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Jhansi: जनपद की 50 से कम पशुओं की आठ गोशालाएं बंद, पास की स्थायी या अस्थायी में किया स्थानांतरित

Sat, 27 Jun 2026 06:39 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 27 Jun 2026 06:39 PM IST
सार

इन गोशालाओं में मौजूद पशुओं को पास की स्थायी या अस्थायी गोशालाओं में स्थानांतरित किया गया। इस कदम से सरकार को प्रति 25 से 30 हजार रुपये की बचत होने की उम्मीद है।

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Jhansi: Eight cow shelters in the district housing fewer than 50 cattle have been closed.
गोशाला में चारा खाते मवेशी

विस्तार

जनपद में 50 से कम पशुओं वाली आठ गोशालाओं को बंद कर दिया गया है। इन गोशालाओं में मौजूद पशुओं को पास की स्थायी या अस्थायी गोशालाओं में स्थानांतरित किया गया। इस कदम से सरकार को प्रति 25 से 30 हजार रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
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सरकारी आदेशों के बाद, पशुपालन विभाग ने सभी गोशालाओं का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण में पता चला कि जनपद में आठ गोशालाएं हैं जहां मवेशियों की संख्या 50 से कम है। कुछ दिन पहले सरकार ने निर्देश जारी किए गए थे कि जिन गोशालाओं में पशुओं की संख्या न्यूनतम मानक से कम है, उन्हें बंद कर दिया जाए और पशुओं को पास के आश्रय स्थलों में भेज दिया जाए। पशुपालन विभाग द्वारा जिलावार जांच करने पर ऐसी सात गोशालाओं की पहचान की गई। विभाग का मानना है कि इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा बल्कि सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी कम होगा। प्रत्येक आश्रय स्थल में जानवरों के लिए भोजन और पानी के अलावा, ग्राम पंचायतों द्वारा देखभाल करने वालों के मानदेय और अन्य विविध खर्चों जैसे व्यय के लिए प्रति माह 10 से 12 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था।
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पहले चरण में 50 से कम मवेशियों वाले आश्रय स्थलों की पहचान करने और उन्हें बंद करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। दूसरे चरण में 100 से कम मवेशियों वाले आश्रय स्थलों को भी पास की सुविधाओं में मिला दिया जाएगा। इससे कम आबादी वाले आश्रय स्थलों में कर्मचारियों के मानदेय, भोजन, पानी और रखरखाव पर होने वाले अनावश्यक खर्च को समाप्त होंगे। इसका कारण आस-पास की उन गोशालाओं में सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है जहां जानवरों को स्थानांतरित किया जा रहा है।
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इस संबंध में सीवीओ डॉ. एसके सिंह ने बताया कि शासनादेश मिलने के बाद मवेशियों को स्थानांतरित किया गया है। इनमें इसमें बामौर के सुट्टा, सैगुवां और तेवरी, गुरसराय के चतुरताई, टहरौली के ताई तेंदुआ और बड़ागांव में तीन पौरा, परसर व जौरी शामिल हैं। अब जनपद में 264 गोशालाएं हैं और इनमें करीब 42,338 गोवंश मौजूद हैं।
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