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यहां इस्लाम की रोशनी में निपटते हैं घरेलू झगड़े, उलमा बनते हैं गवाह
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झांसी। घरेलू झगड़ों और पारिवारिक विवादों के निपटारे के लिए पांच साल पहले ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से जीवनशाह स्थित मस्जिद शहीदैन में दारुल कजा (शरई पंचायत) की स्थापना की गई थी। शरई पंचायत में इस्लाम और कुरान की रोशनी में उलमाओं की मौजूदगी में घरेलू विवादों का निपटारा किया जाता है। पर्सनल लॉ बोर्ड के सामने सदस्यों ने अपनी पांच सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के आर्गनाइजर जबरेज आलम कासमी मुख्य अतिथि रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने बताया कि दारुल कजा को भारत में सन 1994 में स्थापित किया गया था। वहीं पिछले पांच सालों पहले संस्था की इकाई को स्थापित किया गया था। बताया कि इसका मकसद घरेलू विवादों का इस्लाम और कुरान की रोशनी में निपटाना है। इससे अदालतों पर मुकद्दमों का बोझ कम होने के साथ ही लोगों का वक्त और पैसा भी बच रहा है। बताया कि आपसी विवादों के मामलों को दोनों ही पक्षों की सावधानीपूर्वक काउंसलिंग की जाती है। इस दौरान गलती पाए जाने वाले व्यक्ति को इस्लाम और हदीसों का हवाला देते हुए उसे समझाया जाता है। हालांकि दारुल कजा में आए 95 फीसदी मामलों को निपटाकर आपसी समझौता करा दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घरेलू विवादों के लिए अदालतों का रुख करने की जगह दारुल कजा में मामलों के निस्तारण की पहल करें।
संचालन मुफ्ती इमरान नदवी ने एवं आभार मुफ्ती अफ्फान असअदी ने व्यक्त किया। इस मौके पर हाजी नासिर, हाजी मजहर अली, मुफ्ती सिद्दीक, सैयद नूर अहमद, मोहम्मद अशरफ, हाफिज हफीज, हाजी शाहिद, हाजी शब्बीर, मौलाना शमीम आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने बताया कि दारुल कजा को भारत में सन 1994 में स्थापित किया गया था। वहीं पिछले पांच सालों पहले संस्था की इकाई को स्थापित किया गया था। बताया कि इसका मकसद घरेलू विवादों का इस्लाम और कुरान की रोशनी में निपटाना है। इससे अदालतों पर मुकद्दमों का बोझ कम होने के साथ ही लोगों का वक्त और पैसा भी बच रहा है। बताया कि आपसी विवादों के मामलों को दोनों ही पक्षों की सावधानीपूर्वक काउंसलिंग की जाती है। इस दौरान गलती पाए जाने वाले व्यक्ति को इस्लाम और हदीसों का हवाला देते हुए उसे समझाया जाता है। हालांकि दारुल कजा में आए 95 फीसदी मामलों को निपटाकर आपसी समझौता करा दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि घरेलू विवादों के लिए अदालतों का रुख करने की जगह दारुल कजा में मामलों के निस्तारण की पहल करें।
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संचालन मुफ्ती इमरान नदवी ने एवं आभार मुफ्ती अफ्फान असअदी ने व्यक्त किया। इस मौके पर हाजी नासिर, हाजी मजहर अली, मुफ्ती सिद्दीक, सैयद नूर अहमद, मोहम्मद अशरफ, हाफिज हफीज, हाजी शाहिद, हाजी शब्बीर, मौलाना शमीम आदि मौजूद रहे।
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