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Jhansi: मेडिकल कॉलेज में बंद रेडियोथैरेपी, परेशान हो रहे कैंसर रोगी, उपचार के लिए जाना पड़ता है बाहर

Wed, 04 Feb 2026 09:51 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 04 Feb 2026 09:51 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज में सर्जरी और कीमोथैरेपी तो दी जाती है मगर जब रेडियोथैरेपी की जरूरत होती है, तो रोगी को बाहर जाना पड़ता है। इसकी वजह वर्ष 2021 से रेडियोथैरेपी का बंद होना है।

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Jhansi: Radiotherapy closed in Medical College
रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बुंदेलखंड में जिस रफ्तार से कैंसर रोगियों का ग्राफ बढ़ रहा है, वह चिंता का विषय है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में आधा उपचार होने की वजह से परेशान रोगियों को बाहर जाना पड़ रहा है। जिसकी वजह कई वर्षों से रेडियोथैरेपी का बंद होना है। विशेषज्ञों का कहना है यदि कैंसर का समय से इलाज कराया जाए तो निदान संभव है।
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सबसे ज्यादा मुंह और प्रोस्टेड का कैंसर
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि कैंसर का कोई एक कारण नहीं होता है। कैंसर होने के कई कारण माने जाते हैं, जिनमें व्यायाम की कमी से मेटाबॉलिज्म (चयापचय) गड़बड़ होना, पौष्टिक आहार की कमी, मिलावटी खाद्य पदार्थ का सेवन, जंक फूड, फसलों में पेस्टीसाइड का प्रयोग अथवा छिड़काव के समय श्वास के माध्यम से शरीर में जाने, धूम्रपान, तंबाकू आदि का सेवन है। मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों पर नजर डाले तो अब हर माह करीब 45 नये कैंसर रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा औसतन 35 नये कैंसर रोगी के आने का था। वह बताते हैं कि बुंदेलखंड के पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह और प्रोस्टेड का कैंसर हो रहा है। वहीं, महिलाओं में ब्रेस्ट (स्तन) और बच्चेदानी (सर्वाइकल) कैंसर का आंकड़ा सबसे ज्यादा है।
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कैंसर रोगियों के समुचित उपचार के लिए जरूरत पड़ने पर सर्जरी होती है। इसके बाद कीमोथैरेपी और फिर रेडियोथैरेपी की जाती है। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी और कीमोथैरेपी तो दी जाती है मगर जब रेडियोथैरेपी की जरूरत होती है, तो रोगी को बाहर जाना पड़ता है। इसकी वजह वर्ष 2021 से रेडियोथैरेपी का बंद होना है। डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि रेडियोथैरेपी की सुविधा करने की दिशा में शासन स्तर से प्रक्रिया चल रही है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने सहयोग के लिए हाथ बढ़ाया है, जिससे वर्ष 2026 में इसके शुरू होने की उम्मीद है।
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कैंसर रोगी के लिए चल रही योजनाएं
कैंसर का उपचार उन लोगों के लिए ज्यादा खर्चीला हो जाता है, जिन्हें सरकार की योजनाओं की जानकारी नहीं है। बताते हैं कि कैंसर रोगियों का उपचार आयुष्मान कार्ड से ही नहीं पं. दीनदयाल उपाध्याय सेवा के तहत नि:शुल्क होता है। यदि जिन रोगियों के पास यह कार्ड अथवा सुविधा नहीं है, उनका उपचार मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जाता है।
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