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झांसी में हर माह जन्म ले रहे 50 टेस्ट ट्यूब बेबी

Tue, 23 Mar 2021 07:58 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 07:58 PM IST
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Jhansi every months born test tube babay
झांसी। झांसी में टेस्ट ट्यूब बेबी चलन बढ़ गया है। हर महीने जिले में लगभग 50 टेस्ट ट्यूब बेबी हो रहे हैं। इनमें से कुछ झांसी तो कुछ बाहर इलाज कराकर जन्म लेते हैं। ऐसे में सालाना 600 दंपतियों को संतान की प्राप्ति हो रही है। आईवीएफ कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक की मदद से नि:संतान दंपती भी संतान सुख पा रहे हैं। आईवीएफ से 50 साल से अधिक उम्र तक की महिलाएं और 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को संतान सुख मिलता है।
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निसंतानता इन दिनों महिला-पुरुषों में बड़ी समस्या बनती जा रही है मगर आधुनिक चिकित्सा तकनीकों ने इलाज के कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जो उम्मीद की किरण जगाते हैं। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) भी ऐसी ही तकनीक है। इसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को लैबोरेट्री में एकसाथ रखकर फर्टिलाइज करने के बाद महिला के गर्भ में स्थानांतरित कर देते हैं। इस प्रक्रिया को एंब्रियो कल्चर व टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहते हैं। 70-80 फीसदी नि:संतान दंपती का इलाज दवाओं और 20-30 फीसदी मरीजों को आईवीएफ की जरूरत पड़ती है।
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आईवीएफ से 50 साल से अधिक उम्र तक की महिलाएं और 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को संतान सुख मिलता है। मगर सही उम्र में आईवीएफ कराने से जल्द गर्भधारण की संभावना रहती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, प्रजनन शक्ति कमजोर पड़ने लगती है। पुरुषों में भी स्पर्म काउंट कम होने लगते हैं। इससे गर्भधारण होने में समस्या के साथ कई परेशानियां होती हैं। अधिक उम्र होने पर मल्टीपल बर्थ, गर्भपात और समयपूर्व प्रसव की आशंका रहती है।
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ये होते कारण
- महिलाओं की अधिक उम्र में शादी।
- प्रोफेशनल लाइफ के चलते देरी से फैमिली प्लानिंग।
- खानपान पर ध्यान न देना।
- हाईजीन का अभाव।
- नौकरी का तनाव।
- जागरूकता की कमी।
- पैल्विक इंफ्लेमेट्री डिजीज।
- पुरुषों में स्पर्म डिफेक्ट, काउंट कम होना।
इन्हें पड़ती जरूरत
यदि नियमित संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है तो इसे नि:संतानता की श्रेणी में रखा जाता है। मगर जरूरी नहीं है कि सबको आईवीएफ कराना पड़े। इसके लिए पहले जरूरी जांचें होती हैं। जिन महिलाओं की एक फैलोपियन ट्यबू ब्लॉक है और दूसरी खुली है, माहवारी अनियमित है, अंडे नहीं बनते हैं या फिर मासिक चक्र बंद हो गया है, उन्हें आईवीएफ की जरूरत पड़ती है। मेनोपॉज के बाद और महिलाओं की नसबंदी हो चुकी है या फिर पुरुष का स्पर्म काउंट बहुत कम या कमजोर है, वे भी आईवीएफ के लिए योजना बना सकते हैं।

हर महीने मेरे ही हॉस्पिटल में 20 टेस्ट ट्यूब बेबी हो रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां होने के कारण कई बार वो काफी देर से इलाज के लिए आते हैं। आईवीएफ तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है। इस तकनीक ने कई दंपतियों के जीवन में खुशी लाने का काम किया है। ऐसे में समय रहते इस तकनीक से संतान प्राप्ति का लाभ ले सकते हैं। - डॉ. प्रीति गुप्ता, गायनिकोलॉजिस्ट।
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