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Jhansi: कैंट इलाके में गहराने लगा पानी का संकट, सैन्य इलाकों में परेशानी, खरीदकर पीना पड़ रहा पेयजल
Sat, 21 Mar 2026 01:10 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:10 PM IST
सार
कैंट प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब एक साल से औसतन रोजाना महज 7-8 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि 15.50 एमएलडी पानी की यहां आवश्यकता है।
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पानी का संकट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बबीना कैंट इलाके में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इस वजह से कई इलाकों में पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। सैन्य इलाके में पानी की कमी से परेशान होकर सैन्य अफसरों ने जल निगम को पत्र लिखकर समाधान कराने की मांग की है।
बबीना कैंट एवं आसपास के गांवों की करीब 27 हजार आबादी को बबीना प्लांट से पानी की आपूर्ति होती है। कैंट प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब एक साल से औसतन रोजाना महज 7-8 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि 15.50 एमएलडी पानी की यहां आवश्यकता है। ऐसे में जरूरत के मुकाबले 50 फीसदी पानी भी नहीं मिल पा रहा है। गर्मियों में यह संकट दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। जबकि, यहां आर्मी अस्पताल, फील्ड अस्पताल, डेंटल सेंटर समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इन स्थानों पर निर्बाध जलापूर्ति की आवश्यकता होती है। पानी की कमी से मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) को भी दिक्कत हो रही है। सैन्य अफसरों का कहना है कि कई बार पहले भी जल निगम को पत्र भेजकर आपूर्ति बढ़ाने की मांग की, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। सीईडब्ल्यू विंग ने पिछले माह भी जल निगम के अधीक्षण अभियंता एसके यादव को पत्र भेजकर परेशानी बताई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संकट के चलते बाजार से खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सेना के जवानों और उनके परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता मुकेश पाल सिंह का कहना है जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए नया प्रोजेक्ट बनाया गया है। इसकी मदद से यह परेशानी दूर होगी।
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बबीना कैंट एवं आसपास के गांवों की करीब 27 हजार आबादी को बबीना प्लांट से पानी की आपूर्ति होती है। कैंट प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले करीब एक साल से औसतन रोजाना महज 7-8 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है, जबकि 15.50 एमएलडी पानी की यहां आवश्यकता है। ऐसे में जरूरत के मुकाबले 50 फीसदी पानी भी नहीं मिल पा रहा है। गर्मियों में यह संकट दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। जबकि, यहां आर्मी अस्पताल, फील्ड अस्पताल, डेंटल सेंटर समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इन स्थानों पर निर्बाध जलापूर्ति की आवश्यकता होती है। पानी की कमी से मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) को भी दिक्कत हो रही है। सैन्य अफसरों का कहना है कि कई बार पहले भी जल निगम को पत्र भेजकर आपूर्ति बढ़ाने की मांग की, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। सीईडब्ल्यू विंग ने पिछले माह भी जल निगम के अधीक्षण अभियंता एसके यादव को पत्र भेजकर परेशानी बताई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संकट के चलते बाजार से खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सेना के जवानों और उनके परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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इस संबंध में अधिशासी अभियंता मुकेश पाल सिंह का कहना है जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए नया प्रोजेक्ट बनाया गया है। इसकी मदद से यह परेशानी दूर होगी।