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Jhansi News: युद्ध के बीच मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन पहुंची झांसी की बेटी

Mon, 12 Dec 2022 06:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2022 06:30 AM IST
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Jhansi's daughter reached Ukraine to study medicine amid war
झांसी। रूस और यूक्रेन के बीच कई महीनों से चल रही जंग अभी थमी नहीं है। मगर इन हालातों में मजबूरी में झांसी की छात्रा को दूसरे देश से होते हुए मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन पहुंचना पड़ा है। युद्ध की वजह से वहां पर जबरदस्त महंगाई हो गई है। इसके अलावा बिजली, पानी की समस्या से उसे जूझना पड़ रहा है।
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झांसी के सैंयर गेट निवासी अफजाल हुसैन की बेटी नाजिया उजहोरोड नेशनल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की छात्रा है। इसी साल यूक्रेन और रूस के बीच जंग शुरू होने के बाद वो झांसी लौट आई थी। अभी ऑनलाइन क्लास चल रही थी। छात्रा के पिता ने बताया कि पांचवें वर्ष की पढ़ाई शुरू होने के बाद यूक्रेन में लिखित परीक्षा होती है। ये परीक्षा देना जरूरी होता है। इसलिए दो सप्ताह पहले ही मजबूरी में बेटी को पढ़ने के लिए यूक्रेन भेजना पड़ा। उनकी बेटी जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ती है, वहां पर युद्ध का बहुत अधिक प्रभाव तो नहीं है। फिर भी डर सताता रहता है कि कहीं से कोई मिसाइल या बम आकर न गिर जाए। युद्ध की वजह से महंगाई काफी बढ़ गई है। ऐसे में ज्यादा पैसे खर्च करके जरूरी सामान खरीदना पड़ रहा है। कई-कई घंटों के लिए बिजली चली जाती है। ऐसे में पेयजल का भी संकट हो जाता है। इन समस्याओं से उनकी बेटी रोजाना जूझ रही है। अब रोजाना दिन में तीन से चार बार फोन करके हालचाल लेते रहते हैं।
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दोगुनी फीस पर रूस में मिल रहा है प्रवेश
झांसी। यूक्रेन के एक विश्वविद्यालय से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे इलाहाबाद बैंक चौराहा निवासी अखिल सिंह ने बताया कि मई में परीक्षा होने के बाद उसका चौथा साल शुरू हो जाएगा। चौथे वर्ष से मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करके इलाज करना पड़ता है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो भारत में मेडिकल की डिग्री मान्य नहीं होगी। मगर युद्ध की वजह से अखिल के परिजन उसे यूक्रेन भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। परिजनों ने बताया कि रूस में प्रवेश मिल रहा है, मगर वहां की फीस दोगुनी है। इतने पैसे नहीं दे सकते हैं। यूरोप के दूसरे देशों में भी रहने-खाने का खर्चा और फीस ज्यादा है। अभी अनिश्चितता का माहौल है। लगातार रूस और यूक्रेन के बीच बमबारी जारी है। समझ नहीं आ रहा क्या किया जाए।
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नहीं जाना चाहता यूक्रेन, भारत में मिले प्रवेश
झांसी। उजहोरोड नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र शिवाजी नगर निवासी आर्यन राज भी अभी ऑनलाइन ही पढ़ाई कर रहे हैं। आर्यन ने भी बताया कि भारत में यूक्रेन की डिग्री मान्य हो, इसके लिए चौथे वर्ष में मरीजों का उपचार करना पड़ता है। मगर युद्ध के माहौल में यूक्रेन नहीं जाना चाहता हूं। आर्यन के पिता डॉ. जीएस यादव ने बताया कि केंद्र सरकार को यूक्रेन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को देश में ही अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण की अनुमति देनी चाहिए। इसका प्रमाणपत्र भी छात्रों को मिले, ताकि वो यूक्रेन की यूनिवर्सिटी में जमा कर सकें। इसके अलावा भारत में ही सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिया जाए, क्योंकि यूक्रेन में पढ़ने वाले छात्रों ने भी नीट की परीक्षा पास की है। इससे छात्रों का भविष्य खराब नहीं होगा।
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