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महानगर को थ्री स्टार सिटी का दर्जा
Wed, 26 Dec 2018 01:41 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 26 Dec 2018 01:41 AM IST
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स्वच्छता को लेकर चल रही रैंकिंग में महानगर एक कदम और आगे बढ़ गया है। राज्य स्तरीय रैंकिंग में महानगर को थ्री स्टार गारबेज फ्री (कचरामुक्त) घोषित कर दिया गया है। अब घर-घर से कचरा इकट्ठा करना, सूखा व गीला कचरा अलग-अलग कराना नगर निगम के सामने चुनौती है।
स्वच्छता को लेकर भारत सरकार ने मानक तय किए हैं। इसमें किसी शहर को प्रथम श्रेणी रैंकिंग भारत सरकार की टीम के सर्वे के बाद मिल पाती है। द्वितीय और तृतीय श्रेणी की रैंकिंग प्रदेश सरकार तय करती है। महानगर को स्टार रेटिंग गारबेज फ्री सिटी (थ्री स्टार) का दर्जा दिलाने के लिए चार दिसंबर से आपत्तियां मांगी गई थीं। निर्धारित तिथि 19 दिसंबर तक कोई आपत्ति नहीं आई। इसके एक सप्ताह बाद महानगर को ‘थ्री स्टार गारबेज फ्री सिटी’ घोषित कर दिया गया।
नगर निगम में 60 वार्ड हैं। इन वार्डों में घर-घर से कचरा इकट्ठा तो किया जा रहा है पर अभी शत-प्रतिशत कचरा इकट्ठा नहीं हो रहा है। इसकी मुख्य वजह महानगर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद चल रहा है। सिर्फ मुस्कान ज्योति और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। यह दोनों प्लांट प्लास्टिक कचरा गला रहे हैं। रैंकिंग मिलने के बाद अब नगर निगम के सामने चुनौती होगी कि सभी वार्डों में शत-प्रतिशत घरोें से कचरा इकट्ठा किया जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी शुरू करना पड़ेगा।
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थ्री स्टार सिटी का दर्जा मिलने के बाद एक और चुनौती नगर निगम के सामने आने वाली है। इसमें प्रत्येक घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग किया जाएगा। गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। यह खाद गमलों और लॉन में लगने वाले पेड़-पौधों में उपयोग की जाएगी, इससे एक फायदा यह होगा कि गीला कचरे का सदुपयोग होगा और रासायनिक खाद की खपत कम होगी। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। घर-घर में कंपोस्ट खाद बनाने का काम शुरू हो, इसके लिए 15 से 20 लीटर क्षमता के कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) सभी घरों में अनिवार्य किए जाएंगे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश बाबू ने बताया कि महानगर ‘थ्री स्टार गारबेज फ्री सिटी’ घोषित कर दिया गया है।
सहारनपुर से मंगाए जाएंगे डस्टबिन
कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) आसपास के किसी शहर में अभी तक प्रयोग नहीं हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम सहारनपुर में हाल ही मेें इस तरह के डस्टबिन बांटे गए हैं। इसलिए मॉडल के तौर पर वहां से डस्टबिन मंगाए जाएंगे। परीक्षण के तौर पर कंपोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया समझी जाएगी। यदि डस्टबिन सही तरीके से काम करते हैं तो महानगर में भी बंटवाए जाएंगे।
पहले बंटवाए जाएंगे, फिर प्रेरित किया जाएगा
पहले चरण में कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) बंटवाए जाएंगे और इनका महत्व बताया जाएगा। जब लोगों को इनका महत्व समझ में आने लगेगा तो फिर प्रेरित किया जाएगा कि डस्टबिन स्वत: खरीदें, सूखा व गीला कचरा अलग करें।
गाड़ियां अलग-अलग रखती हैं कचरा
सुबह कचरा इकट्ठा करने के लिए निकलने वाली गाड़ियां सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखती हैं। गीले कचरे में सब्जियाें और फलों के छिलके, खराब दूध, खराब अंडे, ब्रेड समेत खाने-पीने का सामान इकट्ठा किया जाता है।
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स्वच्छता को लेकर भारत सरकार ने मानक तय किए हैं। इसमें किसी शहर को प्रथम श्रेणी रैंकिंग भारत सरकार की टीम के सर्वे के बाद मिल पाती है। द्वितीय और तृतीय श्रेणी की रैंकिंग प्रदेश सरकार तय करती है। महानगर को स्टार रेटिंग गारबेज फ्री सिटी (थ्री स्टार) का दर्जा दिलाने के लिए चार दिसंबर से आपत्तियां मांगी गई थीं। निर्धारित तिथि 19 दिसंबर तक कोई आपत्ति नहीं आई। इसके एक सप्ताह बाद महानगर को ‘थ्री स्टार गारबेज फ्री सिटी’ घोषित कर दिया गया।
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नगर निगम में 60 वार्ड हैं। इन वार्डों में घर-घर से कचरा इकट्ठा तो किया जा रहा है पर अभी शत-प्रतिशत कचरा इकट्ठा नहीं हो रहा है। इसकी मुख्य वजह महानगर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद चल रहा है। सिर्फ मुस्कान ज्योति और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट काम कर रहे हैं। यह दोनों प्लांट प्लास्टिक कचरा गला रहे हैं। रैंकिंग मिलने के बाद अब नगर निगम के सामने चुनौती होगी कि सभी वार्डों में शत-प्रतिशत घरोें से कचरा इकट्ठा किया जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी शुरू करना पड़ेगा।
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थ्री स्टार सिटी का दर्जा मिलने के बाद एक और चुनौती नगर निगम के सामने आने वाली है। इसमें प्रत्येक घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग किया जाएगा। गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी। यह खाद गमलों और लॉन में लगने वाले पेड़-पौधों में उपयोग की जाएगी, इससे एक फायदा यह होगा कि गीला कचरे का सदुपयोग होगा और रासायनिक खाद की खपत कम होगी। इससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होगा। घर-घर में कंपोस्ट खाद बनाने का काम शुरू हो, इसके लिए 15 से 20 लीटर क्षमता के कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) सभी घरों में अनिवार्य किए जाएंगे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश बाबू ने बताया कि महानगर ‘थ्री स्टार गारबेज फ्री सिटी’ घोषित कर दिया गया है।
सहारनपुर से मंगाए जाएंगे डस्टबिन
कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) आसपास के किसी शहर में अभी तक प्रयोग नहीं हो रहे हैं, लेकिन नगर निगम सहारनपुर में हाल ही मेें इस तरह के डस्टबिन बांटे गए हैं। इसलिए मॉडल के तौर पर वहां से डस्टबिन मंगाए जाएंगे। परीक्षण के तौर पर कंपोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया समझी जाएगी। यदि डस्टबिन सही तरीके से काम करते हैं तो महानगर में भी बंटवाए जाएंगे।
पहले बंटवाए जाएंगे, फिर प्रेरित किया जाएगा
पहले चरण में कंपोस्ट खाद पिट (डस्टबिन) बंटवाए जाएंगे और इनका महत्व बताया जाएगा। जब लोगों को इनका महत्व समझ में आने लगेगा तो फिर प्रेरित किया जाएगा कि डस्टबिन स्वत: खरीदें, सूखा व गीला कचरा अलग करें।
गाड़ियां अलग-अलग रखती हैं कचरा
सुबह कचरा इकट्ठा करने के लिए निकलने वाली गाड़ियां सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखती हैं। गीले कचरे में सब्जियाें और फलों के छिलके, खराब दूध, खराब अंडे, ब्रेड समेत खाने-पीने का सामान इकट्ठा किया जाता है।