 AM IST
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Jogi jati penance mahin went to Bairag Bigaran, Isur Kant's end home, whose sorrow gave him a lot...
झांसी। बुंदेलखंड की धरती पर जहां वसंत पर्व की धार्मिक परंपराएं हैं तो वहीं यहां के लोक कवियों के रसीली फाग गीतों का गायन भी आज के ही दिन से चौपालों पर शुरू हो जाता है। नगड़िया और ढोलक का पूजन किया जाता है। वसंत से लेकर रंग पंचमी तक गांवों की गलियों में रसधार बहने लगती है। इसीलिए इस महीने को मदनेश का मास यानी कामदेव का महीना भी कहा जाता है। बुंदेलखंड की धरती पर जन्मे लोककवि ईसुरी की लिखी यह फाग वसंत पंचमी पर काफी गाई जाती है, अब ऋतु आई वसंत बहारन, पान फूल, फल डारन। हारन हद्द पाहरन पारन, धवल धाम जल धारन, जोगी जती तपस्विन माहीं गई वैराग्य बिगारन, ईसुर कंत अंत घर जिनके उन्हें देत दुख दारुन। ईसुरी ने इस माह को इतना रसीला बताया है कि वसंत ऋतु में जो बहार आती है वह तपस्वियों की तपस्या को भंग कर देती है। उन्होंने घर से बाहर गए प्रियतम से दूर रहने के नायिका के विरह का भी वर्णन किया है।
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दिन ललित वसंती आन लगे, हरे पात पियरान लगे....
फाग गायन करने वाले ढिकौली निवासी हरचरन पाल बताते हैं कि वसंत पंचमी वाले रोज देव स्थलों पर पहुंचकर ढोल व नगड़िया की पूजा होती है तथा इसके बाद फागों का गायन शुरू हो जाता है जो कि रंग पंचमी वाले रोज तक चलता है। हालांकि, इस आधुनिकता के दौर में इन परंपराओं का निर्वाह करने वाले लोगों की संख्या कम ही बची है। उन्होंने बताया कि वसंत पर्व पर जहां लोक कवि ईसुरी ने अपनी फागों में श्रृंगार और विरह का वर्णन किया है तो लोककवि गंगाधर ने इस ऋतु में होने वाले परिवर्तनों को बड़ी बखूबी से अपने वसंत गीतों में लिखा है। कवि गंगाधर की रचना, दिन ललित वसंती आन लगे, हरे पात पियरान लगे। घटन लगीं दिन पर दिन रजनी, रवि के रथ ठहरान लगे। आ गए बौर रसालन ऊपर चहुं दिश अली मंडरान लगे। चौपालों पर वसंत पंचमी वाले रोज खूब गाई जाती है। फाग गायन के दौरान सरसों के फूल, आम का बौर और गेहूं का पौधा देवताओं को समर्पित किया जाता है।
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कराया जाता है पाठी पूजन व कर्ण छेदन संस्कार
श्रीरामराजा संस्कृत महाविद्यालय ओरछा के आचार्य पं.वीरेंद्र बिदुआ बताते हैं कि बुंदेलखंड में वसंत पंचमी वाले दिन लोग अपने बच्चों का पाठी पूजन करवा कर उनकी शिक्षा दीक्षा प्रारंभ करवाते थे, इसी दिन यज्ञोपवीत संस्कार व कर्ण छेदन संस्कार भी किया जाता है। यह परंपरा अब बुंदेलखंड के गुरुकुल विद्यालयों में कायम है तथा यहां प्रतिवर्ष सैकड़ों बच्चों का पाठी पूजन, कर्ण छेदन तथा यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाता है। सरस्वती पूजन का कार्यक्रम भी होता है। हम सभी को अपनी पुरातन परंपराओं को कायम रखना चाहिए, जिससे आने वाले पीढ़ी भी इसका महत्व समझ सके।
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