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इस दफे दोगुनी क्षमता से भरा जाएगा लखेरी बांध
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इस दफा दोगुनी क्षमता से भरा जाएगा लखेरी बांध
झांसी। लखेरी बांध पिछली बार के मुकाबले इस दफा दोगुनी क्षमता के साथ भरा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि अभी पुनर्वास का काम पूरा नहीं हो सका। इसे भी अगले माह तक पूरा कर लेना है। बांध के लिए करीब चार सौ हेक्टेयर भूमि को डूब क्षेत्र बनाया गया है। इसके लिए चार गांव खाली कराए जा चुके है।
मऊरानीपुर के लखेरी गांव के पास वर्ष 2003 से लखेरी बांध का निर्माण शुरू हुआ। इसकी मदद से किशोरपुरा, दुबारा, चिरौरा, तुर्क लैचूरा, कुटैरा समेत 36 गांवों की 3168 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। पिछले वर्ष पहली बार बांध में पानी भरा गया था। उस दौरान क्षमता से सिर्फ तीस फीसदी पानी ही भरा जा सका। अब इसे बढ़ाकर साठ फीसदी करने की योजना बनाई है। हालांकि अभी विस्थापन संबंधी कार्य पूरे न होने से इसमें पेंच भी फंसा हुआ है।
बांध के लिए बुरई, रेवन, बछेरा एवं किशोरपुरा गांव को डूब क्षेत्र बनाया गया है। पिछले काफी समय से इन गांवों को खाली कराने का काम चल रहा है। बुरई, बछेरा एवं रेवन गांव में अधिकांश काम पूरा हो गया। लेकिन अभी बुरई में विवाद बना हुआ है। अभियंताओं के मुताबिक परिवार की संख्या को लेकर यहां विवाद है। इसी गांव के विवाद के चलते ही बांध पूरी क्षमता से नहीं भर पा रहा है। अभियंताओं का कहना है आगामी मानसून में इसे साठ फीसदी भरने के निर्देश मिले हैं।
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पिछली बार के मुकाबले साठ फीसदी तक बांध को भरे जाने का लक्ष्य तय हुआ है। मानसून को देखते हुए तैयारी की जा रही है। विस्थापन को लेकर विवाद को भी निपटाने की कोशिश की जा रही है। सिद्धार्थ कुमार, अधिशासी अभियंता, लखेरी बांध सिंचाई खंड पंचम परियोजना
इनसेट
देरी से लागत में 45 करोड़ का इजाफा
इस बांध परियोजना को 2010 में आरंभ होना था लेकिन, बांध परियोजना अभी तक पूरी क्षमता के मुताबिक आरंभ नहीं हो सकी। परियोजना में हुई लेटलतीफी से इसकी लागत भी बढ़ गई। शुरूआत में परियोजना पर कुल 85 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान किया गया था। लेकिन, अभी तक कुल 130 करोड़ रुपये खर्च हो चुके। जबकि एक गांव के पुनर्वास का काम भी बाकी है।
इनसेट
डूब इलाके में 400 हेक्टेयर भूमि
बांध परियोजना के लिए पांच गांव की करीब 400 हेक्टेयर भूमि को डूब क्षेत्र बनाया गया है। यहां 13 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी एकत्रित किया जाएगा। इसे नहरों के माध्यम से विभिन्न इलाकों में भेजा जाएगा। सिंचाई विभाग अभियंताओं का दावा है कि सिंचाई के लिए सभी इलाकों में नहरें बना ली गई हैं।
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झांसी। लखेरी बांध पिछली बार के मुकाबले इस दफा दोगुनी क्षमता के साथ भरा जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि अभी पुनर्वास का काम पूरा नहीं हो सका। इसे भी अगले माह तक पूरा कर लेना है। बांध के लिए करीब चार सौ हेक्टेयर भूमि को डूब क्षेत्र बनाया गया है। इसके लिए चार गांव खाली कराए जा चुके है।
मऊरानीपुर के लखेरी गांव के पास वर्ष 2003 से लखेरी बांध का निर्माण शुरू हुआ। इसकी मदद से किशोरपुरा, दुबारा, चिरौरा, तुर्क लैचूरा, कुटैरा समेत 36 गांवों की 3168 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जा सकेगा। पिछले वर्ष पहली बार बांध में पानी भरा गया था। उस दौरान क्षमता से सिर्फ तीस फीसदी पानी ही भरा जा सका। अब इसे बढ़ाकर साठ फीसदी करने की योजना बनाई है। हालांकि अभी विस्थापन संबंधी कार्य पूरे न होने से इसमें पेंच भी फंसा हुआ है।
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बांध के लिए बुरई, रेवन, बछेरा एवं किशोरपुरा गांव को डूब क्षेत्र बनाया गया है। पिछले काफी समय से इन गांवों को खाली कराने का काम चल रहा है। बुरई, बछेरा एवं रेवन गांव में अधिकांश काम पूरा हो गया। लेकिन अभी बुरई में विवाद बना हुआ है। अभियंताओं के मुताबिक परिवार की संख्या को लेकर यहां विवाद है। इसी गांव के विवाद के चलते ही बांध पूरी क्षमता से नहीं भर पा रहा है। अभियंताओं का कहना है आगामी मानसून में इसे साठ फीसदी भरने के निर्देश मिले हैं।
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पिछली बार के मुकाबले साठ फीसदी तक बांध को भरे जाने का लक्ष्य तय हुआ है। मानसून को देखते हुए तैयारी की जा रही है। विस्थापन को लेकर विवाद को भी निपटाने की कोशिश की जा रही है। सिद्धार्थ कुमार, अधिशासी अभियंता, लखेरी बांध सिंचाई खंड पंचम परियोजना
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देरी से लागत में 45 करोड़ का इजाफा
इस बांध परियोजना को 2010 में आरंभ होना था लेकिन, बांध परियोजना अभी तक पूरी क्षमता के मुताबिक आरंभ नहीं हो सकी। परियोजना में हुई लेटलतीफी से इसकी लागत भी बढ़ गई। शुरूआत में परियोजना पर कुल 85 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान किया गया था। लेकिन, अभी तक कुल 130 करोड़ रुपये खर्च हो चुके। जबकि एक गांव के पुनर्वास का काम भी बाकी है।
इनसेट
डूब इलाके में 400 हेक्टेयर भूमि
बांध परियोजना के लिए पांच गांव की करीब 400 हेक्टेयर भूमि को डूब क्षेत्र बनाया गया है। यहां 13 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी एकत्रित किया जाएगा। इसे नहरों के माध्यम से विभिन्न इलाकों में भेजा जाएगा। सिंचाई विभाग अभियंताओं का दावा है कि सिंचाई के लिए सभी इलाकों में नहरें बना ली गई हैं।