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Jhansi: झांसी दिवस आज, सुबह मैराथन, शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाम के पीछे की यह कहानी

Sat, 31 Jan 2026 09:42 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 31 Jan 2026 09:42 AM IST
सार

ओरछा गजेटियर के अनुसार, जिस दिन इन गढ़ियों की नींव डाली गई, उस दिन वसंत पंचमी और तिथि 31 जनवरी 1618 थी।

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Jhansi: Jhansi Day today, marathon in the morning, cultural programs in the evening
झांसी की रानी लक्ष्मी बाई। - फोटो : Instagram

विस्तार

झांसी दिवस पर शनिवार को सुबह मैराथन निकलेगी। फिर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान प्रदर्शनी लगने से लेकर पुष्पांजलि तक होगी। प्रतिभा का भी सम्मान किया जाएगा।
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झांसी दुर्ग से मेजर ध्यानचंद स्टेडियम तक सुबह सात बजे से मैराथन निकाली जाएगी। फिर शाम चार बजे से किला मार्ग पर महाराजा गंगाधर राव कला मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम-एक शाम झांसी के नाम का आयोजन होगा। अतिथियों के स्वागत के बाद प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना झलकारी बाई को पुष्पांजलि भी दी जाएगी। झांसी की ऐतिहासिक गाथा के बारे में भी बताया जाएगा। इसके अलावा बुंदेली वाद्ययंत्र की प्रस्तुति, बच्चों के कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान, बुंदेली एवं बॉलीवुड कलाकारों की प्रस्तुति देंगे। रानी लक्ष्मीबाई पार्क में दोपहर 12 बजे से झांसी की रानी और बुंदेली लोक कथा पर केंद्रित रंगोली प्रतियोगिता होगी। शाम सात बजे से पार्क में दीपांजलि होगी।
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31 जनवरी 1618 को मानी गई झांसी की स्थापना तिथि
पिछले साल 18 जनवरी को नगर निगम में विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई थी। विशेषज्ञों ने कहा था कि ओरछा के राजा वीरसिंह जूदेव ने बंगरा पहाड़ी पर एक किला बनवाया था, जिसे अब झांसी का किला कहते हैं। साथ ही राज्य की सुरक्षा के लिए 52 गढ़ियों का निर्माण कराया था। ओरछा गजेटियर के अनुसार, जिस दिन इन गढ़ियों की नींव डाली गई, उस दिन वसंत पंचमी और तिथि 31 जनवरी 1618 थी। कुछ समय बाद किला आकार लेने लगा था।
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...और कहलाने लगा झांसी
एक दिन राजा वीर सिंह जूदेव और जैतपुर के राजा ओरछा की सबसे ऊंची छत पर बैठक कर रहे थे। तभी उन्होंने झांसी की ओर देखा और कहा कि कुछ झाईं सी दिखाई दे रही है। कालांतर में वीर सिंह जूदेव का झाईं सी कहना ही झांसी कहा जाने लगा। बैठक में आईं तिथियों में 31 जनवरी 1618 को झांसी की स्थापना तिथि के लिए सबसे उपयुक्त माना गया।
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