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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Jhansi: Cancer patient's life hangs in the balance amidst conflicting reports

झांसी: हां-ना की रिपोर्टों में झूलती कैंसर मरीज की जिंदगी, सरकारी सिस्टम से परेशान टूट रहीं पत्नी की उम्मीदें

Mon, 05 Oct 2026 06:31 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Mon, 05 Oct 2026 06:31 PM IST
सार

आयुष्मान कार्ड के फर्जी होने का पता चलने के छह महीने बाद भी कैंसर पीड़ित संजय के उपचार के लिए अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। पीड़ित की हालत दिन-पर-दिन बिगड़ती जा रही है।

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विस्तार

कैंसर से जूझ रहे संजय सोनी की जिंदगी सरकारी अफसरों की ‘हां-ना’ की रिपोर्ट के बीच झूल रही है। पति को मौत से लड़ते देख पत्नी दीपा सोनी भी मदद की आस लगभग छोड़ चुकी हैं। एक शातिर ने उनसे पांच हजार रुपये लेकर फर्जी आयुष्मान कार्ड बना दिया था। अब सरकारी मदद भी नहीं मिल पा रही है।
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आंतिया तालाब गायत्री मंदिर के पास रहने वाले संजय सोनी (36) लोहामंडी में मजदूरी करते थे। 24 अक्तूबर, 2024 को जांच में उनके मुंह में कैंसर की पुष्टि हुई। निजी अस्पताल में उपचार कराने से उनकी सारी जमा पूंजी खत्म हो गई। इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा था और परिवार तंगी से घिर गया। इस बीच एक नजदीकी व्यक्ति ने मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने की उम्मीद जगाई। उसने कार्ड बनाने के नाम पर दीपा से पांच हजार रुपये ऐंठ लिए। दिसंबर, 2024 में शातिर ने संजय, दीपा और उनके दो बेटों के नाम से फर्जी आयुष्मान कार्ड सौंप दिया। 26 मार्च, 2026 को संजय की तबीयत बिगड़ने पर दीपा उन्हें मेडिकल कॉलेज ले गईं। वहां उपचार प्रक्रिया शुरू करने पर पता चला कि उनका आयुष्मान कार्ड फर्जी है और योजना का लाभ नहीं मिल सकता।
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सीएमओ कार्यालय ने पहले बताया कार्ड सही, बाद में फर्जी
दीपा ने पति के उपचार के लिए जिला प्रशासन से मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिये सरकारी मदद मांगी। इस पर प्रशासन ने उनका प्रार्थनापत्र सीएमओ कार्यालय को भेज दिया। आयुष्मान कार्ड योजना के नोडल अधिकारी ने अपनी प्रशासन को रिपोर्ट दी। उन्होंने बताया कि संजय का आयुष्मान कार्ड बना है, इसलिए सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सकता। दीपा को यह जानकारी मिली तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज में कार्ड के फर्जी होने के तथ्य दिए। इसके बाद नोडल अधिकारी ने दोबारा जांच कर रिपोर्ट दी कि आयुष्मान कार्ड संदिग्ध और फर्जी है।
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लेखपाल की रिपोर्ट और बिगड़ती हालत
दीपा की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। प्रशासन ने सरकारी मदद के लिए लेखपाल से रिपोर्ट मांगी। लेखपाल ने पहले आयुष्मान कार्ड होने की रिपोर्ट दी थी। बाद में उसने भी कार्ड को फर्जी बताया। आयुष्मान कार्ड के फर्जी होने का पता चलने के छह महीने बाद भी कैंसर पीड़ित संजय के उपचार के लिए अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। उनकी हालत दिन-पर-दिन बिगड़ती जा रही है, जिससे दीपा की उम्मीदें टूट रही हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कैंसर रोगी संजय की हालत काफी नाजुक है। उसको भर्ती कर समुचित उपचार किया जा रहा है।

फर्जीवाड़े की जांच और एफआईआर की तैयारी
आयुष्मान कार्ड के नोडल अधिकारी डॉ. केएनएम त्रिपाठी ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किसके माध्यम से यह फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाया गया। साथ ही, कितने अन्य फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, इसकी भी पड़ताल होगी। जांच पूरी होने के बाद संबंधितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाएगी।


सुलगते सवाल
01: जालसाज ने पीड़ित का फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाया, तो पता चलने के बाद शातिर को पकड़ा क्यों नहीं गया?
02: फर्जीवाड़े का पता चले हुए छह महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर पीड़ित को मदद क्यों मुहैया नहीं कराई गई?
03: आखिर जांच कब तक पूरी होगी, जबकि डॉक्टर के अनुसार मरीज की हालत काफी गंभीर है?
04: एक ही ऑफिस फर्जी आयुष्मान कार्ड को पहले सही बताता है, फिर बाद में जाली। आखिर जांच का पैमाना क्या है?
05: जिनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, उन कैंसर पीड़ितों को मुख्यमंत्री राहत कोष सहित अन्य मदों से मदद दिलाने का प्रावधान है, तो संजय सोनी को सहायता क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा रही?
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