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Jhansi: 19 शहरों में फर्जी नाम से जीएसटी पंजीकरण कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, लाइसेंस निरस्त करके शासन को भेजी रिपोर्ट

Wed, 06 Jul 2022 10:00 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 06 Jul 2022 10:00 PM IST
सार

जीएसटी अफसरों का कहना है करोड़ों रुपये के आईटीसी में खेल करने की खातिर यह फर्म बनाई गई थीं। इनका भंडाफोड़ होने के साथ ही सभी के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के साथ ही इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है।

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Jhansi Gang busted for GST registration in 19 cities under fake name revoked license and sent report to the government
जीएसटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएसटी में फर्जी नाम, पते पर पंजीकरण कराकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हड़पने को बनाई 19 फर्जी फर्म का भंडाफोड़ हो गया। यह सभी फर्म देश के बड़े-बड़े शहरों में फर्जी नाम और पते के आधार पर बनवाई गई थीं। झांसी में भी एक फर्म पंजीकृत थी।

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जीएसटी अफसरों का कहना है करोड़ों रुपये के आईटीसी में खेल करने की खातिर यह फर्म बनाई गई थीं। इनका भंडाफोड़ होने के साथ ही सभी के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के साथ ही इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है।
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जीएसटी अफसरों के मुताबिक, अप्रैल से मई माह के बीच फर्जी नाम, पता, पैनकार्ड एवं मेल आईडी का इस्तेमाल करके देश के 19 अलग-अलग शहरों में जीएसटी पंजीकरण कराया गया। इनमें झांसी समेत नई दिल्ली, नोएडा, कानपुर, लखनऊ, फरीदाबाद, गुड़गांव, जयपुर, फरीदाबाद, कर्नाटक एवं हरियाणा के जनपद शामिल थे। पंजीकरण कराने के इस खेल में एक गिरोह शामिल था।

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उन्होंने बताया कि गिरोह ने सभी फर्म को रजिर्स्टड कराने के लिए एक तरीके से कागज बनवाए। सभी में दक्षिणाचंल विद्युत बोर्ड के विद्युत बिल समेत चाइनीज नाम के ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया लेकिन, सभी में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल हुआ था। गड़बड़ी की आशंका पर जब आईपी एड्रेस के जरिए पड़ताल हुई तब फर्जीवाड़ा उजागार हो गया।

जीएसटी अफसरों ने मुताबिक यह फर्जी फर्म इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने की खातिर बनाई गई थीं। इन सभी का पंजीकरण निरस्त करने के साथ इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

यह होता है आइटीसी

व्यापारी को माल खरीदने के बाद इस टैक्स चुकाना होता है। इसके बाद जब व्यापारी यह माल बेचता है तब उसे कुल कीमत पर टैक्स देना होता है। इस तरह पहले माल खरीदने के बाद जितना टैक्स उसने चुकाया होता है वह उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट हो जाती है। दूसरी बार में माल बेचने पर जितना टैक्स चुकाना होता है वह इनपुट टैक्स क्रेडिट से घटा दिया जाता है। यही राशि उसे टैक्स के तौर पर महकमे में जमा करनी होती है। खरीद रसीद न दिखाने के बाद फर्जी फर्म के माध्यम से कई चेन में माल बेचकर व्यापारी करोड़ों रुपये के टैक्स बचा लेते हैं।

पड़ताल करने पर फर्जी नाम-पते पर 19 शहरों में जीएसटी लाइसेंस लेने की बात मालूम चली है। फर्जीवाड़ा उजागर होने पर इन सभी फर्मों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए। इसके बारे में शासन को भी अवगत कराया गया है।
- भानु प्रकाश मिश्रा, अपर आयुक्त (ग्रेड वन)

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