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Jhansi: पहली महिला नगर आयुक्त आकांक्षा का तबादला, साढ़े दस महीने के कार्यकाल में कई घोटाले किए उजागर
Fri, 11 Sep 2026 12:12 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 11 Sep 2026 12:12 PM IST
सार
झांसी की पहली महिला नगर आयुक्त के तौर पर आकांक्षा राणा का कार्यकाल साढ़े दस महीने रहा। इस दौरान उन्होंने नगर निगम के अंदर होने वाले कई घोटालों को उजागर किया।
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नगर आयुक्त आकांक्षा राणा
- फोटो : फेसबुक
विस्तार
नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का बृहस्पतिवार को तबादला हो गया है। झांसी की पहली महिला नगर आयुक्त के तौर पर उनका कार्यकाल साढ़े दस महीने रहा। अपने इस संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान उन्होंने नगर निगम में टैक्स से लेकर तेल तक में गड़बड़ी पकड़ी। शासन ने उन्हें विशेष सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स/ प्रबंध निदेशक यूपीडेस्को की जिम्मेदारी सौंपी हैं। वहीं, बाराबंकी के सीडीओ बी सूदन को झांसी का नया नगर आयुक्त बनाया गया है।
पिछले साल 29 अक्तूबर को आकांक्षा राणा ने नगर आयुक्त का कार्यभार संभाला था। तब नगर निगम पर लगभग 40 करोड़ की उधारी थी। नगर निगम के बेजा खर्चों में कटौती करके उन्होंने उधारी काफी हद तक कम कर दी। इसके अलावा नगर निगम में व्यावसायिक भवनों के टैक्स कम करने का खेल भी उजागर किया। साथ ही मेजर ध्यानचंद संग्रहालय और स्पेस म्यूजियम के संचालन में इस्तेमाल होने वाले तेल का खेल भी इन्हीं के कार्यकाल में सामने आया।
मेयर समेत कुछ पार्षद थे असंतुष्ट
इससे नगर निगम को लाखों रुपये की बचत भी हुई। उन्होंने निर्माण विभाग की निविदाओं में होने वाले खेल पर भी काफी हद तक लगाम लगाई। महानगर में अवैध होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ भी उन्होंने सख्ती से कार्रवाई कराई। एक व्यक्ति पर एफआईआर भी दर्ज हुई। नगर आयुक्त की पहचान तेजतर्रार अधिकारी की थी। हालांकि, उनकी इसी कार्यशैली से मेयर समेत कुछ पार्षद असंतुष्ट भी थे।
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प्रमोद झा का प्रमोशन, अब योगेश्वर सिंह बने सिटी मजिस्ट्रेट
झांसी के सिटी मजिस्ट्रेट प्रमोद झा का प्रमोशन हो गया है। उन्हें गोंडा का एडीएम वित्त एवं राजस्व बनाया गया है। उनकी जगह कुशीनगर के एसडीएम योगेश्वर सिंह को झांसी का सिटी मजिस्ट्रेट बनाया गया है।
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पिछले साल 29 अक्तूबर को आकांक्षा राणा ने नगर आयुक्त का कार्यभार संभाला था। तब नगर निगम पर लगभग 40 करोड़ की उधारी थी। नगर निगम के बेजा खर्चों में कटौती करके उन्होंने उधारी काफी हद तक कम कर दी। इसके अलावा नगर निगम में व्यावसायिक भवनों के टैक्स कम करने का खेल भी उजागर किया। साथ ही मेजर ध्यानचंद संग्रहालय और स्पेस म्यूजियम के संचालन में इस्तेमाल होने वाले तेल का खेल भी इन्हीं के कार्यकाल में सामने आया।
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मेयर समेत कुछ पार्षद थे असंतुष्ट
इससे नगर निगम को लाखों रुपये की बचत भी हुई। उन्होंने निर्माण विभाग की निविदाओं में होने वाले खेल पर भी काफी हद तक लगाम लगाई। महानगर में अवैध होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ भी उन्होंने सख्ती से कार्रवाई कराई। एक व्यक्ति पर एफआईआर भी दर्ज हुई। नगर आयुक्त की पहचान तेजतर्रार अधिकारी की थी। हालांकि, उनकी इसी कार्यशैली से मेयर समेत कुछ पार्षद असंतुष्ट भी थे।
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