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Exclusive: कर्ज लेकर खूब किया खर्च... झांसी में 54 हजार ने नहीं चुकाए बैंकों के सात अरब; एनपीए में डाली गई रकम

Sun, 07 Apr 2024 07:58 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 07 Apr 2024 07:58 AM IST
सार

झांसी में कर्ज लेकर खूब खर्च किया। 54 हजार लोगों ने बैंकों के सात अरब नहीं चुकाए। बैंक अफसरों के बार-बार रिमाइंडर के बाद भी कर्ज नहीं लौटाया। रकम एनपीए में डाल दी गई।

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Jhansi News Spent a lot by taking loan 54 thousand people did not repay seven billion rupees to banks
फाइल फोटो

विस्तार

बैंक से कर्ज लेकर किसी ने मकान बनवाया तो किसी ने कार खरीद ली। किसी ने अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंक से लोन लेकर खूब खर्च किया, लेकिन अब चुका नहीं रहे हैं। झांसी में 54 हजार लोग ऐसे सामने आए हैं। यह लोग बैंकों का सात अरब से ज्यादा दबाए बैठे हैं। 
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लगातार प्रयास करने के बाद रकम वापस न लौटने पर बैंकों ने यह राशि एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) में डाल दी है। बैंकों द्वारा लोगों को घर बनाने से लेकर घर चलाने तक के लिए ऋण दिया जाता है। लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने लिए भी कर्ज लेते हैं। 
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खेतीबाड़ी से लेकर सरकारी योजनाओं के पात्रों को भी बैंकों से ऋण दिया जाता है। जिले में अब तक बैंकों ने लोगों को 104 अरब 21 करोड़ रुपये बतौर ऋण दिए हुए हैं। लेकिन, इस रकम में से बैंकों के सात अरब पच्चीस करोड़ 38 लाख रुपये बट्टे खाते में चले गए हैं। 
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झांसी के 54,156 लोग बैंकों से लिया गया यह ऋण लौटा नहीं रहे हैं। कई प्रयासों के बाद भी ऋण की अदायगी न होने पर बैंकों ने अपनी इस रकम को एनपीए में डाल दिया है।
 

कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा फंसा पैसा
बैंकों की ओर से किसानों को खेती संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से रियायती ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा कृषि उपकरणों की खरीद के लिए कर्ज दिया जाता है। लेकिन, बैंकों का सबसे ज्यादा ऋण कृषि क्षेत्र में ही फंसा हुआ है। जिले के 39,345 ग्रामीण बैंकों का पांच अरब 63 करोड़ 32 लाख रुपये नहीं लौटा रहे हैं।

एक साल में 75 करोड़ बढ़ा एनपीए
वित्तीय वर्ष 2022-23 की समाप्ति पर झांसी में बैंकों का एनपीए छह अरब पचास करोड़ सत्तावन लाख रुपये था। बैंकों की यह रकम 48,375 लोगों पर फंसी हुई थी। लेकिन, एक साल में इस राशि में 75 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की समाप्ति पर बैंकों का एनपीए सात अरब 25 करोड़ 38 लाख रुपये हो गया।

तय अवधि बीतने के बाद भी लिए गए ऋण की अदायगी न करने पर उस रकम को एनपीए में डाल दिया जाता है। हालांकि, एनपीए के बाद भी ऋण वापस आता रहता है। यह एक सतत प्रक्रिया होती है। बैंकों की ओर से ऋण की वापसी के लिए नियमानुसार प्रयास किए जाते हैं।- अजय कुमार शर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक
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