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Jhansi News: तीन साल बाद झांसी पुलिस के बेड़े में लौटी ‘लेडी डिटेक्टिव’

Mon, 24 Aug 2026 02:37 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 02:37 AM IST
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Lady Detective returns to the Jhansi police fleet after three years.
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। अपराधियों की धरपकड़ और अनसुलझे मामलों की गुत्थी सुलझाने के लिए झांसी पुलिस के बेड़े में तीन साल बाद जर्मन शेफर्ड नस्ल की नई लेडी डॉग रूही शामिल हुई है। यह लेडी डॉग ट्रैकर के तौर पर काम करेगी। ग्वालियर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में नौ माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद झांसी में उसे पहली तैनाती दी गई। उसके साथ डॉग हैंडलर और सहायक को भी इस लंबे प्रशिक्षण के बाद यहां भेजा गया है। अनसुलझे मामलों में यह पुलिस की नाक बनेंगे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अपराध स्थल से मिलने वाली गंध या किसी वस्तु की गंध के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में मदद करेगी। खास तौर से जिन मामलों में प्रत्यक्षदर्शी अथवा सीसीटीवी कैमरे नहीं होते, उनमें इनकी भूमिका अहम साबित हो सकेगी। इसके पहले झांसी के डॉग स्क्वायड में लूसी और यूली नामक दो लेडी जर्मन शेफर्ड काम कर चुकी हैं। 50 से भी अधिक मामलों को सुलझाने में दोनों ने पुलिस की मदद की थी। यूली की 31 अगस्त, 2023 को मौत हो गई, जबकि लूसी उर्फ रानी की 31 मई, 2022 में मौत हुई थी। उनकी मौत के बाद से झांसी पुलिस के पास कोई खोजी कुत्ता नहीं बचा। अब रूही की तैनाती के बाद से झांसी में नया डॉग दस्ता तैयार हो गया। सीओ लाइन आसमा वकार का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर इसकी मदद ली जाएगी।
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पुलिस को जर्मन शेफर्ड पर सबसे अधिक भरोसा
जर्मन शेफर्ड को उसकी बुद्धिमत्ता, आत्मविश्वास, साहस, सतर्कता, शारीरिक क्षमता और प्रशिक्षण को जल्दी सीखने की क्षमता के कारण पुलिस विभाग में सबसे अधिक मांग है। रूही के हैंडलर गौरव चाहर के मुताबिक अलग-अलग गंध पहचानने, किसी व्यक्ति की गंध का पीछा करने, विस्फोटक या मादक पदार्थ तलाशने और लापता लोगों की खोजने जैसे काम के लिए इसे प्रशिक्षित किया गया है। ट्रैकिंग में प्रशिक्षित कुत्ता किसी व्यक्ति की विशिष्ट गंध को पकड़कर उसके रास्ते का पीछा कर सकता है।
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कई चर्चित मामलों के खुलासा में मददगार रहे जर्मन शेफर्ड
जर्मन शेफर्ड नस्ल के पुलिस डॉग की मदद से कई चर्चित मामलों का खुलासा हो चुका। कासगंज जनपद में वर्ष 2022 में जर्मन शेफर्ड डॉग ‘जॉनी’ ने 15 साल के किशोर की हत्या मामले में इस्तेमाल हुए ट्रैक्टर को करीब 22 किलोमीटर दूर से ही ट्रेस कर लिया था। इस अहम लीड की मदद से पुलिस ने 48 घंटे के भीतर इस मामले को सुलझाया। वहीं, ऊधमसिंह नगर में जर्मन शेफर्ड ‘कैटी’ ने हत्या के मामले में खून से सने कपड़े की गंध सूंघकर संदिग्ध की ओर संकेत किया। करीब 30 सेकंड में संदिग्ध की पहचान हो गई। झांसी में भी लूसी और यूली ने कई चर्चित मामलों के खुलासे में अहम योगदान किया था।
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