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झांसी: ब्रेल से सशक्त हुए हाथ, की-बोर्ड पर फर्राटा भरती अंगुलियां, डीआरएम कार्यालय में काम कर रहे दृष्टिबाधित
Sun, 04 Jan 2026 09:31 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 04 Jan 2026 09:31 AM IST
सार
डीआरएम कार्यालय की अलग-अलग शाखाओं में कई दृष्टिबाधित लोग नौकरी कर रहे हैं। दफ्तर का ऐसा कोई काम नहीं, जो यह कर नहीं सकते।
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की-बोर्ड पर काम करते हुए, सांकेतिक
- फोटो : Freepic
विस्तार
लुई ब्रेल की जयंती पर विशेष
अरे हम दृष्टिबाधित हैं तो क्या हुआ? आम लोगों की तरह कंप्यूटर चलाते हैं। की-बोर्ड पर अंगुलियां फर्राटा चलती हैं। दफ्तर का ऐसा कोई काम नहीं, जो कर नहीं सकते। इतना हौंसला लुई ब्रेल की ब्रेल लिपि से पैदा हुआ है। ये कहना है डीआरएम कार्यालय में ओएस (ऑफिस सुप्रिटेंडेट) पद पर काम करने वाले दृष्टिबाधित रोहित पटेल का।
रोहित बताते हैं कि बचपन में काफी दिक्कत होती थी। हर कामकाज के लिए सहारे की जरूरत होती थी, जो दिल को चुभती थी। तब ब्रेल लिपि में पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला लिया। शुरुआती पढ़ाई करने के बाद चित्रकूट की रामभद्राचार्य हैंडीकैप्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर बीए, एमए व बीएड किया। इसके बाद रेलवे का फार्म भरा और परीक्षा पास की। डीआरएम कार्यालय में ओएस पद पर तैनाती मिली, तो ब्रेल लिपि में मॉडिफाई की-बोर्ड से कंप्यूटर चलाना सीखा। कंप्यूटर पर लिखा-पढ़ी करने के दौरान कोई गलती नहीं होती है। इसकी वजह कंप्यूटर पर जो लिखा जाता है, वह सुनाई देता है। उन्होंने बताया कि डीआरएम कार्यालय की अलग-अलग शाखाएं हैं, जिनमें कई दृष्टिबाधित नौकरी कर रहे हैं, जिनमें चित्रा चौराहा पर रहने वाले हरेंद्र मिश्रा, हंसारी में रहने वाले अमरीश, आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले जितेंद्र मौर्या आदि हैं।
दृष्टिबाधित दिव्यांग संघ का कार्यक्रम आज
लुई ब्रेल की रविवार को जयंती मनाई जाएगी। इन्हें दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि का अबिष्कार किया था। जिसकी मदद से दृष्टिबाधित लोग मुख्य धारा में जीवनयावन कर रहे हैं। इसके चलते रविवार को आवास विकास कॉलोंनी में बुंदेलखंड दृष्टिबाधित दिव्यांग संघ कार्यक्रम का आयोजन करेगा। यह जानकारी डॉ. अशोक मुस्तरिया ने दी है।
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अरे हम दृष्टिबाधित हैं तो क्या हुआ? आम लोगों की तरह कंप्यूटर चलाते हैं। की-बोर्ड पर अंगुलियां फर्राटा चलती हैं। दफ्तर का ऐसा कोई काम नहीं, जो कर नहीं सकते। इतना हौंसला लुई ब्रेल की ब्रेल लिपि से पैदा हुआ है। ये कहना है डीआरएम कार्यालय में ओएस (ऑफिस सुप्रिटेंडेट) पद पर काम करने वाले दृष्टिबाधित रोहित पटेल का।
रोहित बताते हैं कि बचपन में काफी दिक्कत होती थी। हर कामकाज के लिए सहारे की जरूरत होती थी, जो दिल को चुभती थी। तब ब्रेल लिपि में पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला लिया। शुरुआती पढ़ाई करने के बाद चित्रकूट की रामभद्राचार्य हैंडीकैप्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर बीए, एमए व बीएड किया। इसके बाद रेलवे का फार्म भरा और परीक्षा पास की। डीआरएम कार्यालय में ओएस पद पर तैनाती मिली, तो ब्रेल लिपि में मॉडिफाई की-बोर्ड से कंप्यूटर चलाना सीखा। कंप्यूटर पर लिखा-पढ़ी करने के दौरान कोई गलती नहीं होती है। इसकी वजह कंप्यूटर पर जो लिखा जाता है, वह सुनाई देता है। उन्होंने बताया कि डीआरएम कार्यालय की अलग-अलग शाखाएं हैं, जिनमें कई दृष्टिबाधित नौकरी कर रहे हैं, जिनमें चित्रा चौराहा पर रहने वाले हरेंद्र मिश्रा, हंसारी में रहने वाले अमरीश, आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले जितेंद्र मौर्या आदि हैं।
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दृष्टिबाधित दिव्यांग संघ का कार्यक्रम आज
लुई ब्रेल की रविवार को जयंती मनाई जाएगी। इन्हें दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिपि का अबिष्कार किया था। जिसकी मदद से दृष्टिबाधित लोग मुख्य धारा में जीवनयावन कर रहे हैं। इसके चलते रविवार को आवास विकास कॉलोंनी में बुंदेलखंड दृष्टिबाधित दिव्यांग संघ कार्यक्रम का आयोजन करेगा। यह जानकारी डॉ. अशोक मुस्तरिया ने दी है।
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