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झांसी: सिर्फ आंकड़ों में जनधन, 95 हजार खातों में नहीं एक रुपया, सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा जीरो बैलेंस खाते
Thu, 21 May 2026 09:42 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 21 May 2026 09:42 PM IST
सार
बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार जिले में हजारों खाताधारकों ने खाता खुलवाने के बाद दोबारा बैंक का रुख तक नहीं किया।
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प्रधानमंत्री जनधन योजना।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
वित्तीय समावेशन का बड़ा माध्यम बताई गई प्रधानमंत्री जनधन योजना जिले में अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित होती नजर आ रही है। झांसी में 95 हजार से अधिक जनधन खातों में एक भी रुपया जमा नहीं है। इनमें से अधिकांश खातों में वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ, जिसके चलते वे निष्क्रिय हो चुके हैं।
केंद्र सरकार ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से 12 वर्ष पहले जनधन योजना शुरू की थी। योजना के तहत लाखों खाते खोले गए, लेकिन अब बड़ी संख्या में खाते सिर्फ रिकॉर्ड तक सिमटकर रह गए हैं। बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार जिले में हजारों खाताधारकों ने खाता खुलवाने के बाद दोबारा बैंक का रुख तक नहीं किया।
सबसे ज्यादा 62,595 जीरो बैलेंस जनधन खाते पंजाब नेशनल बैंक में पाए गए हैं। इसके अलावा इंडियन बैंक में 5,102, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 4,789, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 4,738 और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 4,488 खाते निष्क्रिय पड़े हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की दो शाखाओं में क्रमश: 4,096 और 2,889 खाते बिना लेनदेन के मिले।
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एचडीएफसी बैंक में 4,034, बैंक ऑफ इंडिया में 3,124 और कैनरा बैंक में 2,324 खाते वर्षों से उपयोग में नहीं हैं। यूको बैंक में 758, कोटक महिंद्रा बैंक में 582, आईडीबीआई बैंक में 482 और इंडियन ओवरसीज बैंक में 410 खाते निष्क्रिय पाए गए। एक्सिस बैंक में 232, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 296, आईसीआईसीआई बैंक में 38, पंजाब एंड सिंध बैंक में सात और यस बैंक में आठ खाते जीरो बैलेंस हैं।
खाते निष्क्रिय तो नहीं मिलेंगी सुविधाएं
बैंकिंग नियमों के अनुसार यदि किसी खाते में लगातार दो वर्षों तक कोई लेनदेन नहीं होता, तो उसे निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया जाता है। ऐसे खातों के रखरखाव पर बैंकों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है। वहीं खाताधारक दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधाओं से भी वंचित हो जाते हैं। बैंक अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश खातों की री-केवाईसी भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इससे खातों को दोबारा सक्रिय करने में दिक्कतें आ रही हैं।
लंबे समय तक खातों में लेनदेन न होने से वे निष्क्रिय हो जाते हैं। ऐसे खातों की निगरानी बढ़ाई जा रही है और खाताधारकों को नियमित उपयोग तथा री-केवाईसी के लिए जागरूक किया जा रहा है। - पीके सिंह, डीजीएम
इसलिए निष्क्रिय हो रहे जनधन खाते---
सिर्फ सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए खाते खुलना
नियमित आय और बचत का अभाव
बैंकिंग जागरूकता की कमी
री-केवाईसी न होना
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की दूरी
खाते निष्क्रिय होने पर क्या नुकसान
डीबीटी का लाभ रुक सकता है
दुर्घटना बीमा सुविधा प्रभावित
ओवरड्राफ्ट सुविधा बंद
बैंकिंग रिकॉर्ड कमजोर होने का खतरा
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केंद्र सरकार ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से 12 वर्ष पहले जनधन योजना शुरू की थी। योजना के तहत लाखों खाते खोले गए, लेकिन अब बड़ी संख्या में खाते सिर्फ रिकॉर्ड तक सिमटकर रह गए हैं। बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार जिले में हजारों खाताधारकों ने खाता खुलवाने के बाद दोबारा बैंक का रुख तक नहीं किया।
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सबसे ज्यादा 62,595 जीरो बैलेंस जनधन खाते पंजाब नेशनल बैंक में पाए गए हैं। इसके अलावा इंडियन बैंक में 5,102, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 4,789, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 4,738 और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 4,488 खाते निष्क्रिय पड़े हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की दो शाखाओं में क्रमश: 4,096 और 2,889 खाते बिना लेनदेन के मिले।
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एचडीएफसी बैंक में 4,034, बैंक ऑफ इंडिया में 3,124 और कैनरा बैंक में 2,324 खाते वर्षों से उपयोग में नहीं हैं। यूको बैंक में 758, कोटक महिंद्रा बैंक में 582, आईडीबीआई बैंक में 482 और इंडियन ओवरसीज बैंक में 410 खाते निष्क्रिय पाए गए। एक्सिस बैंक में 232, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 296, आईसीआईसीआई बैंक में 38, पंजाब एंड सिंध बैंक में सात और यस बैंक में आठ खाते जीरो बैलेंस हैं।
खाते निष्क्रिय तो नहीं मिलेंगी सुविधाएं
बैंकिंग नियमों के अनुसार यदि किसी खाते में लगातार दो वर्षों तक कोई लेनदेन नहीं होता, तो उसे निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया जाता है। ऐसे खातों के रखरखाव पर बैंकों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है। वहीं खाताधारक दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधाओं से भी वंचित हो जाते हैं। बैंक अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश खातों की री-केवाईसी भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इससे खातों को दोबारा सक्रिय करने में दिक्कतें आ रही हैं।
लंबे समय तक खातों में लेनदेन न होने से वे निष्क्रिय हो जाते हैं। ऐसे खातों की निगरानी बढ़ाई जा रही है और खाताधारकों को नियमित उपयोग तथा री-केवाईसी के लिए जागरूक किया जा रहा है। - पीके सिंह, डीजीएम
इसलिए निष्क्रिय हो रहे जनधन खाते---
सिर्फ सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए खाते खुलना
नियमित आय और बचत का अभाव
बैंकिंग जागरूकता की कमी
री-केवाईसी न होना
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की दूरी
खाते निष्क्रिय होने पर क्या नुकसान
डीबीटी का लाभ रुक सकता है
दुर्घटना बीमा सुविधा प्रभावित
ओवरड्राफ्ट सुविधा बंद
बैंकिंग रिकॉर्ड कमजोर होने का खतरा