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Jhansi: भोजला मंडी में बारदाना खत्म, चार दिनों से ठप पड़ी गेहूं की खरीद, किसानों पर पड़ रहा भाड़े का बोझ
Sat, 18 Apr 2026 01:04 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:04 PM IST
सार
भोजला मंडी में दो कांटोंं पर खरीद हो रही है लेकिन एक क्रय केंद्र पर बारदाना खत्म हो गया है। किसानों का कहना है कि उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रतिदिन 1500 रुपये के हिसाब से किराया चुकाना पड़ रहा है। साथ ही भोजन पर भी खर्चा हो रहा है।
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भोजला मंडी में बारदाना न होने से नहीं हो पा रही गेहूं की खरीद।
- फोटो : संवाद
विस्तार
बारदाना न होने से भोजला मंडी में एक क्रय केंद्र पर गेहूं की खरीद चार दिनों से ठप पड़ी है। किसानों को गेहूं की तौल के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया चुकाना भारी पड़ रहा है।
66 केंद्रों को गेहूं खरीद के लिए 30 मार्च से खोल दिया गया था लेकिन पांच-छह अप्रैल के बाद ही खरीद शुरू हुई। धीरे-धीरे किसान गेहूं लेकर केंद्रों पर पहुंचने लगे। भोजला मंडी में दो कांटोंं पर खरीद हो रही है लेकिन एक क्रय केंद्र पर बारदाना खत्म हो गया है। ऐसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपनी उपज लेकर पहुंचे किसान चार दिन से तौल का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी उन्हें बारदाना एक-दो घंटे में उपलब्ध कराने की जानकारी देकर भ्रमित कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रतिदिन 1500 रुपये के हिसाब से किराया चुकाना पड़ रहा है। दिन-रात मंडी में रुकने के कारण भोजन पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
बीमार मां का कराना था इलाज, इंतजार में गई जान
बड़ागांव ब्लॉक के लिधौरा के रहने वाले रामकुमार राजपूत ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपनी उपज लेकर चार दिन पहले भोजला मंडी पहुंचे थे। वह उपज बेचकर अपनी मां का इलाज कराने की आस लगाए थे लेकिन इस पर पानी फिर गया। किसान की मां की हालत लगातार खराब होती रही। शुक्रवार की सुबह उसे मां के गुजर जाने की सूचना मिली तो वह बदहवास होकर अपनी उपज नीलामी चबूतरे पर दूसरे किसानों के भरोसे छोड़कर चला गया।
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पालर का कांटा बंद
पालर में खरीद के लिए कांटा लगा है, लेकिन बारदाने की कमी के कारण अब तक खरीद शुरू नहीं हुई। यही कारण है कि किसान अपनी उपज लेकर भोजला मंडी पहुंच रहे हैं पर यहां भी स्थिति ठीक नहीं है।
सकरार व मऊरानीपुर के कांटे बंद
भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि मऊरानीपुर के चुरारा और सकरार में भी खरीद ठप है। किसान अपनी उपज लेकर भटक रहे हैं। कई केंद्रों पर बारदाना भी नहीं है।
इनका यह है कहना
पांच दिन से गेहूं के बोरे पर दिन-रात काट रहे हैं। रोज इसी का इंतजार रहता है कि कब खरीद होगी। बारदाना न होने से किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। - विकास यादव, छपरा
पालर का कांटा बंद होने से वह उपज इसी उम्मीद से भोजला मंडी लेकर आए थे कि यहां बेच सकेंगे लेकिन मालूम नहीं था कि बारदाने के चक्कर में यहां भी इंतजार करना होगा। - कृष्ण कुमार यादव, पालर
अधिकारियों को बारदाने के कारण गेहूं की तौल न होने की शिकायत की थी। अधिकारी कुछ घंटों में क्रय केंद्र पर बारदाना उपलब्ध कराने की बात कहकर चुप हो जा रहे। - सज्जन सिंह, बचावली
चार दिन का इंतजार जेब पर भारी पड़ रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का भाड़ा रोजाना 1500 रुपये के हिसाब से चुकाना पड़ रहा है। रिषभ, बरगढ़
दो दिन पहले डीएम को पत्र देकर भोजला मंडी के अलावा अन्य केंद्र पर बारदाना न होने की जानकारी दी थी। उन्होंने क्रय केंद्र पर बारदाना उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। - अविनाश भार्गव, किसान नेता
बारदाने की कोई समस्या नहीं है। सभी केंद्रों पर उपलब्ध है। जहां कमी की सूचना मिलती है, वहां बारदाना पहुंचाया जा रहा है। - संतोष पटेल, खाद्य विपणन अधिकारी
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66 केंद्रों को गेहूं खरीद के लिए 30 मार्च से खोल दिया गया था लेकिन पांच-छह अप्रैल के बाद ही खरीद शुरू हुई। धीरे-धीरे किसान गेहूं लेकर केंद्रों पर पहुंचने लगे। भोजला मंडी में दो कांटोंं पर खरीद हो रही है लेकिन एक क्रय केंद्र पर बारदाना खत्म हो गया है। ऐसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपनी उपज लेकर पहुंचे किसान चार दिन से तौल का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी उन्हें बारदाना एक-दो घंटे में उपलब्ध कराने की जानकारी देकर भ्रमित कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रतिदिन 1500 रुपये के हिसाब से किराया चुकाना पड़ रहा है। दिन-रात मंडी में रुकने के कारण भोजन पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
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बीमार मां का कराना था इलाज, इंतजार में गई जान
बड़ागांव ब्लॉक के लिधौरा के रहने वाले रामकुमार राजपूत ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपनी उपज लेकर चार दिन पहले भोजला मंडी पहुंचे थे। वह उपज बेचकर अपनी मां का इलाज कराने की आस लगाए थे लेकिन इस पर पानी फिर गया। किसान की मां की हालत लगातार खराब होती रही। शुक्रवार की सुबह उसे मां के गुजर जाने की सूचना मिली तो वह बदहवास होकर अपनी उपज नीलामी चबूतरे पर दूसरे किसानों के भरोसे छोड़कर चला गया।
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पालर का कांटा बंद
पालर में खरीद के लिए कांटा लगा है, लेकिन बारदाने की कमी के कारण अब तक खरीद शुरू नहीं हुई। यही कारण है कि किसान अपनी उपज लेकर भोजला मंडी पहुंच रहे हैं पर यहां भी स्थिति ठीक नहीं है।
सकरार व मऊरानीपुर के कांटे बंद
भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने बताया कि मऊरानीपुर के चुरारा और सकरार में भी खरीद ठप है। किसान अपनी उपज लेकर भटक रहे हैं। कई केंद्रों पर बारदाना भी नहीं है।
इनका यह है कहना
पांच दिन से गेहूं के बोरे पर दिन-रात काट रहे हैं। रोज इसी का इंतजार रहता है कि कब खरीद होगी। बारदाना न होने से किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। - विकास यादव, छपरा
पालर का कांटा बंद होने से वह उपज इसी उम्मीद से भोजला मंडी लेकर आए थे कि यहां बेच सकेंगे लेकिन मालूम नहीं था कि बारदाने के चक्कर में यहां भी इंतजार करना होगा। - कृष्ण कुमार यादव, पालर
अधिकारियों को बारदाने के कारण गेहूं की तौल न होने की शिकायत की थी। अधिकारी कुछ घंटों में क्रय केंद्र पर बारदाना उपलब्ध कराने की बात कहकर चुप हो जा रहे। - सज्जन सिंह, बचावली
चार दिन का इंतजार जेब पर भारी पड़ रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली का भाड़ा रोजाना 1500 रुपये के हिसाब से चुकाना पड़ रहा है। रिषभ, बरगढ़
दो दिन पहले डीएम को पत्र देकर भोजला मंडी के अलावा अन्य केंद्र पर बारदाना न होने की जानकारी दी थी। उन्होंने क्रय केंद्र पर बारदाना उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। - अविनाश भार्गव, किसान नेता
बारदाने की कोई समस्या नहीं है। सभी केंद्रों पर उपलब्ध है। जहां कमी की सूचना मिलती है, वहां बारदाना पहुंचाया जा रहा है। - संतोष पटेल, खाद्य विपणन अधिकारी