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झांसी: घूसखोर सीजीएसटी अफसरों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस, जांच में करोड़ों की संपत्तियों का हुआ खुलासा
Wed, 25 Mar 2026 07:33 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Wed, 25 Mar 2026 07:33 AM IST
सार
इन अफसरों को दो कारोबारियों के साथ बीते दिसंबर माह में सीबीआई ने लाखों रुपये की नगदी के साथ गिरफ्तार किया था।
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सीजीएसटी कार्यालय, झांसी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
झांसी में कारोबारियों से लाखों रुपये की घूस लेने वाले सेंट्रल जीएसटी के निरीक्षक अजय शर्मा और अनिल कुमार तिवारी के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस भी दर्ज कर लिया है। दोनों का उप आयुक्त प्रभा भंडारी और दो कारोबारियों के साथ बीते दिसंबर माह में सीबीआई ने लाखों रुपये की नगदी के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में दोनों निरीक्षकों के पास उनकी वैध आय से तीन गुना अधिक कीमत की संपत्तियों का पता चला है।
सीबीआई द्वारा घूसखोरी के इस रैकेट के खुलासे के बाद दोनों अधीक्षकों की संपत्तियों की जांच की गई, जिसमें सामने आया कि अजय शर्मा ने 1 जनवरी 2022 से 5 जनवरी 2026 की अवधि के दौरान अपने और परिजनों के नाम पर कुल 4.57 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अर्जित किया, जबकि इस अवधि में उनकी सभी वैध स्रोतों से कुल 1.11 करोड़ रुपये आय ही हुई थी। इस तरह उन्होंने अपनी वैध आय से तीन गुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की, जो गैरकानूनी है। इसी तरह अनिल कुमार तिवारी ने भी अपनी वैध आय से दोगुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की। उन्होंने 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2025 अपनी आय के सभी वैध स्रोतों से कुल 57.95 लाख रुपये अर्जित किए, जबकि चल-अचल संपत्तियों को अर्जित करने एवं भरण पोषण में करीब 2 करोड़ रुपये व्यय किए।
उप आयुक्त पर भी होगा केस
सीबीआई घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार उप आयुक्त प्रभा भंडारी के खिलाफ भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ भी जल्द आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया जाएगा। बता दें कि तीनों अफसरों ने दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के बाद मामला रफा-दफा करने के लिए 1.50 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसका सुराग मिलने पर सीबीआई ने तीनों अफसरों के साथ एक कारोबारी और बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एक करोड़ रुपये से अधिक की नगदी भी बरामद की गई थी।
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सीबीआई द्वारा घूसखोरी के इस रैकेट के खुलासे के बाद दोनों अधीक्षकों की संपत्तियों की जांच की गई, जिसमें सामने आया कि अजय शर्मा ने 1 जनवरी 2022 से 5 जनवरी 2026 की अवधि के दौरान अपने और परिजनों के नाम पर कुल 4.57 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अर्जित किया, जबकि इस अवधि में उनकी सभी वैध स्रोतों से कुल 1.11 करोड़ रुपये आय ही हुई थी। इस तरह उन्होंने अपनी वैध आय से तीन गुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की, जो गैरकानूनी है। इसी तरह अनिल कुमार तिवारी ने भी अपनी वैध आय से दोगुना अधिक रकम संपत्तियों को अर्जित करने में व्यय की। उन्होंने 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2025 अपनी आय के सभी वैध स्रोतों से कुल 57.95 लाख रुपये अर्जित किए, जबकि चल-अचल संपत्तियों को अर्जित करने एवं भरण पोषण में करीब 2 करोड़ रुपये व्यय किए।
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उप आयुक्त पर भी होगा केस
सीबीआई घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार उप आयुक्त प्रभा भंडारी के खिलाफ भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ भी जल्द आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया जाएगा। बता दें कि तीनों अफसरों ने दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के बाद मामला रफा-दफा करने के लिए 1.50 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसका सुराग मिलने पर सीबीआई ने तीनों अफसरों के साथ एक कारोबारी और बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एक करोड़ रुपये से अधिक की नगदी भी बरामद की गई थी।
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