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झांसी : आयुर्वेदिक कॉलेज में पीजी कोर्स शुरू कराने की तैयारी
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कॉलोज में परा स्नातक कोर्स शुरू हो सकता है।
- फोटो : ???? ????
आयुर्वेदिक कॉलेज में पीजी कोर्स शुरू कराने की तैयारी
झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में परास्नातक कोर्स शुरू हो सकता है। द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषयों में हायर फैकल्टी से लेकर लैब तक के मानक पूरे होने की वजह से कॉलेज प्रशासन की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद हर विषय में छह से दस सीटों में प्रवेश लिया जाएगा।
आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ाई शुरू हुए चार दशक बीते चुके हैं। मौजूदा समय में यहां बीएएमएस कोर्स चलता है। कुछ समय पहले ही दस सीटें बढ़ने के बाद अब 50 सीटों पर प्रवेश लिए जाते हैं। लंबे समय से यहां पर परास्नातक कोर्स शुरू करने की जरूरत महसूस की जा रही है। अभी द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषय में हायर फैकल्टी लगभग पूरी है। इसके अलावा प्रयोगशाला भी सुविधायुक्त है। इस वजह से कॉलेज प्रशासन इन विषयों में परास्नातक कोर्स शुरू कराने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने की संभावना है।
प्रदेश के तीन कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई
प्रदेश में झांसी के अलावा बांदा, मुजफ्फरनगर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, पीलीभीत व बरेली में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज संचालित हैं। मगर इन आठ कॉलेजों में से सिर्फ लखनऊ, वाराणसी और पीलीभीत में ही परास्नातक कोर्स संचालित हैं। झांसी में मंजूरी मिलने के बाद पीजी की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों की संख्या चार हो जाएगी।
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सस्ती होगी पढ़ाई, मिलेगा मानदेय
झांसी के कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू होने के बाद छात्रों को काफी राहत मिलेगी। निजी कॉलेज में मोटी फीस देकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जबकि, यहां पर मानदेय मिलेगा। वहीं, परास्नातक स्तर पर छात्राओं के प्रवेश के बाद ओपीडी में मरीज देखने में डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी।
द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषयों में हायर फैकल्टी लगभग पूरी है। प्रयोगशाला भी सुविधायुक्त है। ऐसे में इन विषयों में परास्नातक कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज।
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झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में परास्नातक कोर्स शुरू हो सकता है। द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषयों में हायर फैकल्टी से लेकर लैब तक के मानक पूरे होने की वजह से कॉलेज प्रशासन की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद हर विषय में छह से दस सीटों में प्रवेश लिया जाएगा।
आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ाई शुरू हुए चार दशक बीते चुके हैं। मौजूदा समय में यहां बीएएमएस कोर्स चलता है। कुछ समय पहले ही दस सीटें बढ़ने के बाद अब 50 सीटों पर प्रवेश लिए जाते हैं। लंबे समय से यहां पर परास्नातक कोर्स शुरू करने की जरूरत महसूस की जा रही है। अभी द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषय में हायर फैकल्टी लगभग पूरी है। इसके अलावा प्रयोगशाला भी सुविधायुक्त है। इस वजह से कॉलेज प्रशासन इन विषयों में परास्नातक कोर्स शुरू कराने की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने की संभावना है।
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प्रदेश के तीन कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई
प्रदेश में झांसी के अलावा बांदा, मुजफ्फरनगर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, पीलीभीत व बरेली में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज संचालित हैं। मगर इन आठ कॉलेजों में से सिर्फ लखनऊ, वाराणसी और पीलीभीत में ही परास्नातक कोर्स संचालित हैं। झांसी में मंजूरी मिलने के बाद पीजी की पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों की संख्या चार हो जाएगी।
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सस्ती होगी पढ़ाई, मिलेगा मानदेय
झांसी के कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू होने के बाद छात्रों को काफी राहत मिलेगी। निजी कॉलेज में मोटी फीस देकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जबकि, यहां पर मानदेय मिलेगा। वहीं, परास्नातक स्तर पर छात्राओं के प्रवेश के बाद ओपीडी में मरीज देखने में डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी।
द्रव्य गुण, रस शास्त्र और शरीर क्रिया विषयों में हायर फैकल्टी लगभग पूरी है। प्रयोगशाला भी सुविधायुक्त है। ऐसे में इन विषयों में परास्नातक कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज।