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Jhansi News: आत्मघाती कदम उठाने से अच्छा है कि विधिक सेवा केंद्र का लें सहारा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। आज के परिवेश में महिलाएं घरेलू विवाद को लेकर आत्मघाती या फिर एक-दूजे से अलग जीवन बिताना बेहतर समझ रही हैं। यह उनकी समस्या का समाधान नहीं है क्योंकि एक उम्र ऐसी आती है, जब जीवन साथी की जरूरत होती है। इसलिए विवादों को लेकर कोई कदम उठाने से पहले सोचें समझें, फिर भी हल न मिले तो विधिक सेवा प्राधिकरण में आकर अपील कर सकते हैं। यहां उनकी समस्या का समाधान करने का पूर्ण प्रयास किया जाएगा। यह बात जजी परिसर में स्थित लाइब्रेरी हॉल में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में अधिवक्ता साधना सिंह पटेल ने कही।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले बेटी को शिक्षित बनाएं क्योंकि शिक्षित होने से वह सशक्त बनने के साथ ही भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ ही अपने जीवन को संवार सकेंगी। अधिवक्ता गीता बौद्ध ने कहा कि शादी के बाद जब नए परिवेश में दुल्हन आती है तो उसे ढलने में समय लगता है पर ससुरालीजन उसे अगले ही दिन से उनके परिवेश में ढालने का तानाबाना कसने लगते हैं। यह एक तरीके से गलत है क्योंकि बदलाव में उसमें समय लगता है। यही दंपति के बीच तकरार का कारण बन जाता है।
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अधिवक्ता नेहा गौतम ने कहा कि कुछ महिलाएं अवसाद में आत्मघाती कदम उठा लेती हैं। उन्हें यह भी चिंता नहीं रहती कि उनके पीछे बच्चों का क्या हाल होगा। इसलिए किसी भी प्रकार की समस्या होने पर महिलाएं विधिक सेवा प्राधिकरण की सेवा ले सकती हैं। इसमें एक मध्यस्तता केंद्र हैं। यदि पुरुष समझौता करने को तैयार नहीं होता और महिला राजी होती है तो ऐसे में न्यायाधीश पति को पत्नी को भरण पोषण की रकम देने का आदेश देता है। मौके पर उमा चौधरी, भाग्यश्री रायकवार, अनामिका, अनीता वर्मा आदि अधिवक्ता मौजूद रहीं।
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