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Jhansi: खिलाड़ियों का सपना अधूरा, डेढ़ साल में भी बास्केटबॉल कोर्ट नहीं बना पूरा
Sun, 13 Sep 2026 07:41 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 13 Sep 2026 07:41 PM IST
सार
मई 2025 में करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण शुरू हुआ था। इसे छह महीने में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित समय सीमाएं निकल चुकी हैं।
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मेजर ध्यानचंद स्टेडियम, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में सिंथेटिक बास्केटबॉल कोर्ट का निर्माण डेढ़ साल से अधूरा है। मई 2025 में करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से यह काम शुरू हुआ था। इसे छह महीने में पूरा होना था, लेकिन निर्धारित समय सीमाएं निकल चुकी हैं। इससे खिलाड़ियों का आधुनिक कोर्ट पर खेलने का सपना अधूरा ही है।
नवंबर 2025, फरवरी 2026 की समय सीमाएं भी निकल चुकी हैं। सितंबर 2026 की समयावधि भी खत्म होने की ओर है, लेकिन निर्माण कार्य करीब 70 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। आवास विकास परिषद को यह काम छह महीने में पूरा करना था। निर्माण में देरी का मुख्य कारण गुणवत्ता को लेकर शिकायत है। शिकायत के बाद दूसरी किस्त रोक दी गई थी। इस संबंध में दस्तावेज शासन को भेजे गए थे, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी करमवीर सिंह ने बताया कि बजट संबंधी प्रक्रिया के कारण काम प्रभावित हुआ है।
अधूरे कार्य और खिलाड़ियों की परेशानी
कोर्ट का 30 फीसदी काम बाकी है। सिंथेटिक सतह बिछाने और परिष्करण जैसे कई कार्य अधूरे हैं। तेज रोशनी वाली लाइटें, दर्शक दीर्घा और प्रशासनिक भवन भी तैयार नहीं हुए हैं। खिलाड़ियों को बेहतर सतह पर अभ्यास की सुविधा मिलनी थी। उनका प्रतियोगिताओं की तैयारी का सपना फिलहाल निर्माणाधीन ढांचे में ही अटका है।
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नवंबर 2025, फरवरी 2026 की समय सीमाएं भी निकल चुकी हैं। सितंबर 2026 की समयावधि भी खत्म होने की ओर है, लेकिन निर्माण कार्य करीब 70 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। आवास विकास परिषद को यह काम छह महीने में पूरा करना था। निर्माण में देरी का मुख्य कारण गुणवत्ता को लेकर शिकायत है। शिकायत के बाद दूसरी किस्त रोक दी गई थी। इस संबंध में दस्तावेज शासन को भेजे गए थे, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी करमवीर सिंह ने बताया कि बजट संबंधी प्रक्रिया के कारण काम प्रभावित हुआ है।
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अधूरे कार्य और खिलाड़ियों की परेशानी
कोर्ट का 30 फीसदी काम बाकी है। सिंथेटिक सतह बिछाने और परिष्करण जैसे कई कार्य अधूरे हैं। तेज रोशनी वाली लाइटें, दर्शक दीर्घा और प्रशासनिक भवन भी तैयार नहीं हुए हैं। खिलाड़ियों को बेहतर सतह पर अभ्यास की सुविधा मिलनी थी। उनका प्रतियोगिताओं की तैयारी का सपना फिलहाल निर्माणाधीन ढांचे में ही अटका है।
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