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यूपी में झांसी बनेगा ड्रैगन फ्रूट उत्पादन का हब
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झांसी। सरकार ने यूपी में झांसी को ड्रैगन फ्रूट (कमलम) का हब बनाने का निर्णय लिया है। राज्य औद्यानिक मिशन के जरिए सूबे में मिर्जापुर के बाद सबसे अधिक यहां ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन किया जाना तय हुआ है। नवीन उद्यान कार्यक्रम के मुताबिक झांसी में इसके लिए कुल 14 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उत्पादन कराया जाएगा जबकि मिर्जापुर मेें 20 हेक्टेयर रकबे में होगा।
बुंदेलखंड की जलवायु को देखते हुए पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां ड्रैगन फ्रूट को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई थी। अभी यह फल खास तौर से थाईलैंड, सिंगापुर जैसे कुछ देशों से आता है। यहां दक्षिणी भारत के कुछ इलाकों में इसका उत्पादन होता है। कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसे लोग खासा पसंद भी करते हैं। एक फल की कीमत करीब 60-80 रुपये के बीच बैठती है। चीन से तनाव के बाद पिछले वर्ष योगी सरकार ने इस फल का नाम बदलकर कमलम कर दिया था। अब सरकार इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहती है। पहली बार राज्य औद्यानिक मिशन के तहत इसे शामिल किया गया है। कार्ययोजना के मुताबिक इस वर्ष 14 हेक्टेयर में बाग तैयार कराया जाना है। इसके लाभार्थियों को सब्सिडी दी जाएगी। इसमें 11 हेक्टेयर सब्सिडी सामान्य श्रेणी के किसानों को जबकि तीन हेक्टेयर सब्सिडी अनुसूचित जाति के किसानों को मिलेगी, हालांकि अभी सब्सिडी की राशि तय नहीं हुई है। वहीं, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट में एक हेक्टेयर का लक्ष्य तय हुआ है। कौशांबी, प्रयागराज में सात हेक्टेयर में उत्पादन कराया जाएगा। उपनिदेशक उद्यान विनय यादव के मुताबिक शासन ने लक्ष्य तय कर दिया है। धनराशि आवंटन के साथ ही किसानों का चयन आरंभ कर दिया जाएगा।
14 हेक्टेयर में लगाई जाएगी स्ट्राबेरी
पिछले वर्ष झांसी की धूम मचा देने वाली स्ट्राबेरी का रकबा इस बार उद्यान विभाग बढ़ाकर 14 हेक्टेयर कराने जा रहा है। इसके लिए तहत किसानों को इसके फिलामेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। स्ट्राबेरी के लिए खेत अभी से तैयार कराने होंगे। कुछ दिनों बाद इसकी बुवाई आरंभ होगी।
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बुंदेलखंड की जलवायु को देखते हुए पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां ड्रैगन फ्रूट को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई थी। अभी यह फल खास तौर से थाईलैंड, सिंगापुर जैसे कुछ देशों से आता है। यहां दक्षिणी भारत के कुछ इलाकों में इसका उत्पादन होता है। कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसे लोग खासा पसंद भी करते हैं। एक फल की कीमत करीब 60-80 रुपये के बीच बैठती है। चीन से तनाव के बाद पिछले वर्ष योगी सरकार ने इस फल का नाम बदलकर कमलम कर दिया था। अब सरकार इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करना चाहती है। पहली बार राज्य औद्यानिक मिशन के तहत इसे शामिल किया गया है। कार्ययोजना के मुताबिक इस वर्ष 14 हेक्टेयर में बाग तैयार कराया जाना है। इसके लाभार्थियों को सब्सिडी दी जाएगी। इसमें 11 हेक्टेयर सब्सिडी सामान्य श्रेणी के किसानों को जबकि तीन हेक्टेयर सब्सिडी अनुसूचित जाति के किसानों को मिलेगी, हालांकि अभी सब्सिडी की राशि तय नहीं हुई है। वहीं, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट में एक हेक्टेयर का लक्ष्य तय हुआ है। कौशांबी, प्रयागराज में सात हेक्टेयर में उत्पादन कराया जाएगा। उपनिदेशक उद्यान विनय यादव के मुताबिक शासन ने लक्ष्य तय कर दिया है। धनराशि आवंटन के साथ ही किसानों का चयन आरंभ कर दिया जाएगा।
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14 हेक्टेयर में लगाई जाएगी स्ट्राबेरी
पिछले वर्ष झांसी की धूम मचा देने वाली स्ट्राबेरी का रकबा इस बार उद्यान विभाग बढ़ाकर 14 हेक्टेयर कराने जा रहा है। इसके लिए तहत किसानों को इसके फिलामेंट उपलब्ध कराए जाएंगे। स्ट्राबेरी के लिए खेत अभी से तैयार कराने होंगे। कुछ दिनों बाद इसकी बुवाई आरंभ होगी।
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