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Jhansi News: नए साल के जश्न के बीच जहरीली हुई झांसी की हवा

Sun, 01 Jan 2023 10:22 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jan 2023 10:22 PM IST
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Jhansi's air turned poisonous amid New Year's celebrations
झांसी। नए साल के जश्न के बीच झांसी की हवा जहरीली हो गई। शनिवार की रात 12 बजते हुए शहर भर में लोगों ने खूब आतिशबाजी की। वहीं, ठंड से बचाव के लिए पॉलिथीन, टायर के साथ जगह-जगह अलाव जले। दतिया, ओरछा में दर्शन के लिए कई राज्यों से आए लोगों के वाहनों से निकले धुएं से रविवार को झांसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 278 पहुंच गया।
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शनिवार को पहली बार झांसी में घना कोहरा पड़ा। हाल ये रहा कि सुबह नौ बजे तक लोगों को शहरी इलाकों में सौ मीटर तो ग्रामीण क्षेत्रों मेें 25 मीटर दूर का दिखाई नहीं दिया। नए साल की सुबह भी घने कोहरे के साथ हुई। सर्द हवाएं चलने से अधिकतम तापमान लुढ़ककर 19.5 पर पहुंच गया। दोपहर 12 बजे के बाद हल्की धूप निकली मगर सर्द हवाओं ने ठिठुरन बरकरार रखी। सूरज ढलते ही शाम छह बजे से गलन शुरू हो गई। वहीं, झांसी में शुक्रवार तक मौसम साफ रहने और अधिकतम तापमान 25 व न्यूनतम आठ डिग्री सेल्सियस रहने से ज्यादा ठंड नहीं पड़ रही थी। ऐसे में लोग अलाव कम जला रहे थे। इसलिए वायु गुणवत्ता सूचकांक 125 के आसपास बना हुआ था। मगर दो दिनों में कड़ाके की सर्दी के चलते लोगों ने लकड़ी के साथ पॉलिथीन, टायर आदि जलाने शुरू किए। वहीं, सामान्य दिनों की तुलना में सड़कों पर वाहन भी ज्यादा दौड़े। कई राज्यों से लोग ओरछा, दतिया दर्शन करने आए। झांसी के लोग भी नए साल का जश्न मनाने के लिए कई पर्यटन स्थल, रेस्टोरेंट गए। नया साल शुरू होते ही शनिवार रात 12 बजे से शुरू हुई आतिशबाजी से भी वातावरण प्रदूषित हुआ। इन सब कारणों से रविवार को झांसी का एक्यूआई 278 पहुंच गया। देर रात तक एक्यूआई 200 से ऊपर रहने से झांसी ऑरेंज जोन में रहा।
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श्वांस रोगियों की फूल गईं सांस
झांसी। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. रजत जैन ने बताया कि जो सांस के मरीज होते हैं, उनकी सांस फूलने लगती है। खांसी आने लगती है। सीने में जकड़न होने से दम घुटने लगता है। ऐसे में श्वांस के रोगियों को ऐसी स्थिति में बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। बाहर निकलना जरूरी है तो मास्क लगाकर निकलें। वहीं, वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि इतने अधिक एक्यूआई में सांस के मरीजों को इन्हेलर की डोज बढ़ानी पड़ती है। पिछले दो दिनों में सांस लेने में तकलीफ होने वाले मरीज 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
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ऐसे जाने एक्यूआई की स्थिति
एक्यूआई श्रेणी
शून्य से 50 अच्छा
51 से 100 संतोषजनक
101 से 200 मध्यम
201 से 300 खराब
301 से 400 बहुत खराब
401 से 500 गंभीर
लकड़ी, टायर, पॉलिथीन आदि जलाने से कार्बन के कण निकलते हैं। ये वातावरण में मौजूद ओस में जमा हो जाते हैं। साथ ही वातावरण में मौजूदा नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि गैस ओस के पानी में घुल जाती हैं। इससे स्मॉग बन जाता है। वहीं, वाहनों से निकलने वाले धुएं और आतिशबाजी से भी एक्यूआई बढ़ा है। - डॉ. स्मिता त्रिपाठी, समन्वयक, पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीयू।
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