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Jhansi: झांसी-खजुराहो हाईवे पर अन्ना गोवंशों का जमावड़ा बना मुसीबत, आए दिन हादसों का शिकार हो रहे राहगीर
Mon, 20 Jul 2026 08:10 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Mon, 20 Jul 2026 08:10 PM IST
सार
सबसे गंभीर स्थिति देवरी बांध से लेकर बंगरा के बीच है, जहां गोवंश सड़क के बीचों-बीच डेरा डाले हुए बैठे रहते हैं।
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झांसी-खजुराहो हाईवे पर अन्ना गोवंश।
- फोटो : संवाद।
विस्तार
झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों राहगीरों और अन्ना गोवंशों, दोनों के लिए खतरे का कारण बना हुआ है। हाईवे पर बड़ी संख्या में गोवंशों के डेरा जमाने से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति देवरी बांध से लेकर बंगरा के बीच है, जहां गोवंश सड़क के बीचों-बीच खड़े या बैठे रहते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण इस मार्ग पर वाहन तेज गति से चलते हैं। ऐसे में अचानक सामने गोवंश आ जाने पर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठते हैं। परिणामस्वरूप कई बार वाहन गोवंशों से टकरा जाते हैं। इन हादसों में जहां गोवंशों की मौत हो रही है, वहीं वाहन चालक घायल हो रहे हैं और वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश लिटोरिया, समाजसेवी राजेंद्र राहुल, गौसेवक चक्रपाणि चतुर्वेदी और रोहित कुशवाहा ने बताया कि हाईवे पर गोवंशों को हटाने और निगरानी के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन धरातल पर व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आ रही है। उनका आरोप है कि प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों और बेजुबान गोवंशों को भुगतना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। जलभराव और कीचड़ से बचने के लिए गोवंश सड़क पर आकर बैठ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। पिछले वर्ष भी बरसात के दौरान इसी लापरवाही के चलते दो दर्जन से अधिक गोवंश सड़क हादसों में मारे गए थे। इस बार भी मानसून शुरू होते ही हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि केवल कागजी दावों तक सीमित रहने के बजाय प्रभावी कार्रवाई की जाए। तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए हाईवे पर मौजूद गोवंशों को तत्काल निकटवर्ती गोशालाओं में पहुंचाया जाए, ताकि भविष्य में बड़े हादसों और गोवंशों की मौतों को रोका जा सके।
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राष्ट्रीय राजमार्ग होने के कारण इस मार्ग पर वाहन तेज गति से चलते हैं। ऐसे में अचानक सामने गोवंश आ जाने पर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठते हैं। परिणामस्वरूप कई बार वाहन गोवंशों से टकरा जाते हैं। इन हादसों में जहां गोवंशों की मौत हो रही है, वहीं वाहन चालक घायल हो रहे हैं और वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
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भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश लिटोरिया, समाजसेवी राजेंद्र राहुल, गौसेवक चक्रपाणि चतुर्वेदी और रोहित कुशवाहा ने बताया कि हाईवे पर गोवंशों को हटाने और निगरानी के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन धरातल पर व्यवस्था पूरी तरह विफल नजर आ रही है। उनका आरोप है कि प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों और बेजुबान गोवंशों को भुगतना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। जलभराव और कीचड़ से बचने के लिए गोवंश सड़क पर आकर बैठ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। पिछले वर्ष भी बरसात के दौरान इसी लापरवाही के चलते दो दर्जन से अधिक गोवंश सड़क हादसों में मारे गए थे। इस बार भी मानसून शुरू होते ही हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि केवल कागजी दावों तक सीमित रहने के बजाय प्रभावी कार्रवाई की जाए। तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए हाईवे पर मौजूद गोवंशों को तत्काल निकटवर्ती गोशालाओं में पहुंचाया जाए, ताकि भविष्य में बड़े हादसों और गोवंशों की मौतों को रोका जा सके।