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झांसी में किसानों पर बार-बार कुदरत का प्रहार... साल भर में तीसरी मार
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झांसी। जिले के किसानों पर कुदरत तल्ख रुख अख्तियार किए हुए है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक साल में तीन बार किसान दैवी आपदा का शिकार हो चुके हैं। कभी ओलावृष्टि से फसलें खराब हुईं तो कभी मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा। यह क्रम लगातार बरकरार है।
क्षेत्र के किसानों और दैवी आपदाओं का हमेशा से ही चोली-दामन का साथ रहा है। यही वजह है कि देश में बुंदेलखंड की पहचान सूखाग्रस्त इलाके के रूप में होती है। लेकिन, अब ओलावृष्टि और बारिश किसानों पर कहर ढा रही है। साल 2021 के खरीफ सीजन में अगस्त माह में हुई भारी बारिश से जनपद के एक लाख ग्यारह हजार बासठ किसानों की तिल, मूंग और उर्द की फसलें खराब हो गईं थीं। मूंगफली को भी खासा नुकसान पहुंचा था। इस मार से किसान उबर भी नहीं पाए थे कि रबी सीजन में जनवरी 2022 में ओलावृष्टि ने कहर ढा दिया था। खासतौर पर मऊरानीपुर क्षेत्र के छब्बीस सौ किसानों की गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी। जबकि, इस खरीफ सीजन में पिछले सप्ताह लगातार तीन दिनों तक हुई भारी बारिश ने मूंग, उर्द व तिल की फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में 90 प्रतिशत से अधिक के नुकसान का अनुमान जताया गया है। इससे जनपद के लगभग डेढ़ लाख किसानों को प्रभावित माना जा रहा है।
39 करोड़ 43 लाख मुआवजा बांटा
झांसी। पिछले खरीफ सीजन में बारिश की वजह से तिल, उर्द और मूंग की फसल खराब होने पर प्रभावित किसानों को अड़तीस करोड़ चार लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। जबकि, इसके बाद रबी सीजन में ओलावृष्टि से फसलें खराब होने पर एक करोड़ 39 लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। चालू खरीफ सीजन में बारिश से फसल खराब होने पर मुआवजा देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
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32 हजार किसानों के अटके हैं 24 करोड़
झांसी। जनपद के 32,727 किसानों की 24 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि अटकी हुई है। दरअसल, साल 2019 में खरीफ सीजन में समय पर बारिश न होने और बाद में भारी बारिश होने की वजह से फसलें खराब हो गईं थीं। जिले के 2.95 लाख किसानों में से दो लाख ने प्रधानमंत्री फसल बीमा करा रखा था। लेकिन, इनमें से 32,727 किसानों का डाटा बैंक समय रहते पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पाए थे, जिससे किसान बीमा राशि से वंचित रह गए थे। इस पर प्रशासन की ओर से बैंकों की रिकवरी जारी कर दी गई थी, जिसके विरोध में बैंक कोर्ट पहुंच गए थे। मामला कोर्ट में विचाराधीन बना हुआ है।
पिछले खरीफ व रबी सीजन में बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुईं फसलों का प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। इस खरीफ सीजन में बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे जारी है। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
- राम अक्षयवर चौहान, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
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क्षेत्र के किसानों और दैवी आपदाओं का हमेशा से ही चोली-दामन का साथ रहा है। यही वजह है कि देश में बुंदेलखंड की पहचान सूखाग्रस्त इलाके के रूप में होती है। लेकिन, अब ओलावृष्टि और बारिश किसानों पर कहर ढा रही है। साल 2021 के खरीफ सीजन में अगस्त माह में हुई भारी बारिश से जनपद के एक लाख ग्यारह हजार बासठ किसानों की तिल, मूंग और उर्द की फसलें खराब हो गईं थीं। मूंगफली को भी खासा नुकसान पहुंचा था। इस मार से किसान उबर भी नहीं पाए थे कि रबी सीजन में जनवरी 2022 में ओलावृष्टि ने कहर ढा दिया था। खासतौर पर मऊरानीपुर क्षेत्र के छब्बीस सौ किसानों की गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी। जबकि, इस खरीफ सीजन में पिछले सप्ताह लगातार तीन दिनों तक हुई भारी बारिश ने मूंग, उर्द व तिल की फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में 90 प्रतिशत से अधिक के नुकसान का अनुमान जताया गया है। इससे जनपद के लगभग डेढ़ लाख किसानों को प्रभावित माना जा रहा है।
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39 करोड़ 43 लाख मुआवजा बांटा
झांसी। पिछले खरीफ सीजन में बारिश की वजह से तिल, उर्द और मूंग की फसल खराब होने पर प्रभावित किसानों को अड़तीस करोड़ चार लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। जबकि, इसके बाद रबी सीजन में ओलावृष्टि से फसलें खराब होने पर एक करोड़ 39 लाख रुपये मुआवजा दिया गया था। चालू खरीफ सीजन में बारिश से फसल खराब होने पर मुआवजा देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
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32 हजार किसानों के अटके हैं 24 करोड़
झांसी। जनपद के 32,727 किसानों की 24 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि अटकी हुई है। दरअसल, साल 2019 में खरीफ सीजन में समय पर बारिश न होने और बाद में भारी बारिश होने की वजह से फसलें खराब हो गईं थीं। जिले के 2.95 लाख किसानों में से दो लाख ने प्रधानमंत्री फसल बीमा करा रखा था। लेकिन, इनमें से 32,727 किसानों का डाटा बैंक समय रहते पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पाए थे, जिससे किसान बीमा राशि से वंचित रह गए थे। इस पर प्रशासन की ओर से बैंकों की रिकवरी जारी कर दी गई थी, जिसके विरोध में बैंक कोर्ट पहुंच गए थे। मामला कोर्ट में विचाराधीन बना हुआ है।
पिछले खरीफ व रबी सीजन में बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुईं फसलों का प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। इस खरीफ सीजन में बारिश से खराब हुई फसलों का सर्वे जारी है। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
- राम अक्षयवर चौहान, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)