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झांसी में रोजगार मेलों की बहार, फिर भी बेरोजगार 61 हजार के पार

Sat, 11 Dec 2021 01:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Dec 2021 01:30 AM IST
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Job fairs are out in Jhansi, yet unemployed cross 61 thousand
झांसी। बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सेवायोजन विभाग की ओर से पिछले आठ महीनों में 29 रोजगार मेले लगाए गए, बावजूद अब भी 61,922 बेरोजगार काम की आस में खाली हाथ बैठे हैं। हालांकि, मेलों के माध्यम से 6,017 युवाओं को रोजगार भी हासिल हुआ, लेकिन इनमें से आधे नौकरी छोड़कर वापस आ गए। इनमें से ज्यादातर वे रहे, जो कम तनख्वाह मिलने की वजह से बाहरी जनपदों व प्रदेशों में अपना गुजारा नहीं चला पा रहे थे।
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औद्योगिक रूप से पिछड़े बुंदेलखंड में बेरोजगारी बड़ी समस्या है। कोरोना काल में ये और भी बढ़ गई। तमाम लोगों के हाथ से काम छिन गया। हालात सामान्य होने के बाद भी रोजगार की रफ्तार अपनी गति से नहीं पकड़ पाई है। बेरोजगारों को रोजगार के लिए यहां-वहां न भटकना पड़े और आसानी से उन्हें उनकी काबिलियत के अनुसार नौकरी मिल जाए, इसके लिए सेवायोजन विभाग की ओर से रोजगार मेले आयोजित किए जाते हैं। मेलों में देश के अलग-अलग हिस्सों से कंपनियां यहां आकर बेरोजगारों का साक्षात्कार लेती हैं। इसमें सफल होने वालों को नौकरी दे दे जाती है। विभाग द्वारा अप्रैल से नवंबर माह तक 29 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिनके जरिये 6,017 बेरोजगारों का चयन हुआ। बावजूद, इससे दस गुना अधिक 61,922 युवा बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं। और तो और, जिन्हें रोजगार मिला भी उनमें से भी आधे नौकरी छोड़कर वापस आ गए। इनमें से ज्यादातर युवाओं का कहना रहा कि कम वेतन मिलने की वजह से उन्हें वापस आना पड़ा। आठ-दस हजार में खाना-किराया मुश्किल हो रहा था, जिसकी वजह से वे नौकरी छोड़ आए।
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केस - 1
कम थी आमदनी, खर्च अधिक
झांसी। गरौठा निवासी सुंदर ने बताया कि वे आईटीआई पास है। रोजगार मेले के जरिये चार महीने पहले उन्हें उत्तराखंड की एक कंपनी में नौकरी हासिल हुई थी। कंपनी द्वारा उन्हें महज 10 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा था, लेकिन इससे अधिक खर्च खाने और घर के किराये पर हो रहा था। जबकि, रोजाना आठ से दस घंटे उन्हें काम करना पड़ रहा था। ऐसे में दो महीने काम करने के बाद उन्हें नौकरी छोड़कर वापस आना पड़ा।
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केस - 2
बताया था ज्यादा, मिला कम
झांसी। मऊरानीपुर के नरेंद्र कुमार ने बताया कि तीन साल पहले उनका चयन हरियाणा की एक ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाली कंपनी में हुआ था। बताया था कि शुरुआती वेतन 16 हजार मिलेगा, लेकिन हाथ में आए सिर्फ 12 हजार। इतना ही नहीं, बड़ी कंपनी के नाम पर उनका चयन एक छोटी आउटसोर्स एजेंसी में किया गया था, जिसमें भविष्य भी नजर नहीं आ रहा था। ऐसे में वो नौकरी छोड़कर चले गए।

बेरोजगारी के आंकड़े
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वर्ग संख्या
सामान्य 5061
महिला 16006
अल्पसंख्यक 3092
एससी 16369
एसटी 182
ओबीसी 21212
बेरोजगारी के यह भी हैं कारण
झांसी। सेवायोजन कार्यालय में भले ही 61,922 बेरोजगारों ने अपना पंजीकरण करा रखा है, लेकिन विभाग द्वारा पिछले आठ माह में आयोजित किए गए 29 रोजगार मेलों में महज 17,996 बेरोजगारों ने ही हिस्सा लिया और इनमें से 6,017 को रोजगार हासिल हुआ। विभागीय लोगों का कहना है कि रोजगार मेलों में ज्यादातर बाहर की कंपनियां आती हैं और वे झांसी से बाहर ही रोजगार उपलब्ध कराती हैं। जबकि, यहां के ज्यादातर युवा अपना शहर या गांव छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते। इसके अलावा कई कंपनियां ऐसी होती है जो 10-12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देती हैं। बाहर रहकर इतनी रकम में गुजारा करना मुश्किल होता है। यही सब वजह हैं कि रोजगार मेलों में कम ही बेरोजगार पहुंचते हैं।
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