फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Jhansi: Groundnut cultivation area in the district has increased by up to 80%

Jhansi: जनपद में 80 फीसदी तक बढ़ा मूंगफली का रकवा, वैज्ञानिक तकनीक से उपज बढ़ाने पर फोकस

Sat, 27 Jun 2026 02:54 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 27 Jun 2026 02:54 PM IST
सार

मूंगफली का रकबा 1.38 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2.48 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। रकबा बढ़ने के साथ अब पूरी कवायद उत्पादन, दानों की गुणवत्ता और तेल की मात्रा बढ़ाने पर केंद्रित है।

विज्ञापन
Jhansi: Groundnut cultivation area in the district has increased by up to 80%
मूंगफली फसल। - फोटो : संवाद

विस्तार

खरीफ सीजन की मूंगफली की बुआई का समय शुरू हो गया है। इस बार जनपद में मूंगफली खेती का रकबे में लगभग 80 फीसदी की वृद्धि की गई है। मूंगफली का रकबा 1.38 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2.48 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। रकबा बढ़ने के साथ अब पूरी कवायद उत्पादन, दानों की गुणवत्ता और तेल की मात्रा बढ़ाने पर केंद्रित है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से मूंगफली की खेती को करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक बताई हैं, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय भी बढ़ाने में सहायक होगी।
विज्ञापन


रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि जनपद की स्थिति के मुताबिक टीएजी-73, टीजी-24ए, कादिरी लेपाक्षी, जीजी-36, छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे मूंगफली और बीआरआई-12 उच्च स्तर की उत्पादक किस्में है। यह किस्में कम पानी मे भी 11 से 14 क्विंटल तक पैदावार देती हैं। इन किस्मों मे वर्षा की कमी की स्थिति में पुष्पन, पेगिंग और फली के विकसित होने के समय सिंचाई बहुत जरूरी और लाभकारी होती है।
विज्ञापन


बताया कि खरीफ मूंगफली की सफल खेती के लिए बुआई से पहले बीज को उपचारित करें। राइजोबियम कल्चर का उपयोग करने पर नत्रजन स्थिरीकरण बढ़ने के साथ कॉलर रॉट, जड़ सड़न और दीमक आदि समस्याओं पर भी नियंत्रण रहता है। डॉ. तिवारी ने बताया कि बुवाई के 30 से 45 दिन के बीच निराई-गुड़ाई करने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और पौधे को विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती है। इस प्रकार जड़ें आसानी से मिट्टी में प्रवेश करके फलियों का विकास करते हैं। मूंगफली के लिए हल्की से मध्यम दोमट, भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी लाभकारी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिला कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि जिले में इस वर्ष मूंगफली का रकबा 1.38 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2.48 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। बढ़े हुए रकबे के साथ वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के प्रयोग से इस बार उत्पादन और गुणवत्ता, दोनों में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed