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Jhansi News: आज से इंटरसिटी निरस्त, बस ही एकमात्र विकल्प
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झांसी। झांसी से कानपुर व लखनऊ के लिए रोजाना हजारों की संख्या में यात्री अप-डाउन करते हैं। इनमें अधिकांश व्यापारी और नौकरीपेशा लोग होते हैं। इस कारण यह दोनों वर्गों के लिए लाइफ लाइन है, लेकिन आज से यह ट्रेन दो महीने के लिए निरस्त रहेगी। लखनऊ मंडल में ब्रिज निर्माण के कारण यह निर्णय लिया गया।
मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि झांसी से लखनऊ जाने वाली इंटरसिटी 19 मार्च से 30 अप्रैल तक निरस्त रहेगी। वहीं झांसी की ओर आने वाली इंटरसिटी 20 मार्च से एक मई तक नहीं चलेगी। इसी प्रकार से झांसी-लखनऊ पैसेंजर 20 मार्च से 30 अप्रैल तक निरस्त रहेगी। इसके अलावा अन्य ट्रेनों पर भी इसका असर रहेगा। रोजाना मोंठ के लिए यात्रा करने वाले सीपरी बाजार निवासी कुमार दीप ने बताया कि वह रोजाना ट्रेन से सफर कर बैंक जाते हैं। मगर, अब बस के माध्यम से एक महीने तक सफर करना होगा जो ट्रेन से महंगा साबित होगा। इतना ही नहीं बस से सफर करने पर समय भी ज्यादा लगेगा।
आईटीआई निवासी टि्विंकल साहू ने बताया कि वह व्यापार के मकसद से कानपुर जाते हैं। अब परेशानी होगी। कुछ चावल का व्यापार करने वाले लोगों के सामने संकट आ गया है क्योंकि, अलसुबह चलने वाली पैसेंजर ट्रेन से सवार होकर पुखरांय पहुंचते हैं और वहां से पैंसेंजर से चावल लेकर आते हैं। उन्हें यह साधन बेहद सस्ता पड़ता है पर अब ट्रक के माध्यम से लाने पर उन्हें ज्यादा लागत आएगी।
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मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि झांसी से लखनऊ जाने वाली इंटरसिटी 19 मार्च से 30 अप्रैल तक निरस्त रहेगी। वहीं झांसी की ओर आने वाली इंटरसिटी 20 मार्च से एक मई तक नहीं चलेगी। इसी प्रकार से झांसी-लखनऊ पैसेंजर 20 मार्च से 30 अप्रैल तक निरस्त रहेगी। इसके अलावा अन्य ट्रेनों पर भी इसका असर रहेगा। रोजाना मोंठ के लिए यात्रा करने वाले सीपरी बाजार निवासी कुमार दीप ने बताया कि वह रोजाना ट्रेन से सफर कर बैंक जाते हैं। मगर, अब बस के माध्यम से एक महीने तक सफर करना होगा जो ट्रेन से महंगा साबित होगा। इतना ही नहीं बस से सफर करने पर समय भी ज्यादा लगेगा।
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आईटीआई निवासी टि्विंकल साहू ने बताया कि वह व्यापार के मकसद से कानपुर जाते हैं। अब परेशानी होगी। कुछ चावल का व्यापार करने वाले लोगों के सामने संकट आ गया है क्योंकि, अलसुबह चलने वाली पैसेंजर ट्रेन से सवार होकर पुखरांय पहुंचते हैं और वहां से पैंसेंजर से चावल लेकर आते हैं। उन्हें यह साधन बेहद सस्ता पड़ता है पर अब ट्रक के माध्यम से लाने पर उन्हें ज्यादा लागत आएगी।
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