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Jhansi News: मौसम में उतार-चढ़ाव से बढ़े सांस के मरीज
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झांसी। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है।
पिछले चार दिनों से रोजाना औसतन 50 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या प्रतिदिन 10 से 12 के बीच थी। अस्थमा, सीओपीडी और एलर्जी के मरीज खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न और घरघराहट से जूझ रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि ठंडी हवा, धूल-मिट्टी और परागकण सांस की नलियों में सूजन बढ़ाते हैं। वायरल संक्रमण और वायु प्रदूषण भी मरीजों की स्थिति बिगाड़ते हैं। उन्होंने मरीजों को नियमित उपचार और चिकित्सक की सलाह पर इनहेलर का उपयोग जारी रखने की सलाह दी। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा या इनहेलर बंद नहीं करना चाहिए।
इन सावधानियों से रखें बीमारी नियंत्रित
चिकित्सक के निर्देशानुसार दवाओं और इनहेलर का नियमित इस्तेमाल करें।
धूम्रपान और धुएं के संपर्क से बचें।
धूल, धुएं और वायु प्रदूषण से यथासंभव दूर रहें।
संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यायाम करें और संतुलित आहार लें।
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पिछले चार दिनों से रोजाना औसतन 50 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या प्रतिदिन 10 से 12 के बीच थी। अस्थमा, सीओपीडी और एलर्जी के मरीज खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न और घरघराहट से जूझ रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि ठंडी हवा, धूल-मिट्टी और परागकण सांस की नलियों में सूजन बढ़ाते हैं। वायरल संक्रमण और वायु प्रदूषण भी मरीजों की स्थिति बिगाड़ते हैं। उन्होंने मरीजों को नियमित उपचार और चिकित्सक की सलाह पर इनहेलर का उपयोग जारी रखने की सलाह दी। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा या इनहेलर बंद नहीं करना चाहिए।
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इन सावधानियों से रखें बीमारी नियंत्रित
चिकित्सक के निर्देशानुसार दवाओं और इनहेलर का नियमित इस्तेमाल करें।
धूम्रपान और धुएं के संपर्क से बचें।
धूल, धुएं और वायु प्रदूषण से यथासंभव दूर रहें।
संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यायाम करें और संतुलित आहार लें।