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झांसी- हर महीने मिलते 15 शव पर नहीं आ पाते एमबीबीएस छात्रों के काम

Tue, 23 Feb 2021 01:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 01:04 AM IST
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jhansi-evry month found 15 dedbody, not use for medical students
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों को चीर-फाड़ के लिए शव नहीं मिल पाने से शरीर रचना की बारीकियां सीखने में दिक्कतों का समाना करना पड़ा रहा है। वहीं, जिले में हर महीने 15 अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम किया जाता है मगर यह एमबीबीएस छात्रों के काम नहीं आ पाते हैं। क्योंकि पीएम किया हुआ शव उनके उपयोग का नहीं रह जाता है।
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों को प्रथम वर्ष में ही कैडेवर एनाटमी विषय पढ़ाया जाता है। इस दौरान उन्हें शव विच्छेदन कराया जाता है। मेडिकल स्टूडेंट्स डेड बॉडी का हाथ, पैर एब्डोमन आदि का एक-एक कर चरणबद्ध तरीके से ऑपरेशन करते हैं। ऑपरेशन कर मेडिकल छात्र पूरी तरह बॉडी से जुड़े अंगों और नसों, हड्डियों, शरीर के अंदर के अंग आदि के बारे में जान जाते हैं, जो कि आगे चलकर उन्हें अच्छा चिकित्सक बनाने में काफी अहम साबित होता है।
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मगर डेडबॉडी की कमी के चलते मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2017 के बाद से मृत शरीर मिल ही नहीं सका है। ऐसे में पिछले तीन बैच डेड बॉडी का बिना ऑपरेशन किए ही पास हो गए। हालांकि, चिकित्सा शिक्षकों ने मेडिकल स्टूडेंट्स को जार में प्रिजर्व किए हुए रखे बॉडी के पुराने अंगों से शारीरिक अंगों के बारे में जानकारी दी। वहीं, बताया गया कि हर महीने जिले में 15 अज्ञात शव मिलते हैं। मगर पोस्टमार्टम कराने के नियम की वजह से यह उनके काम नहीं आ पाते हैं। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस शव का अंतिम संस्कार भी कराती है।
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हर साल 15 शवों की जरूरत
नियमानुसार एक टेबल पर 10 छात्रों पर एक बॉडी होनी चाहिए। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में 150 छात्र-छात्राओं का बैच है, ऐसे में कुल मिलाकर 15 डेडबॉडी हर साल उपलब्ध रहनी चाहिए। जो कि पिछले काफी समय से नहीं मिल पा रही है।
डोनेट शव ही एमबीबीएस छात्रों के उपयोग में आता है। पोस्टमार्टम के बाद उसका कोई उपयोग नहीं रह जाता। ऐसे में समाज में देहदान को बढ़ावा मिलना चाहिए। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।

जो भी अज्ञात शव मिलता है, नियमानुसार उसका पोस्टमार्टम कराया जाता है। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार भी पुलिस कराती है। ऐसे में अज्ञात शव पुलिस की तरफ से नहीं दिया जा सकता। - विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी।
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