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झटका: इस साल शुरू नहीं होंगे पशु चिकित्सा और मत्स्यकीय कॉलेज
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत दतिया में इस साल पशु चिकित्सा एवं मत्स्यकीय महाविद्यालय शुरू नहीं हो पाएगा। कोरोना महामारी के चलते निर्माण कार्य में हुई देरी और स्टाफ के पदों का सृजन न हो पाना इसकी वजह बताई गई है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने सितंबर 2020 में इसका शिलान्यास किया गया था। 350 करोड़ की लागत से बनने वाले इस कॉलेज को डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया। 2022 से कक्षाएं शुरू करने की योजना थी मगर इस साल से यहां पर पढ़ाई शुरू नहीं हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना की वजह से काफी काम प्रभावित हुआ। इस वजह से निर्माण कार्य में भी विलंब हो गया। इसके अलावा फैकल्टी के लिए पदों का भी सृजन नहीं हो पाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इसके लिए मंत्रालय में आवेदन कर दिया गया है। अगले साल से यहां पर कक्षाएं संचालित होने की बात कही जा रही है।
बताया गया कि शिक्षण ही नहीं ये कॉलेज किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है। कॉलेज के जरिए 2025 तक दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाने की योजना है। साथ ही मछली उत्पादन में भी बढ़ोतरी करने की योजना है।
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189 एकड़ में बन रहा, 30 और 60 सीटें होंगी
दतिया के नौनेर में 189 एकड़ में बनने वाले इस कॉलेज में पशु चिकित्सा और मत्स्यकीय के अलग-अगल महाविद्यालय होंगे। वर्ष 2022 से शुरू होने वाले पहले सत्र में पशु चिकित्सा में 60 और मत्स्यकीय में 30 सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। कॉलेज में क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। साथ ही पॉलिट्री, रैबिट आदि की एनिमल यूनिट भी होंगी। बीज प्रसंस्करण का प्लांट भी लगाया जा रहा है।
कोरोना काल के चलते पशु चिकित्सा एवं मत्स्यकीय महाविद्यालय का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। स्टाफ के पदों का भी सृजन होना है। ऐसे में सत्र 2023-24 से यहां पर क्लासेस शुरू हो जाएंगी। - प्रो. अरविंद कुमार, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
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केंद्रीय कृषि मंत्री ने सितंबर 2020 में इसका शिलान्यास किया गया था। 350 करोड़ की लागत से बनने वाले इस कॉलेज को डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया। 2022 से कक्षाएं शुरू करने की योजना थी मगर इस साल से यहां पर पढ़ाई शुरू नहीं हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना की वजह से काफी काम प्रभावित हुआ। इस वजह से निर्माण कार्य में भी विलंब हो गया। इसके अलावा फैकल्टी के लिए पदों का भी सृजन नहीं हो पाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इसके लिए मंत्रालय में आवेदन कर दिया गया है। अगले साल से यहां पर कक्षाएं संचालित होने की बात कही जा रही है।
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बताया गया कि शिक्षण ही नहीं ये कॉलेज किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है। कॉलेज के जरिए 2025 तक दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाने की योजना है। साथ ही मछली उत्पादन में भी बढ़ोतरी करने की योजना है।
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189 एकड़ में बन रहा, 30 और 60 सीटें होंगी
दतिया के नौनेर में 189 एकड़ में बनने वाले इस कॉलेज में पशु चिकित्सा और मत्स्यकीय के अलग-अगल महाविद्यालय होंगे। वर्ष 2022 से शुरू होने वाले पहले सत्र में पशु चिकित्सा में 60 और मत्स्यकीय में 30 सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। कॉलेज में क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स भी बनेगा। साथ ही पॉलिट्री, रैबिट आदि की एनिमल यूनिट भी होंगी। बीज प्रसंस्करण का प्लांट भी लगाया जा रहा है।
कोरोना काल के चलते पशु चिकित्सा एवं मत्स्यकीय महाविद्यालय का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। स्टाफ के पदों का भी सृजन होना है। ऐसे में सत्र 2023-24 से यहां पर क्लासेस शुरू हो जाएंगी। - प्रो. अरविंद कुमार, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।