{"_id":"6986d7ba9f502bea010ec9bd","slug":"jhansi-children-are-falling-prey-to-measles-and-mumps-2026-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi: खसरा और गलसुआ की चपेट में आ रहे बच्चे, टीकाकरण का आंकड़ा संतोषजनक फिर भी आ रहे पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi: खसरा और गलसुआ की चपेट में आ रहे बच्चे, टीकाकरण का आंकड़ा संतोषजनक फिर भी आ रहे पीड़ित
Sat, 07 Feb 2026 11:42 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:42 AM IST
सार
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना औसतन तीन बच्चे खसरा पीड़ित आ रहे हैं। सप्ताह में दो बच्चों को चिंताजनक हालत में भर्ती किया जा रहा है।
विज्ञापन
टीकाकरण
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
भले ही दस्तावेजों में बच्चों के टीकाकरण का आंकड़ा संतोषजनक है फिर भी बच्चे खसरा व गलसुआ की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना औसतन तीन बच्चे खसरा पीड़ित आ रहे हैं। सप्ताह में दो बच्चों को चिंताजनक हालत में भर्ती किया जा रहा है। वहीं, गलसुआ के भी बच्चे भर्ती हो रहे हैं।
खसरा, गलसुआ व रुबेला अति संक्रमित वायरल बीमारी हैं। जरा सी लापरवाही अथवा उपचार में देरी होने पर बच्चे के लिए जानलेवा हो जाती है। खास यह है कि छींकने, खांसने अथवा संक्रमित की वस्तु को इस्तेमाल करने से भी यह फैलता है। चूंकि इसका संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए सरकार सघन टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके तहत एमआर (मीजल्स व रुबेला) या एमएमआर (मीजल्स, मम्स व रुबेला) का टीका लगता है। एमआर का पहला टीका 9 से 12 माह तथा दूसरा टीका 16 से 24 माह की उम्र में लगता है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो मऊरानीपुर ब्लॉक में सबसे कम 90.37 फीसदी व चिरगांव ब्लॉक में 91.16 फीसदी एमआर का टीकाकरण हुआ है। बाकी ब्लॉक में 95 से 100 फीसदी तक टीकाकरण का दावा है। बावजूद इसके खसरा व गलसुआ से पीड़ित बच्चे निजी संस्थान या मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना औसतन दो बच्चे खसरा (बुखार के साथ दाने) और सप्ताह में दो बच्चे गलसुआ के आ रहे हैं। सप्ताह में दो-तीन बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अब बुखार के साथ दाने निकलने पर डब्ल्यूएचओ को रिपोर्टिंग करनी होती है। बुखार के साथ दाने खसरा समेत कई संक्रमित बीमारियों में भी होते हैं। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि सप्ताह में करीब दो बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
विज्ञापन
16 से 27 फरवरी तक विशेष टीकाकरण अभियान
सरकार खसरा और रुबेला की रोकथाम के लिए 16 से 27 फरवरी तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाने जा रही है। सरकारी अस्पताल के कक्षा एक से छह तक के सभी बच्चों को एमआर (मीजल्स व रुबेला) का टीका लगेगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. रविकांत ने बताया कि अभियान की सफलता के लिए लखनऊ में बैठक बुलाई है। माइक्रो स्तर पर टीमों को लगाया जाएगा। डॉक्टरों ने बताया कि कोविड के दौरान टीकाकरण अभियान रोक दिया गया था, जिसकी वजह से काफी बच्चे वंचित रह गए थे।
ऐसे रोकें संक्रमण
डॉक्टरों के अनुसार खसरा व गलसुआ अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह खांसने-छींकने से फैलता है। संक्रमित से पर्याप्त दूरी रखें।
खसरा के रोगी मिल सकते हैं। चूंकि टीकाकरण हुआ है इसलिए घातक नहीं होगा। कोविड के दौरान टीकाकरण बंद होने की वजह से काफी बच्चे छूटे थे, जिनके टीकाकरण के लिए जल्द विशेष अभियान चलेगा। डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ
विज्ञापन
खसरा, गलसुआ व रुबेला अति संक्रमित वायरल बीमारी हैं। जरा सी लापरवाही अथवा उपचार में देरी होने पर बच्चे के लिए जानलेवा हो जाती है। खास यह है कि छींकने, खांसने अथवा संक्रमित की वस्तु को इस्तेमाल करने से भी यह फैलता है। चूंकि इसका संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए सरकार सघन टीकाकरण अभियान चला रही है। इसके तहत एमआर (मीजल्स व रुबेला) या एमएमआर (मीजल्स, मम्स व रुबेला) का टीका लगता है। एमआर का पहला टीका 9 से 12 माह तथा दूसरा टीका 16 से 24 माह की उम्र में लगता है।
विज्ञापन
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो मऊरानीपुर ब्लॉक में सबसे कम 90.37 फीसदी व चिरगांव ब्लॉक में 91.16 फीसदी एमआर का टीकाकरण हुआ है। बाकी ब्लॉक में 95 से 100 फीसदी तक टीकाकरण का दावा है। बावजूद इसके खसरा व गलसुआ से पीड़ित बच्चे निजी संस्थान या मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना औसतन दो बच्चे खसरा (बुखार के साथ दाने) और सप्ताह में दो बच्चे गलसुआ के आ रहे हैं। सप्ताह में दो-तीन बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अब बुखार के साथ दाने निकलने पर डब्ल्यूएचओ को रिपोर्टिंग करनी होती है। बुखार के साथ दाने खसरा समेत कई संक्रमित बीमारियों में भी होते हैं। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया का कहना है कि सप्ताह में करीब दो बच्चों को भर्ती किया जा रहा है।
विज्ञापन
16 से 27 फरवरी तक विशेष टीकाकरण अभियान
सरकार खसरा और रुबेला की रोकथाम के लिए 16 से 27 फरवरी तक विशेष टीकाकरण अभियान चलाने जा रही है। सरकारी अस्पताल के कक्षा एक से छह तक के सभी बच्चों को एमआर (मीजल्स व रुबेला) का टीका लगेगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. रविकांत ने बताया कि अभियान की सफलता के लिए लखनऊ में बैठक बुलाई है। माइक्रो स्तर पर टीमों को लगाया जाएगा। डॉक्टरों ने बताया कि कोविड के दौरान टीकाकरण अभियान रोक दिया गया था, जिसकी वजह से काफी बच्चे वंचित रह गए थे।
ऐसे रोकें संक्रमण
डॉक्टरों के अनुसार खसरा व गलसुआ अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह खांसने-छींकने से फैलता है। संक्रमित से पर्याप्त दूरी रखें।
खसरा के रोगी मिल सकते हैं। चूंकि टीकाकरण हुआ है इसलिए घातक नहीं होगा। कोविड के दौरान टीकाकरण बंद होने की वजह से काफी बच्चे छूटे थे, जिनके टीकाकरण के लिए जल्द विशेष अभियान चलेगा। डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ