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डीजल चोरी व मरम्मत के नाम पर घालमेल

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 09:46 PM IST
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irregularity in diesel head at nagar nigam workshop
नगर निगम की लाइफ लाइन कार्यशाला आउटसोर्स पर लगाए गए कर्मचारियों के  हवाले है। नगर निगम के अधिकारियों ने बड़े-बड़े खेलों को अंजाम देने के लिए  पूरा दारोमदार आउटसोर्स पर तैनात किए गए कर्मचारियों पर डाला हुआ है। जबकि  नगर निगम के नियमित कर्मचारी मौज काट रहे हैं। आलम यह है कि कार्यशाला में  वाहन संचालन में डीजल की चोरी और मरम्मत के नाम पर जमकर घालमेल चल रहा है। नगर निगम के कार्यशाला से रोज करीब 137 वाहनों का संचालन होता है। इन  वाहनों पर तैनात चालकों में से 89 वाहन चालक आउटसोर्स पर तैनात हैं। इनमें  से कई मनमाने तरीके से काम करते हैं। इसके साथ ही करीब 35 हेल्परों में से  अधिकांश आउटसोर्स हैं। इसके चलते कार्यशाला में वाहनों के संचालन में जमकर  खेल होता है। नगर निगम की ओर से हर वाहन चालक को डीजल की पर्ची दी जाती है।  मौजूदा दौर में एक-एक वाहन को तीन-तीन पर्चिंयां दी जा रही हैं। वाहन चालक  एक समय काम करने के बाद वाहन इधर-उधर खड़े कर लेते हैं। वहीं कार्यशाला में  तीन मिस्त्री, पंचर समेत तमाम मरम्मत कार्य करने वाले कर्मचारी भी आउटसोर्स  पर तैनात हैं। वाहनों और मशीनों की रिपेयरिंग के दौरान लंबे-चौडे़ बिल  बनाकर भुगतान कर लिया जाता है। लेकिन वाहन में बदले गए पार्ट का कोई  अता-पता नहीं होता। किसी तरह की कार्रवाई की भय न होने से आउटसोर्स  कर्मचारी मनमानी करते हैं। जबकि नियमित कर्मचारियों को कार्यशाला में काम  नहीं मिलता। साथ ही कार्यशाला में काम कर रहे तमाम कर्मचारियों के सालों से  पटल नहीं बदले गए हैं। उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अशोक  प्याल का कहना है कि पहले वाहनों के संचालन के बाद चालक को सफाई हवलदार से  हस्ताक्षर कराने होते थे, लेकिन मौजूदा दौर में मनमाने तरीके से वाहन दौड़  रहे हैं। साथ ही डीजल की चोरी होने का आरोप लगाकर इसकी जांच की मांग की है।  कहा कि नियमित कर्मचारियोें को कार्यशाला में काम मिलना चाहिए। नगर निगम ने फॉगिंग और सैनिटाइजेशन कार्य में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों को  वेतन नहीं दिया है। फॉगिंग में लगाए गए 37 आउटसोर्स कर्मियों को बीते डेढ़  माह से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में फॉगिंग का कार्य ठप पड़ा है। उधर,  सैनिटाइजेशन में लगाए गए प्राइवेट कर्मचारियों को बीते 51 दिन से वेतन का  भुगतान नहीं किया गया है। एक कर्मचारी ने बताया कि उनको नगर निगम के  ठेकेदार ने 29 मार्च को 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने के लिए  कहा था, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला। डीजल चोरी और वेतन न मिलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसा है, तो  इसे दिखवाता हूं। कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जाएगा। डीजल के बारे  में भी जांच कराएंगे। अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त
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