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गर्म तपती दोपहर है लड़कियों की जिंदगी....
ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2015 02:24 AM IST
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झांसी। झांसी जन महोत्सव - 2015 ‘परंपरा’ की तीसरी शाम मंगलवार को कवियों व शायरों के नाम रही। अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में कवि व शायरों ने एक से बढ़कर एक काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। महफिल देर रात तक गुलजार रही। शहर के लोगों ने इसका खूब लुत्फ उठाया।
किले की तलहटी में स्थित मुक्ताकाशी मंच पर कवि सम्मेलन व मुशायरे की शुरुआत प्रगति शर्मा ‘बया’ की सरस्वती वंदना व सागर त्रिपाठी के नात ए पाक से हुई। डा. कुंअर बेचैन ने ‘किसी भी काम करने की चाह पहले आती है, अगर बच्चे को गोदी लो तो बांहें पहले आती हैं, हर एक कोशिश का दर्जा कामयाबी से भी ऊंचा है, कि मंजिल से पहले राहें ही आती हैं’, जलील निजामी ने ‘... खुदा मिल जाएगा, आप पहले दिल से मिलने का इरादा कीजिए’, प्रो. सोम ठाकुर ने ‘ये प्याला प्रेम का प्याला है, तू नाच के और नचा के पी...’, डा. कीर्ति काले ने ‘गर्म तपती दोपहर है लड़कियों की जिंदगी, एक पथरीली डगर है लड़कियों की जिंदगी, चाहे हो अग्नि परीक्षा या हो चौसर की बिसात, हर सदी में दांव पर है लड़कियों की जिंदगी...’, सागर त्रिपाठी ने ‘इबादत अर्चना पूजा बड़ी मन्नत से आती हैं, खुदा के फज्ल से घर में बेटियां जन्नत से आती हैं...’, प्रो. वसीम बरेलवी ने ‘खफा तो क्या खफा सा हो गया है, ताल्लुक कितना गहरा हो गया है...’, डा. नवाज देवबंदी ने ‘गुनगुनाता जा रहा था एक फकीर, धूप रहती है, न साया देर तक..’, मुजावर मालेगांवी ने ‘पांव बेगम के दबाने में बुराई क्या है, ये है खुजली जो खुजाने में बुराई क्या है..., डा. राहत इंदौरी ने ‘रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है, चांद पागल है अंधेरों में निकल पड़ता है...’, डा. कलीम कैसर ने ‘जिंदगानी का फलसफा मिट्टी, आग पानी है और हवा मिट्टी...’ एवं राजेंद्र मालवीय ने ‘हम अपनी जिंदगी के अनुभव इस तरह बयां करते हैं...’ सुनाकर जमकर वाहवाही लूटी। इसके अलावा सुधा चौधरी, मंजुश्री ‘प्रीति’, रंजना ‘हया’ व डा. महताब आलम ने भी काव्य धारा बहाई।
इससे पूर्व मुशायरा व कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र दुबे, अध्यक्षता कर रहे सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव, विशिष्ट अतिथि मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. नरेंद्र सिंह सेंगर, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, सीएमओ डा. विनोद यादव आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य संयोजक राजीव राय व अध्यक्ष मुकुंद मेहरोत्रा ने आयोजन संबंधी जानकारियां दीं। अतिथियों का स्वागत हरगोविंद कुशवाहा, दिनेश भार्गव, डा. धन्नूलाल गौतम, धर्मेंद्र साहू, डा. बाबूलाल तिवारी, डा. नीति शास्त्री, अमित श्रीवास्तव, रामकिशन निरंजन, अर्जुन सिंह चांद, रवीश त्रिपाठी, अरुण द्विवेदी, रंजना विद्रोही, पन्नालाल असर, डा. चंद्र कांत अवस्थी, भूपेंद्र खत्री, सौरभ भांजे आदि ने किया।
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कवि सम्मेलन से पहले सीताराम कुशवाहा व साथियों ने कछवाई नृत्य, प्रमोद सेन व साथियों ने बुंदेली गायन, उमाशंकर सेन व साथियों ने आल्हा, रामप्रसाद अहिरवार व साथियों ने राई नृत्य, ज्ञान सिंह यादव ने बांसुरी वादन व रमेश पाल ने पाई डंडा की प्रस्तुति की। इस मौके पर सपा नगर अध्यक्ष चौधरी असलम शेर, अस्फान सिद्दीकी, पुष्पेंद्र यादव, विजय सिंह साहू, सत्येंद्र सिंह मोनू, अजीत राय आदि मौजूद रहे।
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किले की तलहटी में स्थित मुक्ताकाशी मंच पर कवि सम्मेलन व मुशायरे की शुरुआत प्रगति शर्मा ‘बया’ की सरस्वती वंदना व सागर त्रिपाठी के नात ए पाक से हुई। डा. कुंअर बेचैन ने ‘किसी भी काम करने की चाह पहले आती है, अगर बच्चे को गोदी लो तो बांहें पहले आती हैं, हर एक कोशिश का दर्जा कामयाबी से भी ऊंचा है, कि मंजिल से पहले राहें ही आती हैं’, जलील निजामी ने ‘... खुदा मिल जाएगा, आप पहले दिल से मिलने का इरादा कीजिए’, प्रो. सोम ठाकुर ने ‘ये प्याला प्रेम का प्याला है, तू नाच के और नचा के पी...’, डा. कीर्ति काले ने ‘गर्म तपती दोपहर है लड़कियों की जिंदगी, एक पथरीली डगर है लड़कियों की जिंदगी, चाहे हो अग्नि परीक्षा या हो चौसर की बिसात, हर सदी में दांव पर है लड़कियों की जिंदगी...’, सागर त्रिपाठी ने ‘इबादत अर्चना पूजा बड़ी मन्नत से आती हैं, खुदा के फज्ल से घर में बेटियां जन्नत से आती हैं...’, प्रो. वसीम बरेलवी ने ‘खफा तो क्या खफा सा हो गया है, ताल्लुक कितना गहरा हो गया है...’, डा. नवाज देवबंदी ने ‘गुनगुनाता जा रहा था एक फकीर, धूप रहती है, न साया देर तक..’, मुजावर मालेगांवी ने ‘पांव बेगम के दबाने में बुराई क्या है, ये है खुजली जो खुजाने में बुराई क्या है..., डा. राहत इंदौरी ने ‘रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है, चांद पागल है अंधेरों में निकल पड़ता है...’, डा. कलीम कैसर ने ‘जिंदगानी का फलसफा मिट्टी, आग पानी है और हवा मिट्टी...’ एवं राजेंद्र मालवीय ने ‘हम अपनी जिंदगी के अनुभव इस तरह बयां करते हैं...’ सुनाकर जमकर वाहवाही लूटी। इसके अलावा सुधा चौधरी, मंजुश्री ‘प्रीति’, रंजना ‘हया’ व डा. महताब आलम ने भी काव्य धारा बहाई।
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इससे पूर्व मुशायरा व कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र दुबे, अध्यक्षता कर रहे सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव, विशिष्ट अतिथि मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. नरेंद्र सिंह सेंगर, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, सीएमओ डा. विनोद यादव आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य संयोजक राजीव राय व अध्यक्ष मुकुंद मेहरोत्रा ने आयोजन संबंधी जानकारियां दीं। अतिथियों का स्वागत हरगोविंद कुशवाहा, दिनेश भार्गव, डा. धन्नूलाल गौतम, धर्मेंद्र साहू, डा. बाबूलाल तिवारी, डा. नीति शास्त्री, अमित श्रीवास्तव, रामकिशन निरंजन, अर्जुन सिंह चांद, रवीश त्रिपाठी, अरुण द्विवेदी, रंजना विद्रोही, पन्नालाल असर, डा. चंद्र कांत अवस्थी, भूपेंद्र खत्री, सौरभ भांजे आदि ने किया।
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कवि सम्मेलन से पहले सीताराम कुशवाहा व साथियों ने कछवाई नृत्य, प्रमोद सेन व साथियों ने बुंदेली गायन, उमाशंकर सेन व साथियों ने आल्हा, रामप्रसाद अहिरवार व साथियों ने राई नृत्य, ज्ञान सिंह यादव ने बांसुरी वादन व रमेश पाल ने पाई डंडा की प्रस्तुति की। इस मौके पर सपा नगर अध्यक्ष चौधरी असलम शेर, अस्फान सिद्दीकी, पुष्पेंद्र यादव, विजय सिंह साहू, सत्येंद्र सिंह मोनू, अजीत राय आदि मौजूद रहे।